[तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है ये माना की महफ़िल जवान है हसीं है ] x २

[मुझे फिर तबाह कर, मुझे फिर रुला जा सितम करने वाले, कहीं से तू आ जा ] x २  कहीं से तू आ जा

आँखों में तेरी ही, सूरत बसी है तेरी ही तरह तेरा गम भी हंसी है

तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है ये माना की महफ़िल जवान है हसीं है

तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है

[समझ में न आये, ये क्या माजरा है तुझे पा के दिल में ये खाली सा क्या है ] x २  ये खाली सा क्या है

क्यूँ हर वक़्त दिल में कोई बेकली है क्यूँ हर वक़्त सीने में रहती कमी है

तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है ये माना की महफ़िल जवान है हसीं है

तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है

[जिधर भी ये देखें, जहां भी ये जाएँ तुझे ढूंढती हैं, ये पागल निगाहें ] x २ ये पागल निगाहें

मैं जिंदा हूँ लेकिन, कहाँ ज़िन्दगी है मेरी ज़िन्दगी तू कहाँ खो गयी है

तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है ये माना की महफ़िल जवान है हसीं है

डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय www.socialsandesh.in के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों .कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और social sandesh की उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं है ।

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