वचन प्यार का-Ambika Kumar Sharma

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“पता है रागनी, मुझे मेरे सपनों का राजकुमार मिल गया” शुभि ने चहकते हुये रागनी को बताया।
“अरे वाह, कौन है वो?” रागनी ने खुश हो कर पूछा।
“रजत” शुभि खुशी से चहक रही थी।
“रजत???” नाम सुनते ही रागनी के पैरों तले जमीन सरक गई।
“क्या रजत भी तुम्हे प्यार करता है?” रागनी ने डरते डरते पूँछा।
“नही रे, प्यार तो मैं करती हूँ रजत से, रजत का मुझे नही पता, वो तो मेरे पापा रजत के यहाँ हमारी शादी की बात करने जा रहे है तो मेरी माँ ने मुझसे पूँछा था कि रजत मुझे पसंद है या नही, मैंने तो साफ साफ कह दिया मुझे रजत बहुत पसंद है अगर शादी करुँगी तो रजत से ही नही तो कुँवारी ही ठीक हूँ” शुभि ने बताया।
“तो रजत मान गये?” रागनी ने फिर घबड़ाते हुये पूँछा।
“मान तो जायेगे ही मेरे पापा मेरी खुशी के लिये चाहे जितना पैसा खर्च कर सकते है रजत के पापा ने सोंचा भी न होगा इतना देंगे, तब तो सब मानेंगे” शुभि बहुत खुश थी।
रागनी सोचने लगी शुभि हमेशा उससे पढ़ाई में आगे रही, हमेशा महंगे महंगे कपड़े पहन कर स्कूल आती रही, आज शादी की बात चली तो शुभि अब उसका ही प्यार छीनने पर तुली है।रागनी के मन मे चलचित्र से दृश्य उभरने लगे।
बचपन से ही शुभि और रागनी साथ पढ़े, शुभि अमीर घर की सामान्य नैन नक्श बाली परंतु पढने लिखने में बहुत तेज लड़की थी। रागनी घर से सामान्य परिवार की थी और पढ़ाई में भी सामान्य बुद्धि की परंतु सुंदरता में भगवान ने उसे बिलकुल फुरसत में ही गढ़ा था गोरा गुलाबी रंग, गोल चेहरा, जब हँसती उसके मोतियों से दाँत चमक उठते बचपन से ही वो बहुत सुंदर लगती थी।
शुभि हमेशा रागनी की मदद करती अपनी नकल करवा कर उसे पास करवाती क्यो की रागनी का मन पढ़ाई में कम अपने श्रृंगार में ज्यादा लगता था, शुभि, रागनी पर पैसे भी बहुत खर्च करती उसके लिये श्रृंगार का सामान आदि ला कर देती।
समय बीतता गया रागनी और शुभि दोनों यौवन की दहलीज पर आ गई।अब रागनी और भी ज्यादा सुंदर लगने लगी।
रजत एक बहुत बड़े ब्यबसाई का इकलौता लड़का था देखने मे बहुत सुंदर गोरे रंग का लगभग छः फुट का नौजवान था वो अपने ब्यवसाय के लिये अक्सर शुभि और रागनी के कस्बे में आता उसके पिता, शुभि के पिता और रागनी के पिता से परिचित थे इसलिये रजत कभी शुभि के घर तो कभी रागनी के घर ही रुकता था।
रागनी को रजत का घर आना बहुत अच्छा लगता था, धीरे धीरे कब रजत और रागनी के बीच प्रेम के अंकुर फूट गये पता ही नही चला।
लेकिन आज शुभि की बातों ने रागनी को चिंतित कर दिया रागनी को लगने लगा हमेशा तो शुभि उससे हर बात में आगे रही अब उसका प्यार खुद लेकर इसमें भी आगे निकलना चाहती है। इसबार जैसे ही रजत आया रागनी ने कहा दिया कि वो प्यार करता है तो जल्दी ही उससे शादी करें।
“ठीक है भेजो अपने पापा को मेरे घर बात करने के लिये” रजत ने हंस कर कहा।
बड़ो की आपस मे बाते हुई और अपने बच्चों की खुशी का सम्मान करते हुये रजत रागनी की शादी बड़ो ने तय कर दी।
“धोखेबाज, मैंने तेरा हमेशा साथ दिया, तेरी हर प्रकार से मदद की और तुमने जानते हुये भी रजत से शादी तय करवा ली” शुभि ने गुस्से में रागनी से कहा।
“नही शुभि, मैं और रजत पहले से ही एक दूसरे से प्यार करते थे” रागनी ने हर तरीके से शुभि को समझाने की कोशिश की लेकिन शुभि को यही लग रहा था कि रागनी ने सब जानते हुये जानबूझकर उसे नीच दिखाने के लिये किया है।
