ये सावन के झूले,हरीचूड़ियाँ,मेहन्दी,बिंदिया,काजल,लाली,झुमके और पाजेब,,ये महज एक श्रृंगार ही नही वरन तुम्हारे प्रति मेरे प्रेम का प्रतीक भी है,सावन का झूला,हा इस सावन के झूले ने मुझे पुनः स्मरण कराया कि कैसे तुम्हारे मोहपाश में बंधकर मैंने तुम्हारे बाहों के झूले में उन ख्वाबों को देखा था,,,

जो सदैव मुझे तुम्हारे प्रेम की डोर में बांधे रहे,इन हरी चूड़ियों ने मुझे स्मरण कराया कि कैसे मैं अपने प्रेमसुधा की वर्षा से तुम्हारे और मेरे बीच के इस स्नेह को सदैव हरा-भरा रखूं,,इन हाथों में मेहंदी सजाए जब मैं तुम्हारा नाम उनमें ढूंढ रही थी तो उस मेहन्दी से हमारे प्यार की महक आ रही थी,

और तुम्हारे नाम के साथ मुझे मेरा वजूद और अस्तित्व भी नजर आ रहा था,,,ये माथे की बिंदिया न जाने मुझे क्यों उस चाँद सी प्रतीत हो रही थी जिसमें मैं रोज तुम्हारा अक्स निहारा करती थी,,,और मेरा मांग टीका न जाने क्यों मेरे जुल्फों में उलझकर तुम्हारा ध्यान मेरी ओर खींच रहा था

कि तुम मेरे करीब आकर इनको सवारों,,मेरी आँखों का काजल जिसमें सिर्फ और सिर्फ तुम ही समाये हुए हो,,मुझे बार-बार ये कह रहा था,,परेशान मत हो तुम्हारे प्यार को कभी किसी की नजर नही लगेगी,,

और मेरे होंठो की लाली बस मुझे यही संकेत दे रही थी कि तुम्हारे चेहरे और इन होंठो पर मुस्कुराहट सदैव बरकरार रहेगी,,उदासी तुम्हे छू भी न सकेगी,,,

और तुम अपने पिया का स्मरण कर सदैव यूँ ही मुस्कुराती रहोगी,,मेरे कानो के झुमके मेरी जुल्फों में उलझकर बस मुझे यूँ ही सताये जा रहे हैं,, मानो कह रहे हो तुम्हारे कानो में सदैव तुम्हारे पिया की बातों का ही रस घुलता रहेगा,,,,और मेरे ये पाजेब अपनी खनक से मुझे बार -बार ये एहसास दिलाये जा रहे है कि तुम्हारा और तुम्हारे पिया का साथ जन्म-जन्मांतर यूँ ही बना रहेगा,,,दुनिया की कोई भी बला तुम्हे अलग नही कर सकेगी,,हा तो ऐसा हैं कुछ मेरा #सावन…!!

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©निशारावल, छत्तीसगढ़

 

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