मोनिका और राज की शादी के अभी कुछ ही दिन हुए थे शादी बहुत ही धूमधाम से किसी बड़े मैरिज हॉल में हुआ था मोनिका के पापा ने मोनिका की शादी पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च किया था।  दहेज में ऐसा कोई चीज नहीं था जो दहेज में मोनिका के पापा ने ना दिया हो और वो भी सारी चीजें ब्रांडेड, ताकि उनकी बेटी ससुराल में रानी बन कर रहे।

शादी के कुछ दिनों मोनिका को लेकर राज बंगलुरु आ गया था।  राज एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर था।

 बेंगलुरु पहुंचने के अगले दिन ही राज  को सुबह ऑफिस भी जाना था लेकिन मोनिका अभी भी बिस्तर से नहीं सो कर उठी  थी राज ने भी जगाना मुनासिब नहीं समझा। उसने सोचा चलो अभी नई नई आई है कुछ दिनों के बाद अपने आप ही सब कुछ सीख जाएगी।  राज ने अपना नाश्ता बनाया जैसे पहले बनाया करता था और दरवाजा बंद करके चाबी नीचे से अंदर को सरका कर चला गया और मोनिका को मैसेज कर दिया कि मैं ऑफिस के लिए निकल रहा हूं, नाश्ता तैयार है नाश्ता कर लेना शाम को जब मैं ऑफिस से आऊंगा तो डिनर पर चलेंगे।

मोनिका सो कर उठी और नाश्ता तो ऑलरेडी बना ही हुआ था तो उसने वह खा लिया नाश्ता अच्छा बना था क्योंकि राज खाना अच्छा बना लेता था दोपहर में लंच के टाइम हुआ मोनिका को जोरों से भूख लगी लेकिन उसे तो खाना बनाना ही नहीं आता था।  अपने मायके में उसने कभी गलती से भी किचन की दरवाजा नहीं खटखटाया था कहने का मतलब यह है कि वह आज तक एक चाय भी नहीं बनाई थी और अचानक से उसे खाना कैसे बनाने आ जाए तुरंत राज को फोन लगाया कि राज कुछ खाने को मंगवा दो राज भी उसे एक फूड डेलेवेरी ऐप्प्स से खाने का ऑर्डर कर दिया। घंटे भर मे खाना  आ गया मोनिका खाना खाकर TV देखने लगी।

शाम होते ही राज का फोन आया कि मोनिका जल्दी से तैयार हो जाओ हम शाम को डिनर के लिए चलेंगे।  8 बजते ही राज घर पर आया पर पर यह क्या मोनिका तो नॉर्मल ड्रेस में ही थी राज को लगा था कि मोनिका अच्छी साड़ी पहनकर सजी-सँवरी होगी और वह दोनों एक नए शादीशुदा जोड़े की तरह रेस्टोरेंट में जाएंगे लेकिन यहां तो सब कुछ उल्टा था।  राज ने बोला मोनिका मैंने बोला था तुम को तैयार होने को तैयार क्यों नहीं हुई। मोनिका बोली तो कैसे तैयार होया जाता है मुझे ऐसे ही ड्रेस पहनना पसंद है।

अगर तुम चाहते हो कि मैं वह बोरिंग साड़ी पहनो तो ना बाबा ना मेरे बस की नहीं है तुम्हें मुझे डिनर पर ले चलना है ले चलो वरना मैं उसे नहीं पहन सकती।

शादी में तो मैं कैसे भी जबरदस्ती करके पहनी थी उसी दिन मैंने कान पकड़ा अब मैं कभी जीवन में साड़ी नहीं पहनूंगी।  राज को उस दिन लगा उसने शायद लड़की पसंद करने में कोई गलती कर दी पर उसने सोचा चलो कोई न समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।

धीरे धीरे समय बीतता गया लेकिन मोनिका के व्यवहार में बदलाव नहीं आया ऐसे ही वह रोजाना ही देर से सोकर उठती थी।

सुबह रोजाना राज उसके लिए नाश्ता बना कर चला जाता था वह ऐसा जानबूझकर भी करती थी क्योंकि उसे पता था कि वह अगर पहले सो कर उठेगी तो उसे ही कीचन में जाना पड़ेगा।

इसलिए वह सो कर ही नहीं उठती  थी। लेकिन यह आखिर कब तक चलता धीरे-धीरे आपस में कहासुनी होना शुरू हो गया।  राज ने एक दिन बोला मोनिका आखिर कब तक चलेगा घर को संभालना पड़ेगा आखिर मैं कैसे कर पाऊंगा और। तुमसे शादी करने का फायदा क्या है इतना बोलते ही मोनिका को आग लग गई तो तुम्हें क्या लगता है तुम मुझसे शादी कर के  इस लिए लाए हो कि मै तुम्हारे कपड़े धो दूंगी मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली हूँ। राज ने प्यार से समझाया मोनिका मैंने तुम्हें घर के काम करने के लिए नहीं कहा मैंने नहीं कह रहा हूं कि घर में तुम्हारी पोछा बर्तन  करो। लेकिन कम से कम हम दोनों के लिए प्यार से खाना तो बना ही सकती हो मोनिका ने साफ मना कर दी देखो भाई यह सब मेरे बस की नहीं है तुम्हें अगर खाना खाने का इतना ही शौक है तो कुक रख लो मैं नहीं कर सकती।

और सुनो मैं भी कल से जाऊंगी इंटरव्यू देने और मुझे भी जॉब करने जाना है मैंने अपनी पढ़ाई इसलिए नहीं करी थी कि मैं घर में बैठकर और अपने सारे सपने का गला घोट दूँगी। राज बोला मोनिका जॉब करने की जरूरत ही क्या है तुम्हें जितने भी पैसे चाहिए खर्चे के मेरे से ले लो मेरा एटीएम अपने पास रख लो।

