आईपीएस – अंशिका-राजेश चंद्रानी मदनलाल जैन

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आरती के मायके जाने से और सुहास के हॉस्टल में होने से अनुराग घर में अकेला था। शाम साढ़े सात बजे का समय होगा उसने फ्रिज में देखा डिनर की सामग्री रखी हुई थी। दूध नहीं बचा था। यह विचार करते हुए कि दूध और सुबह के लिए ब्रेड ले आये , अनुराग बाहर निकला था।
मुश्किल से बीस मिनट में वह लौट आएगा यह सोचते हुए डोर लॉक नहीं किया था। बाहर का गेट बंद करते हुए वह टहलते हुए निकल गया था। स्टोर से दूध – ब्रेड के पैकेट्स लेकर बाहर निकला तो दोस्त प्रदीप मिल गया उससे कुछ यहाँ वहाँ की हँसी मजाक करते हुए घर लौटा तो लगभग पौन घंटे का समय हो गया था।
गेट खोल अंदर आया तो घर के अंदर से मिलती आवाज से उसे अनुभव हुआ जैसे कि भीतर कोई है। उसने सावधान होकर दरवाजा खोला तो ड्राइंग रूम में कोई नहीं दिखा लेकिन बेडरूम में रोशनी से उसका शक पुख्ता हुआ। बेडरूम की लाइट्स वह बंद कर गया था। अनुराग ने चिल्ला कर पूछा – कौन है अंदर ? … भीतर से कोई प्रतिउत्तर नहीं मिला।
हाथ का कैरी बेग सेंटर टेबल पर रखते हुए ,अनुराग ने जींस में से बेल्ट निकाल हाथ में लिया और धीरे से दरवाजा पुश किया सामने कोई नहीं दिखा लेकिन बेड के उस तरफ से सिर के बाल दिखाई पड़े जिससे वहाँ किसी लड़की के सिमट के बैठे होने का उसे अनुमान हुआ ।
वह सामने पहुँचा तो कॉलोनी ही की अंशिका बैठी दिखाई दी जो काँप रही थी , अनुराग को सामने देख उसकी शक्ल रो देना शुरू होते की सी लगी। अनुराग का गुस्सा , भय खत्म हो गया। उसने बेल्ट वापिस लगा लिया और आवाज में नरमी लाते हुए अंशिका को चेयर पर बैठने के लिए कहा , अंशिका बैठने के बजाय दरवाजे के तरफ भागने को हुई तो उसने रास्ता रोक कर कहा , डरो नहीं यहाँ बैठो , भागोगी तो बात बिगड़ेगी।
अंशिका डरते हुए चेयर पर बैठ गई . अनुराग ने उससे पूछा कब से आई हो ?, उसने थूक गटकते हुए भय मिश्रित आवाज़ में कहा अंकल अभी 3-4 मिनट हुए हैं। अनुराग ने मॉनिटर ऑन कर कैमरे के फुटेज 5 मिनट बैक कर देखना शुरू किया। स्क्रीन इस तरह एडजस्ट की कि अंशिका को भी दिखाई पड़े।
लगभग 4 मिनट पहले से अंशिका के बाहर से अंदर आने से अब तक की गतिविधि , पहले उसका चौकन्ना होकर इधर – उधर देखते हुए घर में प्रवेश करना और फिर इधर उधर नजरों से ऐसे देखना जैसे कि उसे कोई खास चीज ढूँढ़नी हो सब रिकॉर्ड हुआ था। अंशिका यह देख रोने लगी तो अनुराग ने उससे कहा तुम चुप हो जाओ और डरो नहीं। अनुराग की आवाज में नरमी से अंशिका सम्हली ,उसने रोना बंद कर दिया।
तब अनुराग ने उससे पूछा अंशिका तुम्हें क्या चाहिए था ?
अंशिका ने बताया वह लेपटॉप और मोबइल उठा ले जाना चाहती थी। अंशिका की उम्र 15 साल की थी , अनुराग के बेटे सुहास से भी छोटी। वह लोअर मिडिल परिवार की थी। पड़ोस की होने से अनुराग और अंशिका इस तरह थोड़े परिचित भी थे।
अनुराग ने उससे कहा कि रात हो रही है , अभी तुम घर जाओ। तुम इस बात से डरो नहीं कि मैं तुम्हारा बुरा करूँगा। कल शाम जब मैं ऑफिस से लौटूँ तब तुम अपने पापा को लेकर आना , उन्हें नहीं बताना हो तो अकेली आ जाना। हमें कुछ बात करनी होगी।
अगले दिन शाम को अंशिका आई , उसने बताया कि पापा नाराज होंगे इसलिए उन्हें सब बताने कि उसकी हिम्मत नहीं हुई। अनुराग ने अंशिका से कहा कि वह उसकी बेटी जैसी है . जिन चीजों को वह चुराना चाहती है वह बमुश्किल 40 हजार में आ जायेंगी। लेकिन अगर वह उसके जगह किसी और आदमी के ऐसे सामने पड़ती तो या तो थाने पहुँचती या ब्लैकमेलिंग का शिकार होकर अपने शारीरिक शोषण को मजबूर होती।
अनुराग की बात सुन अंशिका – उसके चरण स्पर्श को झुकी , याचक भाव से उसने माफ़ी माँगी। अनुराग ने अंशिका के सामने ही कल के वीडिओ फुटेज डिलीट किये . इस बात को भूल जाने को कहा और अच्छे आचरण रखने की बात कह कर अंशिका को जाने के लिए कहा। अनुग्रही भाव-भंगिमा के साथ अंशिका उस दिन वापिस गई।
अंशिका के पापा से जो छोटी सी कपड़े की दुकान करते हैं ,बाद में अनुराग ने उनसे इस बात के उल्लेख किये बिना  , दोस्ती गाँठी। उन्हें कहा कि उसकी कोई बेटी नहीं है इसलिए उसका इरादा किसी बेटी की पढ़ाई और उसके भविष्य निर्माण में मदद करने का है। और अगर उन्हें ऐतराज नहीं तो अंशिका के लिए इस उद्देश्य से सहायता करना चाहता है। अंशिका के पापा एकाएक राजी नहीं हुए , उनके मन में आशंकायें आना स्वाभाविक था। अंशिका की माँ से पूछ कर जबाब देने को कहा।
बाद में सब अच्छा चला . अंशिका को अनुराग ने लैपटॉप दिलाया . मोबाइल पर ज्यादा समय व्यर्थ होगा इसलिए मोबाइल न रखने को राजी किया। समय होता तब अनुराग , अंशिका को मैथ्स और साइंस में गाइड करता। वह और आरती भी , अंशिका मॉरल सपोर्ट और मार्गदर्शन भी करते। स्नेहिल संबंध हो जाने पर अनुराग -आरती का बेटा सुहास , अंशिका से रक्षाबंधन पर्व पर राखी बँधाया करता .
समय पँछी सा उड़ता चला और उस घटना को लगभग नौ बरस बीत गए . आज अंशिका पूरे मोहल्ले में घर घर मिठाई बाँट रही है – उसका चयन आईपीएस में हो गया है।
–राजेश चंद्रानी मदनलाल जैन
Source:http://rajeshcmjain.blogspot.com

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