हकीकत और ख्वाब

0
180

विभा शाम को छत पर टहलने आयी तो नज़र घर के सामने वाले पार्क में बेंच पर बैठे एक जोड़े पर पड़ी।
हरकतों से अविवाहित ही लग रहे थे दोनों, हाथ थामे हुए बड़े ही प्यार से एक दूसरे की आँखों में झांक रहे थे कि अचानक किसी को पास आता देख लड़की सकपका गयी और तुरंत हाथ छुड़ा कर नज़र नीचे झुका ली।
आज भी किसी रोमांटिक जोड़े को देख कर विभा रोमांचित हो उठती है और खो जाती अपनी उन पुरानी यादों में, उन पलों में जो उसने और उसके पति ने शादी से पहले साथ गुजारे थे,कितना अंतर था आज में और उन पलों में उस वक़्त चाहे वो दोनों शारीरिक रूप से दूर रहे हों पर दिल से कितने पास थे? एक झलक देखने का बहाना ही ढूंढते रहते थे बस।और आज हर वक़्त सामने रहते हुए भी वो बात कहाँ?
रोमांटिक हिन्दी फ़िल्में देख देख कर बड़ी हुई विभा जो कि यौवन की दहलीज पर आते आते अपने सपनों का राजकुमार हूबहू वैसा ही कल्पना करने लगी थी जैसा कि हिंदी फिल्मों में होता है।
वो बर्फ के पहाड़ ,वो नदी ,वो बारिश और उस आलम में एक दूसरे के प्यार में खोए वो और उसका राजकुमार’ कुछ ऐसे ही सपने उसने खुलीेे आँखों से देख डाले थे।
और ये सब बहुत ही रोमांचित कर देता उसे, अंदर तक पुलक उठती वो ये सब कल्पना करके।
अचानक एक गाड़ी का तेज़ हॉर्न सुनकर वर्तमान में आ गयी विभा और सोचने लगी
‘बुरा हो इन फिल्म वालों का ,जो उसके जैसी हज़ारों लड़कियों को ऐसे सपने दिखाते हैं और इन कल्पनाओं को दिल में लिए जब वो लड़की ससुराल में कदम रखती हैं तो उसके दिल में ख्वाबों का वो शीशे सा नाज़ुक रोमानी कल्पनाओं का घरौंदा टूट कर चूर चूर हो जाता है।यहां सिर्फ वो काम करने की मशीन बनकर रह जाती है बस जिसे प्यार और इज़्ज़त देना मतलब उसे सर चढ़ाना होता है।
और उसके चेहरे पर कोमल भावनाओं के स्थान पर पीड़ा के भाव उभर आये।
तभी नीचे से उसके पति की आवाज़ आयी ‘विभा कहाँ मर गयी ?पेट में चूहे दौड़ रहे हैं ,आज भूखे ही मार ड़ालने का इरादा है क्या?
सुनकर वो बोली ‘बस अभी आयी जी’।
जल्दी जल्दी उसने छत पर सूखे कपडे उठाये और माथे का पसीना पल्लू से पौंछती हुई तेज़ी से रसोई की ओर बढ़ चली।

Loading...

LEAVE A REPLY