जैसी तुम्हारी इच्छा

मोहिनी को कौन नहीं जानता था। जैसा उसका नाम, वैसे ही उसके करम। मोहिनी अपनी बातों से सदा सबका मन मोह लेती थी। हर किसी के दुख: सुख में सब का साथ देती थी।...

शिवानी का टुनटुनवा …-उपासना सियाग

शिवानी  आज सुबह से मन ही मन बहुत खुश थी। रात को  अच्छे से नींद भी नहीं आयी फिर भी एक दम तरो-ताज़ा लग रही थी। पूजा पाठ में भी मन नहीं लग रहा...

क्या वो प्यार था-उपासना सियाग

जब तीसरी बार डोर बेल बजाने बाद भी दरवाज़ा नहीं खुला तो थोडा सा मैं चौंकी ,क्या बात हो सकती है कुहू दरवाज़ा क्यूँ नहीं खोल रही ,उसी ने तो बुलाया था फोन कर...

सुख-दुख-उपासना सियाग

हर्तिषा धीरे -धीरे चलती हुई अपने सुख -दुःख करने की जगह आ बैठी। उसका मानना है कि घर में एक जगह ऐसी भी होनी चाहिए जहाँ इंसान अपना सुख -दुःख करके अपने आप से...

शरद जोशी की व्यंग्य रचना: अतिथि तुम कब जाओगे?

तुम्हारे आने के चौथे दिन, बार-बार यह प्रश्न मेरे मन में उमड़ रहा है, तुम कब जाओगे अतिथि! तुम कब घर से निकलोगे मेरे मेहमान! तुम जिस सोफ़े पर टांगें पसारे बैठे हो, उसके ठीक...

वंचिता

पहले चलन कुछ यूं था कि घर में बेटा होता तो राजा कहा जाता और बेटी होती तो रानी। चंदा का भी बेटा हुआ तो उसे राजा कहा गया। नाम बिगडते-बिगडते रजनू हो गया।...

छोटी लकीर बड़ी लकीर-उपासना सियाग

दिसम्बर  के छोटे-छोटे दिन। भागते-दौड़ते भी दिन पकड़ से जैसे छूटा जाता है। सुबह पांच बजे से लेकर दोपहर ढ़ाई बजे तक एक टांग पर दौड़ते रहना वेदिका की आदत में शामिल है। अब...

तीन पुतले

महाराजा चन्द्रगुप्त का दरबार लगा हुआ था। सभी सभासद अपनी अपनी जगह पर विराजमान थे। महामन्त्री चाणक्य दरबार की कार्यवाही कर रहे थे। महाराजा चन्द्र्गुप्त को खिलौनों का बहुत शौक था। उन्हें हर रोज़ एक...

भाग्य का लिखा टल नहीं सकता

बनारस के ज्योतिषाचार्य पण्डित कपिलदेव के बारे में प्रसिद्ध था वो जन्म कुण्डली और ग्रहों का अध्ययन करके किसी का भी भविष्य ठीक ठीक बता सकते थे। कभी कभी तो यदि ग्रहों का चक्कर...

बापू उसे मत फैंकना तुम्हारे काम आएगा

सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद किरपालू और उसकी बीवी धन्नो ने सोचा कि रामपुर में जाकर बसा जाय। रामपुर में ही उसका इकलौता बेटा मुरली अपने इकलौते बेटे गप्पू और पत्नी दुलारी...