देवी एक ऐसी कहानी जो समाज की कुरीतियों को प्रदर्शित करती है

देवी,  आज बहुत खुश थी, खुश होने का कारण भी  था। बहुत जगह से ठुकराए जाने के बाद आज उसकी शादी जो तय हो चुकी थी।   ठुकराये जाने का कारण सिर्फ दहेज था, रूप और संस्कारों की धनी होने के, बावजूद पढ़ी लिखी होने के बावजूद  जब रिश्ते की बाधा दहेज बनती तो पीड़ा असहनीय होती। पिता की लाचारी देखी नहीं जाती सबसे, अधिक प्रेम देने वाले पिता को दुखी देख  कभी-कभी अपनी लड़की होने पर रंज खाती। पिता नहीं कभी लड़के लड़की का भेद नहीं किया छोटे भाई की अपेक्षा हमेशा देवी को ही अधिक प्रेम मिलता पिता ने पढ़ने लिखने में भी कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी परंतु अपनी हैसियत से अधिक दहेज देने में अपने को लाचार पाकर दुखी होना स्वाभाविक था।

आज घर का कोना-कोना खुशी से झूम रहा है सभी के दिलों के भीतर शहनाई गूंज रही है मां और पापा अभी भी हिसाब में लगे हैं “उन्होंने दहेज नहीं मांगा इसका अर्थ यह नहीं कि हम अपनी बेटी को ऐसे ही बिना कर दे जितनी अपनी हैसियत है और जितना सोचा है उतना हमें देना ही चाहिए” देवी के पिता सुरेंद्र ने लंबी सांस भरते हुए कहा।

देवी की मां: हां:! क्यों नहीं ऐसा परिवार मिलता है कहीं।  बड़े ही भाग्य वाली है हमारी देवी जो ऐसा परिवार मिला सास तो एकदम गाय समझो।  मैं तो कहती हूं अगर थोड़ा इधर उधर से भी लेकर करना पड़े तो संकोच मत करना देखने वाले भी याद रखें ऐसी शादी होनी चाहिए।

सुरेंद्र:  तूने तो मेरे मन की बात कह दी, सोचा तो कुछ मैंने भी ऐसा ही था सास-ससुर तो छोड़ लड़का लाखों में एक है, देखा नहीं जोड़ी कितनी अच्छी लग रही थी।  तू विश्वास नहीं करेगी, जब देवी रंजन के साथ खड़ी थी तब ऐसा लग रहा था जैसे भगवान प्रकट हो गए हैं सही कहा है किसी ने ‘संजोग है’ इतनी जगह बात बनाने की कोशिश की…. । (गहरी सांस भरते हुए)  ऐसा घर और वर देवी को ही मिल सकता है, नाम कि नहीं सच की देवी को। ( कहते हुए आंखे भर आई)

मां:( मुस्कुराकर चुटकी लेते हुए बोली ) ये आंसू विदाई के लिए भी बचा कर रखो अभी तो रिश्ता तय हुआ है तुमने तो अभी से  टसुए में बहाने शुरू कर दिए।

उधर दूसरे कमरे में देवी बिस्तर पर लेटी अपने भाई रवि की यातनाओं का शिकार हो रही थी।

रवि:  देखो ना दीदी इस फोटो में एक आंख छोटी सी लग रही है मुझे तो जीजू काने लगते हैं थोड़ा चलने में भी टेढ़ी से चलते हैं।

देखो ना एक बार।

देखो देखो काटते हुए बार-बार फोटो को देवी के आगे लहलहा रहा था देवी दूसरी तरफ करवट लेकर कसमसा रही थी।  चाहती थी फोटो हाथ से लेकर एक बार जी भर कर देख लें लेकिन लाज आती है। आज दिन में उनके साथ थी चाहती थी नजर उठा कर देख ले पर फिर वहीं आ जा रे आ गई। बस झलकियो  में ही एक दो बार नजर पड़ी थी… मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था ऐसा राजकुमार मेरे नसीब में होगा रंजन कितना प्यारा नाम है। गुदगुदी करते हुए रफी ने जैसे उसको ख्वाब से जगाया हो।

