रिश्तों की उलझन

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मेजर प्रभास अपने बडे भाई वीर के शादी के लिए घर पर छुट्टियां लेकर आये थे। घर में बहुत ही खुशी का माहौल था। वीर बैंगलोर में किसी कंपनी में इंजीनियर था। अच्छा खासा कमा लेता था। इसी वजह से दुल्हन बनी दीया को सभी लोग खुशनसीब समझ रहे थे। अग्निहोत्री फैमिली में दीया तीनों बेटियों मे सबसे बडी बेटी। दीया के पापा केदारनाथ जल्द से जल्द ये शादी हो जाए और एक बेटी का बोझ कम हो जाए, इस प्रयास में थे। दीया भी पूना मे छह महीनों से जॉब कर रही थी, लेकिन शादी के बाद अब सब पीछे छूट जाने वाला था। वो दोस्त, वो पार्टियां, वो होस्टल की यादें सब कुछ।
शादी के भीड़ में भी प्रभास का चाय पानी और खाने पीने का सब लोग ख्याल रख रहे थे। प्रभास एक फौजी होने के कारण हर कोई उस पर गर्व महसूस करता था। शादी के एक दिन पहले सब लोग नाच रहे थे, खाने का लुत्फ उठा रहे थे, घर में हर तरफ हंसी के ठहाके लग रहे थे।
प्रभास को सुबह चार बजे उठने की आदत थी। दुसरे दिन सुबह चार बजे जब प्रभास की आंखें खुली तो उसने बाजू में हाथ रखा तो वीर का पता नहीं था। तकिये के उपर चादर ओढ़ कर रखी थी। बेड का ये हाल देखकर प्रभास का मन बेचैन होने लगा। अगर वीर घर में ही होता तो यू तकिये पर चादर डाल कर क्यूं जाता? और अगर वो बाहर गया है तो कहां? वो भी मुझे बिना बताए है भगवान! तभी वीर को सामने के टेबल पर एक चिठ्ठी दिखी। चिठ्ठी में लिखा था, “प्रभास मैं जब इजीनियरिंग पढ़ रहा था, तभी से एक लड़की से प्यार करता था। वो लड़की अब मेरे ही साथ बैंगलोर मे जॉब करती है। मैं उससे पहले से ही रजिस्टर्ड मैरिज कर चुका हूं। वो लड़की पंजाबी है इसी वजह से मुझे पता था कि मम्मी पापा इस शादी के लिए कभी तैयार नहीं होंगे। मैं अपने दिल की बात उन्हें कब से बताना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी। पर अब मैं अपने डर के कारण दीया की जिंदगी बरबाद नहीं कर सकता। मम्मी पापा को इस हालत में छोडकर भाग जाना गलत है, लेकिन मेरे पास और कोई चारा नहीं है। पापा मेरे प्यार को कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे। प्रभास हो सके तो मुझे माफ करो। घरवालों का ध्यान रखना।”
चिठ्ठी पढ़ने के बाद प्रभास तुरंत रेलवे स्टेशन के लिए दौड़ा। प्रभास को उम्मीद थी की शायद वीर उसे वहां मिल जाए और वो उसे समझदारी से बात करके घर ले आएगा। लेकिन रेलवे स्टेशन पर पूरी तरह सन्नाटा था। पता करने पर पता चला बैंगलोर जाने वाली ट्रेन रात को दो बजे ही निकल चुकी थी। अब तो प्रभास के पास खाली हाथ घर लौटने के सिवा और कोई भी चारा नहीं था।
घर लौटते ही प्रभास पहले अपने पापा के पास गया और वीर की चिठ्ठी उनके हाथों में थमा दी। चिठ्ठी पढ़ते ही प्रभास के पापा बीपी बढ़ने की वजह से नीचे गिर पड़े। वीर की इस हरकत की वजह से घर में सभी लोग परेशान हो गए। लडकी वालों को क्या जवाब देंगे, गांव में अब हमारी क्या इज्जत रह जाएगी? इस तरह के हजारों सवाल हर किसी को सता रहे थे। थोड़ी ही देर में घर के बुजुर्गों ने फैसला ले लिया की वीर की जगह प्रभास की शादी होगी दीया से। ये बात सुनकर प्रभास का भी मुंह उतर गया लेकिन घरवालों के हालात देख कर वो भी शादी के लिए राजी हो गया।
