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सुंदर हाथ

"बहुत समय पहले की बात है कुछ महिलाएं एक नदी के तट पर बैठी थी वे सभी धनवान होने के साथ-साथ अत्यंत सुंदर भी थी वे नदी के शीतल एवं स्वच्छ जल में अपने हाथ - पैर धो रही थी तथा पानी में अपनी परछाई देख- देखकर अपने सौंदर्य पर स्वयं ही मुग्ध हो...

दर्द का रिश्ता-सुरेखा अग्रवाल

अस्पताल में ही मुलाकात हुई दोनों की। डॉक्टरी जाँच कराने आए थे दोनों। सुमि बेइंतहा चीख रही थी शायद दर्द था उसे।और अलोक कातर निग़ाहों से उस वार्ड को देख रहा था। चेहरे पर दर्द झलक रहा था उसके भी। रुई के फाहे को हाथ से दबाए सुमि बाहर निकल रही थी। अंजान थी अलोक...

कठपुतली का नाच

छत्रपुर के ठाकुर रणवीर सिंह की उदारता और न्याय से सब जनता भली भाँति परिचित थी। उन के दीवान करम चन्द का तो बस कहना ही क्या। उनकी चतुरता और ज्ञान का सब को पता था। दीवानजी छत्रपुर के सारे काम-काज को देखते थे। उनके होते हुए ठाकुर रणवीर सिंह को किसी भी तरह...

त्याग का मर्म

एक बार महर्षि नारद ज्ञान का प्रचार करते हुए किसी सघन बन में जा पहुँचे। वहाँ उन्होंने एक बहुत बड़ा घनी छाया वाला सेमर का वृक्ष देखा और उसकी छाया में विश्राम करने के लिए ठहर गये ! नारदजी को उसकी शीतल छाया में आराम करके बड़ा आनन्द हुआ, वे उसके वैभव की भूरि भूरि...

तिलांजलि-सुरेखा अग्रवाल(स्वरा)

दिन भर की व्यस्तता के बाद पल भर सुस्ताने बैठी मनु एक कप चाय लेकर बैठी थी कीअचानक door bell बजी कौन होगा यही सोचती वह अपने लम्बे बालों का जुड़ा बनाती दरवाज़ा खोलती है, अचंभित हो वह सामने ख़ड़ी निवि को देख हडबड़ा जाती है, आज इतने सालों बाद यूँही बगैर ख़बर दिए....! अरे...

खुदा अपने बन्दों के साथ हमेशा रहता हैं

एक अमीर ईन्सान था। उसने समुद्र मेँ अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई। छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्र की सेर करने निकला। आधे समुद्र तक पहुंचा ही था कि अचानक एक जोरदार तुफान आया। उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह लाईफ जैकेट की मदद से समुद्र मेँ...

मजबूरी-अशोक परुथी “मतवाला”

अस्पताल के ‘बेड नंबर’ 14 पर असहाय-सा, पीड़ा से बुरी तरह छटपटा रहा था वह! उसकी हालत बकरे के उस धड़ की तरह थी जो वार करने के पश्चात कटकर सिर से पूरी तरह अलग नहीं हुआ था। पुलिस की दो गोलियाँ उसके शरीर के दो भागों को छेद गई थीं, एक गोली उसे...

चरवाहा और हीरा

एक चरवाहे को जंगल में पड़ा एक हीरा मिल गया था। उसकी चमक से प्रभावित हो उसने उसे उठा लिया था और अपनी पगड़ी में खोंस लिया था। सूर्य की किरणों में चमकते उस बहुमूल्य हीरे को रास्ते से गुज़रते एक जौहरी ने देखा तो वह हैरान हो गया, क्योंकि इतना बड़ा हीरा तो उसने...

तिलिस्म-उपासना सियाग

सुमि अचानक हुई बारिश से घबरा कर तेज़ कदम चलने लगी।  वैसे इतनी अनायास भी नहीं थी ये बारिश। बादल तो सुबह ही से थे पर उसे नहीं मालूम था कि ऐसे ही भिगोने लग जाएगी। घर से चलते हुए माँ ने  छाता ले जाने को कहा भी था पर वो ही लापरवाही से...

नानी का घर-मंजु सिंह

गर्मी की छुट्टियां आतीं और बस हम बच्चों की नानी या दादी के घर जाने की मांग ज़ोर पड़ने लगती । माँ तो चाहती ही थीं कि कुछ दिन के लिए कहीं जाएँ तो वो भी चैन की सांस लें । अब गर्मी हो या सर्दी , बेचारी माँ को कहाँ छुट्टी मिलती थी...