Spirituality

गायत्री महाशक्ति का प्रताप

गाँव से दूर एकान्त अरण्य में माँ गायत्री का प्राचीन मन्दिर था। काफी पुराना होने के कारण मन्दिर की भव्यता अब पहले जैसी न रही थी। परन्तु ग्रामीण जनों की सघन श्रद्धा इसकी दिव्यता को उत्तरोत्तर बढ़ा रही थी। गाँव वालों की आस्था थी कि माँ गायत्री अपने इस मन्दिर में एक अंश से...

जय महाकाल

शिवजी के अनन्य भक्त मृकण्ड ऋषि संतानहीन होने के कारण दुखी थे. विधाता ने उन्हें संतान योग नहीं दिया था.! मृकण्ड ने सोचा कि महादेव संसार के सारे विधान बदल सकते हैं. इसलिए क्यों न भोलेनाथ को प्रसन्नकर यह विधान बदलवाया जाये , मृकण्ड ने घोर तप किया. भोलेनाथ मृकण्ड के तप का कारण...

भक्ति मार्ग की कथा

एक बार लक्ष्मी और नारायण धरा पर घूमने आए,कुछ समय घूम कर वो विश्राम के लिए एक बगीचे में जाकर बैठ गए।नारायण आंख बंद कर लेट गए,लक्ष्मी जी बैठ नज़ारे देखने लगीं। थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा एक आदमी शराब के नशे में धुत गाना गाते जा रहा था,उस आदमी को अचानक ठोकर लगी, तो उस...

भरोसा रखो अपने इष्ट पर

गौरी रोटी बनाते बनाते *"ॐ नमः शिवाय"* का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही...। एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ मे दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर झांकी। आठ साल का...

सोच_का_अन्तर

एक बार जब भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण के पश्चात हस्तिनापुर वापस लोट रहे थे तो उन्हें रास्ते में बहुत ही दयनीय अवस्था में एक गरीब ब्राह्मण दिखाई दिया. उसने अर्जुन से भिक्षा देने को कहा, अर्जुन को उस ब्राह्मण की अवस्था पर दया आ गयी तथा उन्होंने उसे एक स्वर्ण मुद्राओ से...

लक्ष्मीजी कहाँ रहती हैं ?

एक बूढे सेठ थे । वे खानदानी रईस थे, धन-ऐश्वर्य प्रचुर मात्रा में था परंतु लक्ष्मीजी का तो है चंचल स्वभाव । आज यहाँ तो कल वहाँ!! सेठ ने एक रात को स्वप्न में देखा कि एक स्त्री उनके घर के दरवाजे से निकलकर बाहर जा रही है। उन्होंने पूछा : ‘‘हे देवी आप कौन हैं...

हारे का सहारा खाटु श्याम हमारा

बार्बरीक की पूजा खाटु श्याम जी के रूप में की जाती है। बर्बरीक महाभारत के एक महान योद्धा थे। वे घटोत्कच और अहिलावती(nagkanya mata) के पुत्र थे। बर्बरीक को उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वे इसी सिद्धांत पर लड़ते भी रहे। बर्बरीक को कुछ ऐसी...

सती अनुसुइया की कहानी :

सती अनुसूईया महर्षि अत्री की पत्नी थी। जो अपने पतिव्रता धर्म के कारण सुविख्यात थी। एक दिन देव ऋषि नारद जी बारी-बारी से विष्णुजी, शिव जी और ब्रह्मा जी की अनुपस्थिति में विष्णु लोक, शिवलोक तथा ब्रह्मलोक पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने लक्ष्मी जी, पार्वती जी और सावित्री जी के सामने अनुसुइया के पतिव्रत धर्म...

गंगा स्नान कथा

एक समय शिव जी महाराज पार्वती के साथ हरिद्वार में घूम रहे थे । पार्वती जी ने देखा कि सहस्त्रों मनुष्य गंगा में नहा-नहाकर ‘हर-हर गंगे’ कहते चले जा रहे हैं परंतु प्राय: सभी दुखी और पाप परायण हैं । तब पार्वती जी ने बड़े आश्चर्य से शिव जी से पूछा कि " हे...

रावण की थी ये 7 इच्छायें जो वो पूरी करना चाहता था लेकिन नही कर पाया |

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि पर भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। आज हम आपको वो बातें बता रहे हैं जो रावण,...