मोनिका बोली तो तुम क्या चाहते हो कि मैं अपने कुछ भी खरीदने के लिए तुमसे पैसे मांगु।  मेरे बस की नहीं है यह सच है कि तुम मेरे पति हो तुम्हारा फर्ज है मेरे सारे खर्चे उठाना लेकिन मैं अपने सेट होना चाहती हूं मैं खर्चे के लिए किसी के आगे हाथ फैलाना नहीं चाहती हूं।

धीरे-धीरे समय बीतता गया राज के दोस्तों ने एक दिन ऑफिस में कहा कि राज इस संडे हम तुम्हारे घर पर डिनर करने आएंगे भाभी को बोल देना अपने मनपसंद डिश बना कर रखेंगे।  राज भी मन ही मन मुस्कुराया आ जाओ बच्चों जो खाना तुम्हें खाने को मिल जाएगा वह तो भगवान ही जानता है।

लेकिन राज क्या करता बोला ठीक है अगले संडे आते ही राज के दोस्त घर पर आ गए राज ने मोनिका को बोला था कि मैं खाना बाहर से आर्डर कर देता हूं पर तुम उन्हें परोस देना और कह देना मैंने इसे बनाया है।

खाना खाते ही सारे दोस्तों को पता चल गया यह खाना घर का नहीं है बल्कि बाहर से खरीदा गया है किसी ने कुछ भी नहीं बोला सब झूठी तारीफ करके चले गए क्या अच्छा खाना बनाती है।  ऐसा लग रहा है कि अपनी अंगुली ही छत जाएँ। राज के दोस्तों के जाने के बाद मोनिका और राज में खूब लड़ाई हुई दोनों में ऐसा लग रहा था एक दूसरे को मार ही डालेंगे।

राज बोला तुम्हारी हरकतों से मैं अब बिल्कुल ही तंग हो चुका हूं पूरे दिन करती क्या हो खाना भी नहीं बना सकती हो और तो और मैं कहता नहीं हूं लेकिन ना तुम कभी मेरे मां-बाप को फोन करती हो कभी उनका हाल चाल पूछने के बारे में सोचती हो एक बार भी फोन कर दे। क्या तुम मेरे नमा बाप के पास करते हो  जो मै करूँ। जब तुम नहीं कर सकते तो मैं भी नहीं कर सकती हिसाब बराबर।

 ऐसा करते करते आपस में रोजाना अब लड़ाई होने लगी।  तभी एक दिन अचानक राज की मां ने फोन किया कि बेटा हम लोग तुम्हारे पास आ रहे हैं रहने के लिए।  शादी में तो समय ही नहीं मिला रहने के लिए अब अपने बहू के हाथों के खाना खाएंगे और बहु से बहुत ही सेवा करवाएंगे।

राज कुछ भी नहीं बोल सका और ना ही इनकार कर सका।

अगले 2 तारीख को राज के मां-बाप बेंगलुरु आ चुके थेसी जैसे ही स्टेशन से  घर पर पहुंचे उनके बेटे और बहू में आपस में लड़ाई हो रही है उनकी बहू राज को कह रही है कि तुमने अपने मां को बुलाया है खाना बनाना और खिलाना मैं तो कुछ भी नहीं करने वाली। इतना सुनते ही राज के पिता जी ने उसी समय मन बना लिया अब यहां नहीं रहेंगे और उसी टाइम उसी रिक्से से वापस स्टेशन चले गए।

तब तक कुछ देर बाद ही राज का फोन आया पापा अभी तक आप लोग आए नहीं ट्रेन तो कब का आ चुकी है राज के पापा ने झूठ बोल दिया हम तो आए ही नहीं टिकट कैंसिल करा दिया।  अचानक तुम्हारी मां की तबीयत खराब हो गई इस वजह से हम आ ही नहीं पाए और वह वापस ट्रेन से उसी दिन वापस चले गए। यह खबर सुनकर मोनिका राहत की सांस ली अच्छा हुआ नहीं आए । लेकिन उस दिन तो हद हो गया राज ने मोनिका को एक तमाचा ज़ोर से लगाया और बोला निकल जाओ यहां से।

इतना सुनते ही मोनिका अपने मायके चली गई मायका पहुंचते ही अपनी मां को सारी बातें बताई उसकी मां ने समझाया बेटी शादी के बाद ससुराल ही घर  होता है तुम यहां आ तो गई हो यहां कब तक आखिर रहोगी।

मोनिका ने बोला शादी से पहले तो तुम कहती थी कि मेरी बेटी राज दुलारी है अब क्या हो गया।   मोनिका कि माँ ने समझाया सही मायने में बेटी राजदुलारी वही लड़की होती है जो अपने साथ-साथ अपने मायके और ससुराल दोनों की इज्जत को बनाकर रखें।  

जितना  मान वह अपने मां बाप का दे उतनी ही मान अपने सास-ससुर का भी दें जितने ख्याल हो अपने भाई-बहनों का रखें उतना ही ख्याल अपने पति और अपने ननद और देवर का भी रखें।  वही लड़की राजदुलारी कहलाती है।

न कि तुम्हारी जैसा यह बात मोनिका को समझ आ गई थी और बिना देर किए ही वापस अपने ससुराल लौट गई उसके बाद मोनिका ने अपने प्यार से सबका दिल जीत लिया था और सही मायने में सब की राजदुलारी बन गई थी

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