बहुत बहस के बाद रागनी ने शुभि से कहा “विश्वास करो शुभि मैं तेरे लिये धोखेबाज नही हूँ तुम्हारे लिये मैं कुछ भी कर सकती हूँ”
“तो छोड़ दे रजत को मेरे लिये” शुभि बोली।
रागनी कुछ नही बोली क्यो की वो खुद रजत को बहुत चाहती थी।
रजत रागनी की शादी को दो साल बीत गये, दोनों बहुत खुश थे। एक रात किसी बात पर दोनों में बहस हो गई, रागनी ने दिखावटी गुस्से में कहा “मैं आग लगा कर मर जाऊँगी”
“जिसे मरना होता है वो धमकी नही देते” रजत ने कहा और मुँह ढक कर लेट गया, रागनी की पूरी उम्मीद थी कि रजत उसे मनाने आयेगा लेकिन रजत नही आया।
अब रागनी का गुस्सा और बढ़ गया उसने गुस्से में मिट्टी का तेल अपने शरीर मे डाल लिया, फिर बोली “रजत मैंने तेल डाल लिया है”
रजत को लगा रागनी मजाक कर रही है तो उसने चिढ़ाने के लिये कह दिया “माचिस फ्रिज के ऊपर रखी है”
अब रागनी का गुस्सा चरम पर था उसने गुस्से में अपने शरीर मे आग लगा ली आग की लपटों के आभास पर रजत का ध्यान गया “हे भगवान, ये तुमने मजाक मजाक में क्या कर डाला” बोलता हुआ रजत उसे बचाने भागा लेकिन तब तक रागनी काफी कुछ जल चुकी थी।
रजत और उसके माता पिता सब रागनी को लेकर अस्पताल भागे डॉक्टर ने इलाज शुरू कर दिया।
रागनी होश में नही थी डॉक्टर अपना इलाज कर रहे थे, रजत के परिवारीजन, रागनी के परिवारीजन और पुलिस सब रागनी के होश में आने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
रागनी को होश आया उसने पुलिस को बयान दिया कि वो खुद अपनी गलती से जली है।
रजत के परिवार बाले रागनी की दया भाव से देख रहे थे। रागनी ने अपनी सास से कहा “मम्मी मुझे माफ़ कर दीजिये”
रजत की माँ सहित सभी की आंखों में आंसू थे।
रागनी फिर बोली “मम्मी मुझे मेरी शादी बाली लाल साड़ी पहननी है, मेरा पूरा श्रंगार कर दीजिये, मेरे जेवर गहने भी पहना दीजिये”
रजत की माँ और रागनी की माँ ने उसका पूरा सामान मंगाया उसे दुल्हन की तरह सजाया। रागनी ने सब को अपने हॉस्पिटल कक्ष से बाहर करवा दिया केवल रजत को छोड़ कर।
“इतनी छोटी सी बात पर कोई इतना बड़ा कांड कर लेता है क्या?” रोते हुये रजत ने पूछा।
“अब इस समय तो शिकायत न करो रजत, इस समय मुझे अपनी गोद मे लेकर प्यार की बाते करो देखो मैं तुम्हारी दुल्हन बनी हूँ, सुंदर तो लग रही हूँ न” रागनी की आवाज और आंखों में पीड़ा थी।
रजत ने रागनी के जले हुये शरीर को बहुत संभाल कर उठा कर अपनी गोद मे लिटा लिया।
“मैं तुम्हारी सुहागन हूँ सदा सुहागन” रागनी, रजत की आँखों मे देखते हुये बोली।
“ऐसी बाते मत करो रागनी” रजत रोने लगा।
“अब मैं नही बचूंगी रजत अगर मुझसे कोई गलती हुई हो तो माफ कर देना” रागनी ने कहा।
“तुम्हे कुछ नही होगा रागनी तुम बचोगी, मेरे लिये बचोगी, नही तो तुम ही सोचो तुम्हारे बाद मेरा क्या होगा कौन रखेगा मेरा ध्यान” रजत फुट फुट कर रो रहा था।
“मुझे एक बचन दो रजत, मेरे मरने के बाद तुम मेरी सहेली शुभि से शादी कर लोगे और उसे भी उतना ही प्यार करोगे जितना मुझे करते थे, शुभि भी तुम्हे बहुत चाहती है, वचन दो रजत”
रजत ने रोते रोते हा में गर्दन हिलाई, रागनी का शरीर ढीला पड़ गया, वो अपनी दोस्ती और प्यार का वचन लेकर अनंत पथ पर जा चुकी थी।
अम्बिका कुमार शर्मा(राजा)
अमृत नगर कॉलोनी, गांधी नगर महोबा
 

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