करते है व्यापार मगर क्यों प्यार उसे हम कहते हैं

हर दिल में एक तराजू है बिन तोले  कोई क्या देगा
कागज़ पे नही तो दिल में सही पूरा हिसाब लगा लेगा

मानो न मानो पर सच है दिल से हम व्यापारी हैं
आँखों आँखों में तोलते है कि  सौदा  कितना भारी है

कहाँ कहँ कितना कितना फायदा हम को होना
किससे  कितना मिलना है और किस संग कितना खोना है

कुछ मुफ्त नही मिलता है यहाँ हर चीज का दाम चुकाना है
जो मुफ्त दिखायी पड़ता है दरअसल वो तुझे फ़साना है

सोचो तो जरा अबतक  तुमने  क्या मुफ्त में पाया है तुमने
आखिर तो हर उपलब्धि का इक  मोल चुकाया है तुम ने

कभी धन से किया चुकता तुमने  कभी तन से चुकाया है तुमने
कभी पहले ही कर दिया अदा कभी  बाद में बिल पाया तुम ने

उपहार जिसे तुम कहते हो दरअसल उधार में कहता हूँ
उपहार के बदले में आखिर उपहार लौटाया है तुमने

इसे लें दें का नाम दो या फिर दो तरफ़ा प्यार कहो
किसी से कुछ पाने के लिए कुछ तो गवाना पड़ता है

प्यार के बदले प्यार चाहिए उपहार दिया उपहार चाहिए
अब नही तो अगली बार चाहिए बदला मगर हर बार चाहिए

करते है व्यापार मगर  क्यों  प्यार उसे हम कहते हैं
अरे लेन  देन  ही  प्यार है तो व्यापार किसे फिर कहते हैं

अब देखूंगा कौन है ऐसा जो है मेरा साथ निभाता

आसमान में उड़ने वालों अब तुम से क्या मेरा नाता
मै  पिंजरे का पंछी ठहरा ना कहीं आता न कही जाता

जब तक जितना उड़ सकता था मैंने सब का साथ निभाया
अब देखूंगा  कौन है ऐसा जो है मेरा साथ  निभाता

बिना परिश्रम दाना पानी वक्त से पहला ही मिल जाता
पर आसमान में तुम संग उड़ना मुझ को याद बहुत है आता

कभी नदी को लांघा हमने  कभी समुन्दर नापा हमने
धरती की तो बात ही  क्या है आसमान को नापा हमने

मीलो मीलों भूखे उड़कर अपना दाना ढूंढ के लाना
मिला जो कुछ तो खा लेना वरना भूखे भी सो जाना

बिना कमाए दाना पानी वक़्त से पहले अब मिल जाना
तुम कहते हो मजे का जीना मै  कहता ज़िंदा मर जाना

पर है पर परवाज नही जुबान है पर आवाज़ नही
कितना खो कर इतना पाया इसका तुमको अंदाज़ नही

आज़ादी का नाम नही बचा आत्मसम्मान नही
भूखा मरना आसान है पर ये जीना आसान नहीं

नहीं चाहिए ऐसा जीना  बिना परिश्रम खाना पीना
ले जाओ ये दूध कटोरी बीएस मुझ को आज़ाद करो
पंछी का जीवन पिंजरे में  और न तुम बर्बाद करो

तुमने पत्थर कितनी बेरहमी से मारा है

चेहरे की लकीरों को  खुद गौर से तुम पढ़ लो
हम तुम को बताएं क्या , क्या हाल हमारा है

कभी दर्द हमारा कोई तुम बाँट नही पाए
नाहक क्यों पूछते हो  क्या हाल तुम्हारा है

इक हाथ में है नश्तर इक हाथ तेरे मरहम
मर्ज़ी तेरी चलनी है भले ज़ख्म हमारा है

शीशा ही नहीं टूटा ाज़ी अक्स भी टूटा है
तुमने पत्थर कितनी  बेरहमी से मारा है

तुम जीत गए मुझसे तो कौन अजूबा हुआ
ये शख्स तो जीवन भर हर शख्स से हारा है

तन्हाई से तंग आकर किसी और को संग कर लूँ
ना चाहत है अपनी ना  उसूल हमारा है

माना कि  कसम टूटी नही तुम बिन रह पाए
सच मानो मगर इसमें नही दोष हमारा है

पैरों को अगर रोका तो दिल तन से निकल भगा
वो कहता है कि  उसको तेरे दिल ने पुकारा है

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