Story

जड़े-उपासना सियाग

परमेश्वरी विवाह के एक दिन पहले की रात को अपने बाबा के पिछवाड़े के आँगन में लगे हरसिंगार के पेड़ के नीचे खड़ी थी।  मानो उसकी खुशबू एक साथ ही अपने अन्दर समाहित कर लेना चाहती थी। रह -रह कर मन भारी हुआ जा रहा था। बाबुल का आंगन, माँ का आंचल और सखियों...

अंतर-अशोक परुथी “मतवाला”

अनिता अपने बालों को कंघे से सँवारती हुई अपने मुख पर एक अनजानी सी उदासी लिए न जाने किस सोच में डूबी थी। अतीत की मधुर स्मृतियों के अथाह सागर में वह इतना डूबी थी कि उसे कुछ ख़बर न थी कि कंघा उसके बालों में कब रुक कर रह गया था! आज की सुबह...

शालू की बेटियाँ-मंजु सिंह

शालू अपनी बड़ी होती बेटियों की एक बात से बड़ी परेशान थी । जब भी कहीं से शादी ब्याह का निमन्त्रण आता था उसकी यह परेशानी और भी बढ़ जाती थी । निक्की और टिमसी कहीं भी जाना नहीं चाहती थीं। शालू ने कई बार पूछने की कोशिश की लेकिन उनमें से किसी ने कुछ...

भूख-अशोक परुथी “मतवाला”

रामू आज आनन्द को रेस्टोरेंट में जल्दी आया देखकर हैरान था। उसने आनन्द को सलाम किया और झट से एक पानी का जग और एक खाली गिलास लाकर ‘टेबल’ पर रख दिया। अनमने-से ढंग से आनन्द ने एक घूँट भरकर गिलास यथास्थान पटक दिया। तभी थोड़ी देर में रामू चाय का एक कप लेकर आनन्द...

“पति -सेवा हर भारतीय नारी का धर्म है”-उपासना सियाग

“पति -सेवा हर भारतीय नारी का  धर्म है और ये हमारी संस्कृति भी है पति की सेवा से, पति प्रसन्न हो कर कोई भी वरदान दे सकते हैं”…….ये पंक्तियाँ  24 साल पहले मैंने एक किताब में पढ़ी थी और अब पिछले दिनों की एक घटना ने पुष्टि भी कर दी . विवाह के बाद जब...

पदक-उपासना सियाग

विभा शाम को  अक्सर पास के पार्क चली जाया करती है .उसे छोटे बच्चों से बेहद लगाव है, सोचती है कितने प्यारे कितने मासूम, दौड़ते, भागते, मस्त हो कर दीन -दुनिया के ग़मों से बेखबर, बस चिंता है तो इस बात की सबसे पहले झूला किसको मिलेगा ,कौन दौड़ कर अपनी माँ के हाथ...

किसी को छोटा न समझे

एक शेर की गुफा थी| खूब गहरी, खूब अँधेरी| उसी में बिल बनाकर एक छोटी चुहिया भी रहती थी| शेर जो शिकार लाता, उसकी बची हड्डियों में लगा मांस चुहिया के लिये बहुत था| शेर जब जंगल में चला जाता, तब वह बिल से निकलती और हड्डियों में लगे मांस को कुतरकर पेट भर...

जैसी तुम्हारी इच्छा

मोहिनी को कौन नहीं जानता था। जैसा उसका नाम, वैसे ही उसके करम। मोहिनी अपनी बातों से सदा सबका मन मोह लेती थी। हर किसी के दुख: सुख में सब का साथ देती थी। औरों को खुश करने की खातिर वो अपने दुख: को भूल जाती थी। पार्टीयाँ करने का उसे बहुत शौक था। उसका...

शिवानी का टुनटुनवा …-उपासना सियाग

शिवानी  आज सुबह से मन ही मन बहुत खुश थी। रात को  अच्छे से नींद भी नहीं आयी फिर भी एक दम तरो-ताज़ा लग रही थी। पूजा पाठ में भी मन नहीं लग रहा था।  बार -बार ध्यान अपने कमरे में रखे हुए बॉक्स पर जा रहा था जो उसके पति ने गिफ्ट दिया...

क्या वो प्यार था-उपासना सियाग

जब तीसरी बार डोर बेल बजाने बाद भी दरवाज़ा नहीं खुला तो थोडा सा मैं चौंकी ,क्या बात हो सकती है कुहू दरवाज़ा क्यूँ नहीं खोल रही ,उसी ने तो बुलाया था फोन कर के,” आजाओ जूही आज फ्री हूँ उमंग तो बिजनस टूर पर गए है ,बातें करेंगे बहुत सारी लंच भी यही...