पिछले दो दशकों में सीटी (कम्प्यूटेड टोमोग्राफी) स्कैन का चलन काफी तेजी से हुआ है। डॉक्टर्स किसी भी बीमारी को और अच्छे से डायग्नोज करने के लिए सीटी स्कैन कराने के लिए लिख देते हैं। सीटी स्कैन से बीमारी का और अच्छे से पता लगाया जा सकता है। लेकिन इस तकनीक से व्यक्ति में ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा बढ़ जाता है।

हाल ही में हुई एक रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई है कि सीटी स्कैन कराने से ब्रेन कैंसर होने के चांसेस बढ़ सकते हैं। हालांकि सीटी स्कैन कराने से पहले की तुलना में जांच क्षमता काफी बढ़ी है।

बच्चों पर ज्यादा असर

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक सीटी स्कैन से कई तरह की दिक्कतें होती है। विशेषतौर पर बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ता है। सीटी स्कैन से निकलने वाली किरणें बड़ों की तुलना में बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती हैं। साथ ही बीमारियां होने के चांसेस भी ज्यादा रहते हैं।

वैसे भी रेडियोएक्टिविटी के कारण कई सारी बीमारियां होती हैं। लेकिन बच्चों और युवाओं में ज्यादा फैलने वाली बीमारियों में ल्यूकेमिया और ब्रेन ट्यूमर प्रमुख हैं।

33 साल तक की गई रिसर्च

नीदरलैंड कैंसर इंस्टीट्यूट के रिसर्चर्स ने 1979 से लेकर 2012 तक सीटी स्कैन के कारण बच्चों को हुए ल्यूकेमिया और ब्रेन ट्यूमर के होने के चांसेसे के बारे में एनालिसिस की। 33 साल तक किए गए रिसर्च में नीदरलैंड के 1,68,394 बच्चों को शामिल किया गया जिसमें ज्यादातर मामले कैंसर के थे।

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