देवी झल्लाते हुए उठ बैठी दिखा क्या दिखा रहा है मारूंगी अब अगर परेशान किया तो।

रवि:  मार लो तुम तो फोटो तो देखो सच में जी झुकाने से लग रहे हैं।  देखो देखो… करते हुए फिर फोटो हवा में लहराई।

फिर वही हुआ जो अक्सर भाई बहन में होता है।  छीना झपटी में फोटो दो भागों में बट गई। एक टुकड़ा देवी के हाथ में था दूजा रवि कि हाथों में।  कमरे में सन्नाटा हो गया, दोनों एक दूसरे की शक्ल देख कर, एक दूसरे के भावों को पढ़ने की चेष्टा कर रहे थे,  कौन अधिक क्रोध में है और कौन अधिक दोषी। जल्द ही यह क्रोध डर में बदल गया। सुबह पापा मम्मी ने फोटो मांगी तो क्या कहेंगे।

रवि: दीदी बस इस बात बचा लो, कसम खाता हूं, अब कभी शैतानी नहीं करूंगा।

देवी: अब मैं क्या कर सकती हूं:, फोटो तो फट गई।  कितना भी सफाई से जोड़े तब भी पता तो चल ही जाएगा। मैं तो कह दूंगी रवि को काना लग रहा था लड़का इसलिए फाड़ दी।

रवि ने देवी के पैर पकड़ लिए “दीदी प्लीज इस बार बचा लो पापा मार-मारकर कचुमर निकाल देंगे, तुम जैसा कहोगी वैसा ही करूंगा हमेशा आपकी बात मानूंगा” पैर छोड़ गले से लिपट कर बोला इस बार मेरी बात मान लो। देवी:  बोल क्या करूं मैं, तू यही चाहता है मैं अपने सिर इल्जाम ले लूं। चल हो जाएगा तू फिक्र न कर। “मेरी प्यारी दीदी” कहते हुए अलग हुआ “लेकिन दीदी अगर आप ऐसा बोलोगी कि आप ने फाड़ी है तो गलत मतलब निकाला जाएगा मेरे पास एक आईडिया है अगर आप साथ दो….”

देवी के माथे पर थोड़ी  शिकन पड़ गई। बात जायज थी लड़की के फोटो फाटने का मतलब हर कोई गलत ही समझेगा। “

अच्छा बता तू अपना आईडिया”

रवि: मेरे पास जीजू का नंबर है:, आप उनको बोल कर दूसरी फोटो मांग लो, वह आपको मना भी नहीं करेंगे।

देवी:  और क्या कहूं उनको फोन पर कि आपकी फोटो फट गई है  या बोलूं कि मुझे अपने लिए एक अलग से फोटो चाहिए।  मालूम भी है क्या सोचेंगे वह…. । रात के 10:00 बजे हैं वैसे ही यह समय सही नहीं है बात करने का।  बड़ा आया आईडिया देने वाला। चल सो जा देखी जाएगी कल। तेरे को पीटने नहीं दूंगी तू फिक्र ना कर । कहते हुए देवी लेट गई । रवि पैर दबाते हुए बोला: दीदी प्लीज….

देवी तेरे लिए ना जाने क्या-क्या करना पड़ेगा चल लगा फोन।

रवि देवी के ऊपर कूद पड़ा ओ मेरी प्यारी दीदी।

बड़ा ही मनमोहक दृश्य था भाई बहन के प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाती है कि एक बहन अपने भाई के लिए रात को 10:00 बजे भी अपनी लाज छोड़ ऐसे लड़के से बात करने को राजी हो गई जो उसके फोन करने का गलत मतलब भी निकाल सकता है।  रवि ने फोन लगाया उधर से रंजन की मधुर आवाज आई कौन?

