शादी सिर्फ लड़की की होती है

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रश्मि आज बहुत खुश थी आखिर हो  भी क्यों ना आज उसकी जो शादी होने वाली थी
घर के सारे लोग उसकी नजर उतार रहे थे रश्मि अपने आपको आईने में देख यह सोच रही थी कि कितना अलग होता है यह सब एक जगह अपने जीवन के 20-20 साल  गुजारना और फिर वहां से हमेशा के लिए चला जाना नया माहौल नई पहचान सब कुछ बिल्कुल नया नया सा यहां तक कि खुद की पहचान भी बदल जाती है।
अब उसके बाद हमारा सर नेम ही बदल जाता है।
सोचते सोचते  बारात आ गई थी सखियों ने आकर रश्मि को यह बताया कि रश्मि तुम्हारी बारात आ गई है।
दरवाजे पर बारात आई रश्मि ने भी अपनी बालकनी से देख ही लिया था बारात को
और बिल्कुल ही एक अलग ख्यालों में चली गई थी सब कितने खुश थे लेकिन रश्मि के मन में एक अलग ही भूचाल आया पड़ा था जिसका एहसास  किसी को नहीं था सब अपने में बहुत खुश थे आखिर हो भी क्यों ना इतनी मेहनत से रश्मि की शादी हो रही थी
उसके पिताजी ना जाने कितने लड़कों को देखा दहेज के कारण कितने लड़कों ने छोड़ा कभी इनके पिता जी ने छोड़ा ऐसे कर के आखिर शादी तो हो ही रही थी
खैर छोड़िए रात बिता रश्मि की शादी हो गई अब विदाई का टाइम आ गया था तब रश्मि को आकर सुबह-सुबह एक से एक नसीहत घरवाले  दे रहे हैं अपने ससुराल में तुम ऐसा करना वैसा करना सुबह जल्दी उठना सब को पैर छूना किसी से लड़ाई झगड़ा मत करना अपनी ननद को बहन समझना अपनी सास को माँ समझना ऐसा लग रहा था कि मैं कोई गुड़िया हूँ कि मुझे क्या करना है नहीं करना है मुझे कुछ पता ही नहीं है
सब अपने आप को इतना काबिल समझ रहे थे कि मुझे हंसी भी आ रही है लेकिन मैं भी क्या करती मेरी तो हंसी भी नहीं निकल रही थी और ना मुझे रुलाई आ  रही थी आखिर मैं करती तो क्या करती मेरा मन एक तरह से बिल्कुल ही मुरझाए जा रहा था करते-करते मैं भी दूल्हे के साथ उसकी गाड़ी में बैठ गई।
सब मुझे एक जिम्मेदार बहू बनने की सलाह देकर चले ।
इन सबके बीच एक चुलबुली सी रश्मि कहीं खो सी गई थी थोड़े टाइम बाद अपने ससुराल पहुंच गई क्योंकि उसकी शादी कानपुर में ही हुई थी लड़के वाले भी कानपुर में ही रहते थे।
धीरे-धीरे उसके शादी का समय बीतता गया आज लगभग 10 साल बाद उसके दो बच्चे भी हो चुके थे और एक जिम्मेदार बहू के साथ साथ एक जिम्मेदार माँ भी बन चुकी थी लेकिन उसे हर बार यही याद आता था इन सबके बीच में  रश्मि कहीं खो गई है।
आज अचानक से रश्मि को अपने मायके जाने की याद आई अपने पति रमेश से अचानक से बोली कि मुझे अपने मायके जाना है रमेश भी बोला क्या हो गया रश्मि तुम्हें अचानक से तुम मायके क्यों जाओगी तो रश्मि ने बोला नहीं मुझे जाना है मुझे किसी हाल में आज मएके  जाना है मैं जा कर देखना चाहती हूं कि क्या मेरे अभी गुडे गुड़िया वैसे ही हैं जैसा मैं छोड़ कर आई थी मैं एक बार फिर से उड़ना चाहती हूं मैं एक बार फिर से वह सारी चीजें करना चाहती हूं जो आज के 10 साल पहले छोड़ कर आई थी
तभी उसका पति रमेश बोला रश्मि इस बार अभी  मायके तुम नहीं जा सकती हो बाद में कभी चले जाना कल ही मम्मी पापा का फोन आया था
उन्होंने टिकट भी करा लिया है वह इस गर्मी की छुट्टी में अपने साथ बिताने को बोल रहे हैं रश्मि का मन उदास हो गया
