शुरुआत_सोच_बदलने_की

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#जरूर_पढ़ें
आज पैडमैन फिल्म देखी .. इस फिल्म का इंतज़ार तो बेसब्री से था लेकिन मेरी छोटी बहन के पास अभी समय नही था। 3-4 लगातार आग्रह करने के बाद उसने शर्म को त्यागकर मेरे साथ ऐसी फिल्म देखने पर हामी भर ही दी। एक दो सहेलियों से भी पूछा था ताकि PVR में उसे असहजता महसूस ना हो लेकिन सहेलियों ने शर्म की चुनरी ओढ़ने को ही महत्त्व दिया या घरवालों ने नही जाने दिया होगा। खैर !
जहाँ तक मुझे मालूम है सभी लोग इस मूवी के बारे में जानते होंगे कि ये फिल्म किस समाजिक मुद्दे पर बनी है #माहवारी #Periods । एक खून से लथपथ असहनीय स्थिति जिससे महिलाओं को हर महीने गुजरना ही होता है।
अगर हम लोग इंसान हैं तो अपनी इंसानियत को दिखाये और ऐसा महौल बनाये अपने घर में , दफ्तर में, समाज में , स्कूल में , देश में कि कोई भी इसे मजाक की नज़र से ना देखे या फिर इसे हल्के में न ले। ऐसा माहौल बनाये कि आपकी बहन, आपकी मित्र, आपकी सह पाठिका, आपकी टीचर या किसी भी महिला को आपकी नज़रों या चेहरे के भाव से असहजता महसूस ना हो। बल्कि बैग में पैड ना होने पर असहनीय दर्द की स्थिति में वो आपको ही बोल दे कि मेडिकल से पैड ला दो। और आपके लिए भी ये अचंभित करने वाली बात ना हो। ऐसे माहौल की आज के समाज में सख्त जरूरत है।
ज़िससे माँ या बहन या आपकी दोस्त शर्माये या डरे नहीं बल्कि अगर उनको आधी रात में अचानक उस खून से सनी असहनीय दर्द का सामना करना पड़े तो वो बेझिझक आपको आवाज दे जैसे वो हर मुश्किल घड़ी में देती है। आपसे उसके बारे में खुल कर बाते करें बिना किसी शर्म के। माहौल ऐसा बनाओ ज़िससे वो इसे समस्या नहीं बल्कि इसे कुदरत की दें समझकर खुद को और अधिक मजबूत बनाये।
याद रखिए ये कोई अश्लीलता या कोई अपराध नहीं है। ये एक समस्या है जिसे खत्म करना किसी के भी वश में नहीं क्योकि ये ज़रूरी है। लेकिन इसकी चिंता केवल स्त्री वर्ग को ही नहीं पुरूष वर्ग को भी करनी चाहिए। तभी जा कर इसका सही समाधान होगा। हमारा कुछ मिनट भी सिर्फ पेट दर्द होने पर हम पेट पकड़कर लेट जाते हैं तो आप उस 5 दिन की असहनीय पीड़ा को कभी महसूस कीजिये जो आपकी बहन सहन करते हुए भी आपको पता तक नही चलने देती। यही से हमें यह भी पता चलता है कि महिलाओं की सहन शक्ति के आगे पुरुष कहीं भी नहीं ठहरते।
वैसे तो मैंने अपने घर में इस असहजता वाले माहौल को कम करने की शुरुआत कुछ समय पहले ही कर दी थी जब मैंने मेरी बहन की लव स्टोरी को माँ पापा से मंजूरी दिलवा दी थी। लेकिन इस फिल्म के साथ देखने के बाद शायद वो मुझसे अपनी हर समस्या भी शेयर कर सके।
आप भी आज ही शुरुआत कीजिये ऐसे माहौल को बनाने की। मैंने तो कर दी है। ये फिल्म आपके लिए एक अच्छा अवसर है कि आप अपनी बहन, मित्र, सहकर्मी को ये महसूस करवा पायें कि वो #पीरियड्स जैसी परिस्थिति में भी खुद को आपके साथ सहज ही महसूस करे। फिल्म जरूर देखिये लेकिन अपनी बहन, महिला मित्र, अपनी क्लासमेट, ग्रुप, या फिर अपनी गरलसखी के साथ ही। मौका है गवाइयेगा मत।
पोस्ट अच्छी लगे तो Appreciation देकर शेयर जरूर कीजियेगा। खासकर लड़के और पुरुष। इस पोस्ट के जरिये मेरे साथ ऐसा प्यार भरा माहौल बनाने की मुहिम में अपना योगदान अवश्य दें। धन्यवाद।
 

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