जीतू मैं रवि देविका भाई।  आपसे नंबर लिया था न…

“हां कहो रवि इस समय कोई खास बात है क्या?”

जिओ दीदी बात करना चाह रही थी…  कहते हुए फोन देवी की तरफ बढ़ा दिया।

देवी का मन कर रहा था कि रवि के मुंह पर जोरदार मुक्का मार कर उसके सारे दांत तोड़ डाले।  ऐसे कोई बोलता है कि दीदी बात करना चाह रही थी।

देवी ने फोन कान पर लगाकर बड़े धीमे से हेलो कहा उधर से आई मधुर ध्वनि ने देवी के रूम रूम को हिला डाला

” कहो देवी कोई खास बात”

देवी के लड़खड़ाने बोल बस इतना ही कह पाए ” हमें आप की एक और फोटो चाहिए”

” बस इतनी सी बात, कल सुबह आपके पास पहुंच जाएगी।  और बताइए”

देवी ने फोन काट दिया,  बड़ा अजीब है पूछा तक नहीं किस लिए चाहिए कल पहुंच जाएगी बस ऐसा बोल कर फोन काट दिया”

रवि:  थैंक गॉड बच गया।  मैं सुबह उठ जा कर ले आऊंगा,  खुद जाकर ले लूंगा वह भिजवाएंगे तो न जाने किसके हाथ लगे।

दोनों करवट लेकर लेट।  गए जल्दी ही रवि, मार से बचने की खुशी में गहरी नींद में चला गया।  करवट लिए देवी के कानों में अभी भी रंजन की आवाज गूंज रही है। आधी फोटो को सीने से लगा कर,  जो बात उसको अजीब लग रही थी वही गुदगुदा रही है एक बार भी नहीं पूछा कि फोटो चाहिए, कितनी सरलता,  प्रेम में डूबे शब्द थे। क्या मुझे प्रेम हो गया है?

भोर हो गई है,   सभी अपने कामों में व्यस्त हैं रवि सुबह होते ही निकल गया था।  पापा के नाश्ते की तैयारी चल रही है, देवी टिफिन तैयार कर रही है और मम्मी घर को सजाने में।

 रवि सीधा रसोई में पहुंचते हुए बोला: थैंक गॉड दीदी काम हो गया।

थैंक गॉड  मत बोलो थैंक दीदी बोल मै ना होती तो आज तेरी खैर नहीं थी।

रवि:  अच्छा दीदी रात कौन है जीजू ने काटा था यह आपने:??

देवी:  मार खानी है तो ऐसे ही बता दे। ( बेलन नदी के ऊपर उठाते हुए बोली,  रवि बच्चे हुए रसोई घर से बाहर आकर बोला) ” दीदी सच मे जीजाजी काने  हैं”

देवी बेलन लेकर दौड़ीं रवि के पीछे कभी पापा के पीछे छुप कर खुद को बचाया तो कभी मम्मी के पीछे पूरे घर में दौड़ भाग होती रही।

ऐसे ही अठखेलियों के बाद वह दिन भी आ ही गया जब देवी सजी-संवरी सहेलियों के बीच बैठी है।  शहनाइयों की आवाज परिवार जन का शोर-शराबा, चहल पहल घर के कोने-कोने में फैली है। बैंड बाजों की आवाज में सभी के  कदम पंडाल के दरवाजे की तरफ बढ़ा दिए।

सुरेंद्र ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी,  खाने पीने की कोई वस्तु ऐसी नहीं थी जो पंडाल में सजी ना हो।  सोना जेवर कपड़ा बर्तन यहां तक की शादी में गाली भी दे रहे थे।  अपनी हैसियत से कहीं अधिक खर्च कर चुके थे। परंतु कोई शिकन नहीं थी माथे पर,  खुशी से तो दिल में बेटी के दूर होने की चुभन भी थी। बारातियों का स्वागत करके बेटी के कमरे मे आए।

