स्त्री

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मै स्त्री हूँ मै नारी हूँ
मै कली हूँ मै फुलवारी हूँ..
मै दर्शन हूँ मै दर्पण हूँ ….
मै नाद हूँ मै ही गर्जन हूँ..
मै बेटी हूँ मै माता हूँ..
मै बलिदानों की गाथा हूँ..
मै श्री मद् भगवत गीता हूँ ..
मै द्रोपदी हूँ मै सीता हूँ …
पुरूषो की इस दुनियॉ ने,
मुझे कैसी नियति दिखलाई ..
कभी जुये में हार गये,
कभी अग्नि परीक्षा दिलवाई..
कलियुग हो या सतयुग हो ,
इल्जाम मुझी पर आता है ..
क्युं घनी अँधेरी सडको पर ,
चलने से मन घबराता है ..
मैं डरती हुँ मैं मरती हुँ
जब सफर अकेले करती हुँ
डर का साम्राज्य उभरता है
जब कोई साया पीछा करता है
मेरी मुठ्ठी बंध जाती है
दिल की धडकन बड जाती है
जाने यह कैसी घबराहट है जाने यह किसका साया है जाने यह किसकी आहट है
अँधेरे में उन हाथों ने मुझको बाहों में भीच लिया एक ने मुँह पर हाथ रखा एक ने आचल खीच लिया
नारी के सम्मान को तार तार सा कर डाला मर्यादा के आँचल को फिर जार जार सा कर डाला
मारा है मुझको बालो से मुझे घसीटा है फिर बरबरता से सारी सीमाओं को तोड़ दिया
फिर अँधेरी सड़को पर मुझे खुन से तडपता छोड़ दिया
सन्नाटे में चीख रही थी खुन से लतपथ वो काया
सबने तस्बीरे खीची मगर कोई मदद को कोई आगे ना आया
कोई मदद करो कोई मदद करो चीख चीखकर यह चीख भी मुझसे रूठ गयी
जब होश में आयी इस समाज की बातें सुनकर टुट गयी
परिवार की बदनामी होगी सब यही मुझे समझाते है
यह नयी उम्र के लडके है थोड़ा तो बहक ही जाते है
तुम लडकी हो तुम भुल जाओ यह लडके तो बच ही जाएगे
दुनिया बाले तुम पर ही प्रश्न लगाएगे
क्युँ निकली अकेली रात में क्युँ कोई नहीं था साथ में क्या मेकअप था क्या गहने थे क्या छोटे कपड़े पहने थे
यह प्रश्नो की भुलभुलइया में सच्चाई कहीं खो जाती है
भुल जाओ कहने वालो क्या तुम्हें लज्जा नहीं आती है
सब भुल जाओं कहने वालो क्या शर्म तुम्हें नहीं आती है
कैसे भुलु उन रातों को उन सारी तकलीफों को मुझको छुते उन हाथो को
कैसे भुलु उन चीखों को कैसे भुलु
मेरे इस शरीर की चोटे कुछ दिन में भर जाएगी मेरे मन की पीडा ही उम्रभर साथ रह जाएगी
सब भुल जाओ सब भुल जाओ सब भुल जाओ कहने वालो याद ऱखो यह आखिरी गलती आपकी भी हो सकती है
कल सड़क पर वेसुध बहन या बैटी आपकी भी हो सकती है
और इससे बेहतर कोई दर्द नहीं हो सकता है
जो नारी का अपमान करे वो मर्द नही हो सकता
जब सजा लागु होगी मौत की उन दोषी लडको पर
जब कोई लकडी नहीं मिलेगी खुन से लतपथ सडको पर
तो आओ मेरे साथ प्रण लो अपनी मर्यादाओं का ध्यान रखो
नारी का सम्मान करो नारी का सम्मान करो!
 

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