शालू अपनी बड़ी होती बेटियों की एक बात से बड़ी परेशान थी । जब भी कहीं से शादी ब्याह का निमन्त्रण आता था उसकी यह परेशानी और भी बढ़ जाती थी । निक्की और टिमसी कहीं भी जाना नहीं चाहती थीं।

शालू ने कई बार पूछने की कोशिश की लेकिन उनमें से किसी ने कुछ नहीं बताया । वे दोनों लगभग एक ही उम्र की थीं पौने दो साल का ही अन्तर था दोनों के बीच।

आज जब शालू को अपने मामा की बेटी की शादी का कार्ड मिला तो उसकी सोच चिन्ता में बदल गयी। उसने सोचा कि दूर की शादी है।शहर से बाहर जाने और लौटने में चार दिन तो लगेंगे ही अब इन दोनों को घर पर अकेले भी नहीं छोड़ सकती।उसने सोचा आज बात कर के ही रहेगी ।

निक्की कॉलेज से आयी तो उसने टेबल पर कार्ड रखा देखा ।” लो फिर शादी आ गई इनके मायके में ! “

“हाँ बेटा! और मैं तुम्हारी एक नहीं सुनूँगी। जयपुर जाना है ।एक दिन की बात तो है नहीं कि तुम्हें घर पर छोड जाऊं। “

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“हम अब छोटे थोडी ना हैं मम्मा ” बातें सुनकर टिमसी भी आ गयी और बोली

“आप आराम से जाओ हमारी फिक्र मत करो हम दोनों यहाँ आराम से रहेंगे।”

दोनों ने एक दूसरे की तरफ भेद भरी नजरों से देखा।

शालू को खटका सा हुआ कि कोई तो बात है।

“हे भगवान ! क्या करूं इन लडकियों का ! वहाँ सब पूछेगे तो क्या कहूँगी ? क्यों इतने नखरे हैं तुम्हारे यह तो बता दो ?”

“बस हमारा अपने घर में ही मन लगता है , हमें शादियों मे जाना पसन्द नहीं है ।

“आस – पड़ोस की और जान पहचान की शादी में तो बड़ी खुशी से जाती हो दोनों । किसी रिश्तेदार के यहां शादी हो तो इनके बहाने शुरु हो जाते हैं । “

गुस्से में शालू दूसरे कमरे में चली गई। उसने सोच लिया कि वह इन दोनों से बात ही नहीं करेगी। रात तक शालू नाराज रही।

रात को जब वह पानी लेने किचन में जा रही थी तो उसने सुना निक्की टिमसी से कह रही थी “चलते हैं इस बार , मोम्सी ज़्यादा ही नाराज हैं । “

“हां मज़ा आयेगा “

शालू हैरान हो गई। साथ ही खुश भी। अगले दिन निक्की ने आकर गले में बाहें डालते हुए शालू से कहा ” मोम्मी darling अब गुस्सा थूक दो। आप जीत गयीं । “

शालू की हंसी छुट गई। उसने निक्की को चूम लिया ।

शादी में जाने की तैयारियां शुरु हो गईं। शॉपिंग भी खूब हुई ।

 

शादी के दिन निक्की ने साड़ी पहनी। आज वह इतनी सुन्दर लग रही थी कि शालू देखती ही रह गई। साड़ी पहली बार पहनी थी उसने ।

शादी बेन्क्वेट में थी।घर से बेन्क्वेट पहुंच गये । शादी की रस्में अभी शुरु नहीं हुई थीं । लोग आ रहे थे । शालू के ताउजी

भी सपरिवार आये। सब आपस में मिल मिला रहे थे । शालू भी रिश्तेदारों के बीच हँस बोल रही थी । तभी देखा ताउजी एक कुरसी पर गिर पड़े और कुरसी समेत ज़मीन पर । निक्की और टिमसी वहाँ से हंसते हुए निकल रही थीं। सब उन्हें उठाने लगे तो वे खुद ही उठ गये और कपड़े झाड़ कर खडे हो गये । आस- पास के लोग भी कुछ खुसर पुसर कर रहे थे । ताऊ जी खिसियाये से एक कोने में बैठे थे। और लोगों से कह रहे थे ” अरे कुछ नहीं बस ज़रा सा बैलेंस बिगड़ गया था । “

शालू कुछ समझ पाती तभी निक्की और टिमसी हंसते हुए आईं और शालू को कोने में ले गईं।

” मम्मा , आज के बाद आपको कभी परेशान नहीं करेंगे और हर बार हर शादी में ज़रूर जायेंगे ।”

दोनों ने एक दूसरे को देखा ।खिलखिला कर हँसीं और एक दूसरे को हाई फाईव दी ।

“आज आपके बूढ़े ताऊ  को मज़ा चखा दिया।” दोनों पेट पकड़ कर हंस रही थीं।

“बड़ा मज़ा आया दीदी आज तो। अक्ल ठिकाने आ गयी होगी खूसट की । हम जो सोच कर आये थे शादी में वो कर ही दिया आपने ।” टिमसी बोली ।

शालू परेशान सी देख रही थी क्योंकि ताऊ जी को गिरते देखा था उसने।

“क्या हुआ ? कुछ बताओगी !! “

” आप हमेशा पूछती थीं न कि हम क्यों नहीं जाना चाहते शादियों में। उसका कारण आपके ये चिपकू ताउजी थे । पकड़ कर छोड़ने का नाम नहीं लेते। कभी गाल सहलाते हैं कभी गले लगाते हैं।आज कर दिया उनका इलाज मैने ।”

“आज धक्का दे दिया मैने उन्हें और कह भी दिया कि आपकी उम्र का लिहाज़ कर लिया , वरना—-।”

शालू को समझ नहीं आया कि क्या कहे क्या नहीं । थोडी देर चुप रही। फिर ज़ोर से हँस कर उन दोनों को हाई फाईव दी। दोनों बेटियां हैरान।

जो कभी मैं और तुम्हारी मौसी न कर सके वो तुमने कर दिखाया । शाबाश !

“तो आपको भी—– हहहहा।”

तीनों माँ बेटी खिलखिला कर हँस पड़ीं।

( मंजु सिंह )

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