” एकदम राजकुमारी लग रही है”  कहते हुए दोनों हाथ फैला दिए।

देवी आगे बढ़कर पापा के सीने से लिपट गई।   

बाप और बेटी के प्रेम का बड़ा ही प्यारा दृश्य था।  प्रत्येक बात की जिंदगी में ऐसा समय आता है जब वह खुशी और दुख के  मिश्रित भाव से अपनी बेटी को विदा करता है।

” बेटी दो घर की लाज रखनी है तुझको,  ऐसा कुछ ना करना जिससे हमारी झुकी हुई गर्दन टूट जाए”

बेहद पुराने शब्द थे, किंतु प्रत्येक बाप यही शिक्षा देता है अपनी बेटी को।  सारा परिवार बाप और बेटी के प्रेम के दृश्य को भरी आंखों से खड़ा देख रहा था।

तभी एक कड़क आवाज ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया।

” यह शादी नहीं हो सकती”  सीना ताने यह कोई और नहीं रंजन के पिता थे ।   समाज में अच्छी पहुँच थी इनकी, जिधर निकल जाए मजाल है कोई सलाम नाथू के,  नाम के साथ साथ एक सामाजिक व्यक्ति भी थे। किसी को तकलीफ में देखें और उसकी तकलीफ दूर ना करें ऐसा कभी नहीं हुआ,  और आज खुद ही किसी को तकलीफ देने आ पहुंचे।

सुरेंद्र ने फिर से पगड़ी उतारते हुए कहा:  समधी जी ऐसे शब्द मुंह से क्यों निकालते हैं कोई कमी रह गई हो तो कहिए पूरी हो जाएगी।

सुरेंद्र ने कह तो दिया लेकिन देवी और देवी की मां के मन में सवाल उठ खड़ा हुआ…  अगर रुपया मांग लिया तो कहां से देंगे।

 विमल:  हम बारात वापस ले जा रहे हैं।  ऐसा नहीं कि आपकी तरफ से कोई कसर बाकी रह गई है।  मैं समझता हूं आपने अपनी हैसियत से कहीं ज्यादा खर्च कर डाला है।   बात वह नहीं कुछ और ही है।

सुरेंद्र ने पगड़ी विमल के पैरों में रख दी ” ऐसी बात ना कहिए समधी जी,   बारात लौट गई तो बच्ची की जिंदगी खराब हो जाएगी कौन करेगा इससे शादी…

विमल:  यहां उपस्थित सभी लोग जानते हैं हमने एक कौड़ी दहेज में नहीं मांगी,  बस हम अच्छा घर और अच्छी लड़की चाहते थे। अब जो यहां आकर सुनने को मिल रहा है ऐसे में हम ही क्या कोई भी इस लड़की से शादी नहीं करेगा।

सुरेंद्र:  समधी जी ऐसा क्या सुन लिया आपने?  हमारी बेटी लाखों में नहीं करोड़ों में एक है।

विमल ने पगड़ी उठाते हुए कहा:  आप बड़े ही सीधे इंसान हैं, वैसे भी सोने में लाख फोटो बनाने वाले को खोट नहीं लगता।  सुना है कॉलेज में लड़की के किसी के साथ गलत संबंध थे। ऐसी जगह हम ब्याह नहीं कर सकते जिसके सर इतनी बड़ी बदनामी हो।

सुरेंद्र:  समधी जी बहुत हुआ।  ऐसा लगता है किसी ने आपके कान भरे हैं।  सब अफवाह है और कुछ नहीं।

चारों तरफ कानाफूसी होने लगी,  विमल के शब्द किसी को भी विचलित कर सकते थे।  विमल जी माथे पर हाथ को रगड़ते हुए बोले ” अगर आपको तकलीफ ना हो तो मैं लड़की से अकेले में बात करना चाहता हूं। अगर मेरे सवालों के सही जवाब मिले तो शादी तय वरना…….”