और वह अपने पति रमेश से बोली रमेश तुम्हें पता है ना मायके जाना मेरे लिए कोई सपने  से कम नहीं होता है तुम्हें तो पता ही है साल में एक बार ही तो जाती हूं मैं बोलते बोलते रश्मि बिखर गई और रमेश से बोली क्या शादी सिर्फ मेरी हुई है क्या
तुम्हारी कोई जिम्मेदारी नहीं होती है क्या अपने ससुराल के लिए
क्या तुम्हारा कोई फर्ज नहीं बनता है अपने ससुराल के लिए तुमने कभी मेरे मम्मी पापा के बारे में सोचा कभी तुम पूछते हो कि तुम्हारे मम्मी पापा कैसे हैं और तुम कहते हो कि मैं तुम्हारी मम्मी पापा को दिन में तीन बार फोन करके पूछो उन्होंने नाश्ता किया कि नहीं उन्होंने खाना खाया कि नहीं है जहां पर सारी जिम्मेदारियां लड़की को मिल जाती है क्या  लड़का होने से तुम्हारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है बोलो रमेश बोलते क्यों नहीं अगर त्योहारों की बात छोड़ दी जाए तो क्या कभी तुमने मेरे मम्मी पापा को फोन करके पूछा है कि वह कैसे हैं सिर्फ त्यौहारों के लिए फॉर्मेलिटी निभा देते हो हैप्पी होली मम्मी पापा हैप्पी दिवाली पापा
क्या यही तुम्हारी रिस्पॉन्सिबिलिटी है रमेश शादी सिर्फ अकेले की मेरी नहीं हुई है तुम्हारी भी हुई है और यह जिम्मेदारी मेरी अकेले की नहीं है तुम्हारी भी है तुम्हें अगर अपने मम्मी पापा के घर जाना हो तो पहले से ही तुम टिकट कटा लेते हो तुम्हारे लिए  तुम्हें ऑफिस से छुट्टियां भी मिल जाती है
लेकिन मैं एक बार कहती हूं कि मायके जाना है तो तुम बहाने बना देते हो यार कहां टाइम है ऑफिस में देखती हो आजकल कितना वर्क लोड बढ़ चुका है तुम चली जाओ ना मैं तुम्हें लेने आ जाऊंगा
बस ऐसे ही कह कर टाल देते हो आजकल तो शादी हुई नहीं कि लोग सोचते हैं कि लड़की का नया पुनर्जन्म हो गया वह लड़की हर चीज में एक्सपर्ट हो तुम्हारे कपड़े भी प्रेस करके रखे, खाना भी टाइम पर मिल जाए बच्चों को भी संभाल ले सास-ससुर को भी संभाले
जैसे शादी कर के  तुम कोई रोबोट खरीद के लाए हो सच में मैं 10 सालों में अपनी ज़िंदगी जीना भूल  गई हूं इससे अच्छा तो मैं शादी नहीं करती क्या मेरी कोई सपने नहीं है
मेरी कोई उम्मीद नहीं है तुमने कभी पूछा कि तुम्हें क्या पसंद है  तुम पहले क्या बनना चाहती थी बस तुम्हें अपने काम से काम मतलब है
बस तुम्हें तुम्हारे लिए तुम्हारे मम्मी पापा तुम्हारे जॉब और मैं इन सबके बीच में कहां हूं कभी सोचा है तुमने
क्या दो वक्त का  खाना मिलना इसी को शादी कहते हैं क्या
बोलते बोलते थक गई थी लेकिन इन सबसे रमेश को कोई प्रभाव नहीं पड़ा था कुछ देर बाद अचानक से बोला जैसे कोई बात सुना ही ना हो।
अपने सामान पैकिंग कर लो हमें घर जाना है और हाँ माएके अगले साल चली जाना या दशहरे में जब बच्चों की दो-तीन दिन की छुट्टियां पड़ेगी तब चले जाना
रस्मी मन मसोसकर रह गई बच्चों को यह बात पता चला की छुट्टियों में दादा दादी के घर जाना है उनके लिए तो कोई फर्क नहीं पड़ता वह दादा दादी ,नानीकनही जाए उनको तब बस घूमने का बहाना हो जाता है
और मन ही मन सोचने लगी कि मैं लड़की हूं तो क्या मम्मी पापा के बिना आदत हो गई है रहने की मन मसोसकर रह गई और यही सोच कर कि चलो कोई बात नहीं मम्मी पापा से वीडियो कॉलिंग कर लूंगी अब देखती हूं कब जा पाती हूं अपने मायके।
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