क्या फेसबुक अकेलापन दूर करने की दवा है या अकेला करने का कारण |

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इसमें कोई मतभेद नहीं की आज का इंसान अकेलेपन का शिकार होता जा रहा है और बहुत बार तो ऐसा देखा गया है की अब इंसान अकेले रहने में अधिक खुश नज़र आता है | लोग अक्सर कहते हैं फेसबुक की दुनिया से बाहर निकलो और देखो आपके आस पास अच्छे पडोसी अच्छे दोस्त और अच्छे रिश्तेदार भी है |
सुनने में तो ये अच्छा लगता है लेकिन क्या सच में हर इंसान के आस पास में अच्छे रिश्तेदार, पडोसी और दोस्त हैं आज के युग में ?
अक्सर लोग अपनों से परेशान फेसबुक की आभासी दुनिया के दोस्तों में खुश पाय जाते है और कुछ तो यहाँ तक कहते हैं की फेसबुक न होता तो वो अकेलेपन का शिकार होके पागल हो जाते |
हर  इंसान एक पहचान चाहता है और ये भी चाहता है की जब वो बोले तो लोग उसे सुनें और सराहें और हमारा समाज ठीक इसका उल्टा चलता है वो किसी को न तो कोई पहचान देना चाहता है और ना ही  सराहना बल्कि आप पास के लोग तो आपकी तरक्क़ी देख के इर्ष्या वश आपको   नीचा दिखाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते अब ऐसे में  अगर फेसबुक पे यह  अवसर  मिल जाय की आपके अपनी बात कह सकें और लोग उसे  पसंद करें तो फिर कोई इस अवसर को  अपने हाथो से  क्यूँ जाने देगा |
सत्य ये है की समाज में आपसी रिश्ते अधिक लाभकारी हुआ करते हैं लेकिन इन रिश्तों में आपसी  मुहब्बत का  कम होता जाना और इर्श्यावश एक दुसरे की तारीफ से अधिक बुराइयां करना लोगों को आभासी दुनिया की तरफ खीच रहा है|
अपनी अपनी सोंच है भाई लेकिन आप का क्या ख्याल है ?
क्या फेसबुक अकेलेपन की दवा है या फेसबुक के कारन इंसान अकेला हो रहा है |

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