सुरेंद्र ने दोनों हाथ जोड़ें, मुड़कर फुसफुसाते हुए देवी से बोले बेटा बारात लौट गई तो मैं जीते जी मर जाऊंगा पर झूठ मैं नहीं जानता बस अब लाज तेरे ही हाथों में है कुछ भी कर बारात वापस मत जाने दे. आवाज बुलंद करते हुए बोले ” सभी बाहर आ जाओ”

दरवाजा बंद हो गया।

” हमारी बेटी लाखों में एक है कौन नहीं जानता।  शहर में ऐसी बेटी होने की कामना हर कोई करता है, भाई साहब आपको मना कर देना था,  ऐसे कान के कच्चे लोगों के साथ नहीं बिहानी हमें लड़की” सुरेंद्र के छोटे भाई ने कहा।

रवि:  पापा दीदी को मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता और मैं दावे के साथ बोल सकता हूं यह सब झूठ है।

किसी ने कुछ कहा किसी ने दिला दी,  कोई अड़ा रहा तो कोई भिड़ने तक को तैयार हो गया।

लेकिन एक बात की मनोदशा कोई नहीं समझ सकता,  लड़की की बारात दरवाजे से लौट जाए इससे बड़ी सजा हो ही नहीं सकती।

लगभग आधे घंटे बाद दरवाजा खुला,  मूछों पर ताव देते हुए विमल जी के मुंह से शब्द निकले ”  सब अफवाह थी” हमारी बहू लाखों में एक है, चलिए पैरों की तैयारी शुरू कीजिए।

सुरेंद्र जी हाथ जोड़े भगवान का शुक्रिया कर रहे हैं।

लोगों मे  चर्चा का विषय बन गया है ”  सांच को आंच क्या” कहावत पंडाल में गूंज रही है।  दुख के काले बादल छट गए हैं खुशी की लहर चारों ओर फैली है।  विदाई में किसी की आंखों में आंसू नहीं है शायद सारे आंसू पहले ही बस चले हैं।

विवाह को 6 महीने बीत गए हैं एक ही शहर में होने के चलते देवी सुबह आती है और शाम को चली भी जाती है वर्क पहले एकदम सूना सा लगता था वह बच्चों की अठखेलियां,  देवी का सबसे रोब से बात करना ऐसी ना जाने कितनी यादें सबकी आंखों को नम कर जाती थी लेकिन समय समय सब कुछ बदल देता है अब जब 6 महीने बीत चुके हैं ऐसे में धीरे-धीरे देवी लव कम होती जा रही है ऐसा नहीं कि भूल गए हैं लेकिन समय ने डांस करा दिया है यह वही उसका घर है।

एक दिन सुबह एक लड़का देवी का खत देकर गया।

रवि ने पुकारते हुए कहा ”  पापा, दीदी का खत आया है। लिफाफे पर लिखा है।  सिर्फ पापा के लिए। “

”  देविका खत्म”  फोन कर लेती जरूर कोई शरारत की होगी।

अरे सुमन आज तारीख क्या है,  आज कुछ खास तो नहीं जो याद करा रही हो”.।

सुमन साड़ी के पल्लू से हाथ पूछते हुए आरआई नहीं!  आज तो कुछ खास नहीं, देखो तुम क्या लिखा है।

अपनी आराम कुर्सी पर लिफाफे को काटते हुए बैठ गया।

खुद को पढ़ते ही मानो पैरों तले जमीन निकल गई,  कमर कुर्सी के बैक से सट गई, हाथ हाथ से छूट गया है आंखें पानी बरसाने लगी।

 सुमन:  ऐसा क्या लिखा है सब ठीक तो है?  चुप क्यो हो कहते हुए जमीन से उठा कर पढ़ा।

” धड़ाम”  की आवाज के साथ सुरेंद्र में चेतना आई।  सुमन बेहोश हो गई थी। रवि और सुरेंद्र ने मिलकर सुमन को कमरे में ले जाकर बिस्तर पर लेटाया।

