Suvichar

जीवन में एक मित्र श्री कृष्ण जैसा होना ही चाहिए

जीवन में एक मित्र श्री कृष्ण जैसा होना ही चाहिए जो तुम्हारे लिए युद्ध न लड़े पर सच्चा मार्गदर्शन दिखाता रहे और एक दोस्त कर्ण जैसा भी जरूर होना चाहिए जो तुम्हारे गलत होते हुए भी तुम्हारे लिए युद्ध करे   किसी ने फूल से पूछा की जब तुम्हें तोड़ा गया तो तुम्हें दर्द नहीं हुआ " "फूल ने जवाब दीया...

Moral Thoughts part-2 ( सुविचार )

कभी कभी बुरा वक़्त आपको कुछ अच्छे लोगो से मिलवाने के लिये भी आता है।रिश्ते ऐसे बनाओ कि जिसमें शब्द कम और समझ ज्यादा हो, झगड़े कम और बातचीत ज्यादा हो, प्रमाण कम और प्रेम ज्यादा हो......!"दीपक बोलता नहीं है उसका प्रकाश परिचय देता है।  ठीक उसी प्रकार, आप अपने बारे में कुछ न...

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ?

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ? आज दरार है, कल खाई होगी फिर भरेगा कौन ? मैं चुप, तुम भी चुप इस चुप्पी को फिर तोडेगा कौन ? बात छोटी सी लगा लोगे दिल से, तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ? दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर, सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ? न मैं राजी, न तुम राजी, फिर...

क्या है “प्रेम” इसका रूप कैसा है

प्रेम...!! "प्रेम" क्या है "प्रेम" इसका रूप कैसा है कहाँ से शुरू होता है कहाँ खत्म होता है बड़ा मुश्किल है इसे परिभाषित करना और सच कहें तो बड़ा विचित्र होता है ये "प्रेम" और उसपर भी विचित्र होता है भारतीय नारी का "प्रेम" जो विदेशियों की तरह चौबीस घंटे का नहीं होता या कोई भारतीय नारी चौबीसों घंटे अपने पति को प्रेम नहीं...

Moral Thoughts ( सुविचार )

⁠⁠⁠💖🌹💖🌹💖🌹💖🌹💖 धनवान बनने के लिए एक-एक कण का संग्रह करना पडता है, औऱ गुणवान बनने के लिए एक-एक क्षण का सदुपयोग करना पडता है..! इस जीवन का पैसा अगले जन्म में काम नहीं आता मगर इस जीवन का पुण्य जन्मो जन्म तक काम आता है ¸.•""•.¸ 🌹💐🌹 ""सदा मुस्कुराते रहिये"" 🌹हँसते रहिये हंसाते रहिये🌹 शुभ प्रभातम्⁠⁠⁠🙏😊🌻 ॐ शांति🌻😊 🙏 बड़ों की शिक्षा और सलाह को कभी नज़रंदाज़ न करें...इसलिए नहीं कि...

कभी कभी लगता है, औरत होना एक सजा है.

*कोई नक्‍शा पास नहीं होता कि "सागर" कहां है* *बिना नक्‍शे के सागर तक पहुंच जाती है।* *ऐसा नहीँ है कि नदी कुछ नहीँ करती है।* *उसको "सागर" तक पहुंचने के लिए लगातार "बहना" अर्थात "कर्म" करना पड़ता है।* *इसलिए "कर्म" करते रहिये,* *नक्शा तो भगवान् पहले ही बनाकर बैठे है ।* *हमको तो सिर्फ "बहना"...

कभी कभी लगता है, औरत होना एक सजा है.

*नदी जब निकलती है,* *कोई नक्‍शा पास नहीं होता कि "सागर" कहां है* *बिना नक्‍शे के सागर तक पहुंच जाती है।* *ऐसा नहीँ है कि नदी कुछ नहीँ करती है।* *उसको "सागर" तक पहुंचने के लिए लगातार "बहना" अर्थात "कर्म" करना पड़ता है।* *इसलिए "कर्म" करते रहिये,* *नक्शा तो भगवान् पहले ही बनाकर बैठे है ।* *हमको तो सिर्फ "बहना" ही...