रवि ने  खत् उठाया…

मेरे प्यारे पापा

      मालूम नहीं,   मुझे यह सब लिख कर आपको भेजना चाहिए था या नहीं।  पत्र में बहुत से ऐसे शब्द लिखने को मजबूर हूँ जो एक बेटी को अपने पिता से नहीं कहना चाहिए।

लेकिन अब  नहीं सहा जाता बहुत बार चाहा आपको सब कुछ बताने का,  लेकिन कभी जुबान खुल ही नहीं आपकी संस्कारी बेटी जो हूँ।

मेरे पति रंजन से अच्छा पति कोई हो ही नहीं सकता।  मेरी हर बात को समझते हैं कितना प्रेम करते हैं मुझसे की मेरी जिंदगी से खत्म प्रेम के एहसास को उन्होंने दोबारा जीवित कर दिया।   मेरी सास जैसी सास मिलना मुश्किल है उनके लिए बस इतना ही लिख सकती हूं कि मुझे मेरी अपनी मां से भी बढ़कर प्रेम और सम्मान देती हैं।

लेकिन मेरे ससुर जी जिनको ना मैं पिता कर सकती हूं न ही ससुर ।  उस दिन जब आपने मुझे कमरे में अकेला छोड़ा उसको विस्तार से लिखने के लिए माफ करना।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह किस लड़के से मेरे संबंध होने की बात कर रहे थे जबकि मैंने कभी कॉलेज में किसी लड़के से बात तक नहीं की।  दरवाजा बंद करते ही वह जो बोले उससे मेरे होश उड़ गए जिस दिन पहली बार तुझको देखा था मेरा दिल तुझ पर आ गया था। सामाजिक बंधनों से बंधा था वरना लड़के की जगह मैं ही तुझे अपना लेता। चल वैसे ना सही ऐसे ही सही।  इसको बस खेल समझ ना वरना मेरी है ‘ना’ तेरी तो तेरे बाप की जिंदगी भी तबाह हो जाएगी। एक बार लड़की की बारात लौटी तो समाज में किसी को मुंह दिखाने तक को नहीं रह जाओगे।

पापा मेरे पास और कोई ऑप्शन था ही नहीं।  आप ही ने तो कहा था दोनों घर की लाज रखनी है बारात लौट गई तो जीते जी …. ।  मेरी खामोशी को उन्होंने मेरी स्वीकृति समझा, मेरा लहंगा उठा कर अपना गंदा खेल शुरू कर दिया।  मैं चीखना चाहती थी चिल्लाना चाहती थी… मैं शोर मचा कर सबको करना चाहती थी, जानती थी दरवाजे के पीछे मेरा सारा परिवार खड़ा है,  जो मुझे बेहद प्रेम करता है परंतु ना मैं चीख सकी ना ही पुकार सकी। आप की लाज जो रखनी थी। आपने ही तो कहा था बारात लौटी नहीं चाहिए।  पापा मैंने अपनी लाज खोकर आप की लाज रखी मैं अपनी आत्मा तक को लूटते हुए, मरते हुए खामोशी से देखती रही। सिर्फ आंसू बहाने के सिवा कुछ और न कर सकी अब बचा था तो सिर्फ मेरा शरीर।  विदाई के कुछ दिन तक सब ठीक रहा, वह दरिंदा 1 महीने तक मुझसे नजर तक नहीं मिला सका। रंजन के प्यार ने मेरे शरीर में फिर से जान डाल दी। ऐसा लगा अब सब ठीक हो गया है ससुर की गलती को माफ कर चुकी थी।

रंजन के प्यार में अपने साथ हुए अत्याचार को भुला चुकी थी,  लेकिन एक महीना पूरा होते ही वह गंदा खेल फिर शुरू हो गया मेरी सांस शाम को 6 से 7 डालने जाति और मेरी आत्मा भी शायद उन्हीं के साथ चली जाती मेरी खामोशी उस दरिंदे को ताकत दे रही थी।  मैं रंजन और आपको तब बता देना चाहती थी। बहुत बार सोचा पुलिस में कंप्लेंट कर दूं, लेकिन यह भी जानती थी इसका दोनों ही परिवारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। रंजन कभी अपने पिता को माफ नहीं करेंगे,  हो सकता है उनका कत्ल भी कर दे। मेरी सांस जो अपने पति को एक देवता की तरह होती है उसका क्या होगा सबसे बड़ा सवाल जग हंसाई होगी तो आपका क्या होगा?

अब शायद यही अनंत काल तक चलेगा ऐसा सोच कर अपने को समझा लेती। पापा कुछ दिन से तबीयत ठीक नहीं लग रही थी,  कल मैं डॉक्टर के पास गई थी। उसने मुझे खुशखबरी दी कि मैं मां बनने वाली हूं। खुशखबरी मेरी जिंदगी में तो शायद खुशखबरी जैसा शब्द किसी अभिशाप से कम नहीं है।  एक खुशखबरी मेरी शादी की भी थी, किसी ब्याहता के लिए मां बनने से बड़ी खुशी हो ही नहीं सकती। लेकिन मेरे लिए खुशखबरी किसी अभिशाप से कम नहीं।

मैंने यह बात किसी को नहीं बताई और बताती भी क्या जानती हूं यह मेरे पति का नहीं मेरे ससुर का बच्चा है क्या कहती रंजन से तुम्हारा भाई आने वाला है सास को क्या कहते तुम्हारा शौक से तुम्हारा दूसरा बच्चा होने वाला है पापा अब  मुझ में कुछ बाकी नहीं बचा है, सिर्फ यह शरीर सिर्फ एक मांस का लोथड़ा भर रह गया है।

काश आपने मुझे दबना ना सिखाया होता।  काश आपने बारात वापसी की चिंता ना की होती।  कहीं आप ने मुझे दोनों घर की लाज रखने की सीखना दी होती।  काश उस दिन मैं आपकी बात ना सुनती, और खूब चिल्लाई होती। काश आपने मेरा नाम देवी ना रखा होता,  बेबी का विकराल रुप धारण करना भी सिख लाया होता। अपने ही परिवार में मैं सुरक्षित ना रह सकी पापा काश! काश! काश!   आप तक खत पहुंचने तक मेरा शरीर अग्नि में भस्म हो सके अब इसके सिवा और कोई चारा चारा बाकी ना बचा है मेरे पास।

आप की देवी

रवि घुटने के बल गिर कर सिख रहा है दीदी दीदी

देवी चली गई।  कौन चली गई? क्या लिखा मैंने देवी चली गई!  हां यही तो लिखा और यही तो सत्य है नाम की देवी चली गई और ना जाने ऐसे कितने ही देवी जाना बाकी है।  शायद हमारे समाज की दी गई सीख ही उल्टी है लाज रखो ना जाने कितनी बेबी अपनी लाज खोकर भी अपने परिवार की लाज रखती है कितना सही कहा देवी ने देवी नाम ना रखा होता देवी का विकराल रुप धारण करना भी सीखलाया होता।

कहानी का अंत दुखद है और अधूरा की पाठकों से अनुरोध है कि आप खुद बिचारे क्या होना चाहिए था क्या उस दरिंदे को सजा मिलनी चाहिए थी?  मेरा मानना है जितना दोषी विमल था उतने ही दोषी देवी के पिता सुरेंद्र। मेरा मानना है इतना दोस्ती वह दरिंदा था उतना ही देवी। जो अपनी आवाज को दबाती रही।  न जाने कितने ही आवाज में समाज के शोर में दबकर रह जाती हैं और ऐसे दरिंदे आजाद घूमते हैं आप सभी के जवाब का इंतजार रहेगा/

 

Copyright:Vineet Sharma

डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय www.socialsandesh.in के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों .कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और social sandesh की उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं है ।

सभी चित्र गूगल से लिया गया है

Loading Facebook Comments ...

LEAVE A REPLY