लड़की वालों को सारी बातें समझाकर प्रभास और दीया की शादी तो हो गयी लेकिन शादी के पहली ही रात प्रभास ने दीया से मुंह फेर लिया। वो ना ही उसकी तरफ देख रहा था और ना ही उससे बात कर रहा था। प्रभास किसी घरेलू लड़की से कभी भी शादी नहीं करना चाहता था, वो किसी आर्मीँ फैमिली की लड़की से शादी करना चाहता था। प्रभास के कैम्प के कर्नल बोस की बेटी रचना प्रभास को बहुत पसंद थी। वो बहूत ही बहादुर थी, कराटे चैम्पियन थी, शूटिंग भी अच्छी कर लेती थी।
रचना के बात करने के रवैये से प्रभास को ऐसा लगता था जैसे रचना भी उसे पसंद करती थी। अगर सब कुछ ठीक होता तो शायद प्रभास अपने जीवन साथी के रूप में रचना को ही चुनता। अब इसी बात का गुस्सा वो शायद दीया पर निकाल रहा था। प्रभास और दीया के बीच की दुरियां घरवालों के नजरों से भी छुपी नहीं थी। प्रभास की मां दीया को प्रभास के साथ कैंम्प में भेजने का निर्णय लेती हैं। दोनों कुछ दिन अकेले साथ में रहेंगे तो अपने आप सब कुछ ठीक हो जाएगा। प्रभास के बर्ताव से दीया भी उससे डरती थी और अपने आपको उसकी नजरों से दूर ही रखती थी। प्रभास के साथ श्रीनगर जाने की बात सुन कर तो वो और भी परेशान हो गयी। प्रभास घरवालों से इतना परेशान हो गया था कि वो छुट्टियां खत्म होने से पहले ही श्रीनगर लौट गया।
ट्रेन के सफर में प्रभास ने पूरा वक्त ट्रेन के दरवाजे में खड़े रह कर गुजारा। वो एक बार भी दीया का हालचाल पूछने के लिए अंदर नहीं आया। आखिरकार दीया की आंखें भी पूरी तरह नम हो गयी। ऐसी शादी से वो भी खुश नहीं थी। लेकिन मायके जाने से कोई फायदा नहीं था। अभी और दो छोटी बहनों की शादी बाकी थी। दीया भी अब इस रिश्ते के बारे में सोच-सोचकर परेशान हो गयी। देखते-देखते श्रीनगर आ गया।
“आओ, हमारा स्टेशन आ गया।”
“जी”
स्टेशन पर उतरते ही दोनो ने टैक्सी कर ली। रात के बारह बजे थे। रास्ते में ही एक आदमी गन लेके टैक्सी के सामने खडा हो गया।
“चलो नीचे उतरो, जल्दी नीचे उतरो, वरना ठोक दूंगा”
“उतरो उतरो नीचे उतरो भाई”
“इधर आओ, सब एक साइड में” तभी आर्मीवाले भी उसका पीछा करते-करते वहां पहुंच गये। दीया और प्रभास के बीच की दूरी की वजह से वो दोनों एक दूसरे से दूर ही खड़े थे। तभी उस आतंकवादी ने दीया को अपनी तरफ खींच लिया।
“खबरदार अगर किसी ने गोली चलाई तो इस लडकी की जान ले लूंगा।”
“स्टॉप फायरिंग, बादल को जाने दो, ” मेजर बोस ने कहा।
बादल दीया को अपने साथ गाड़ी में बिठाकर ले गया। दीया को इस तरह से ले जाने से पहली बार प्रभास को दीया की फिक्र हुई। प्रभास को अब खुद पर गुस्सा आने लगा। मैं कितनी बुरी तरह से उसके साथ पेश आया। इस शादी मे दीया का कोई दोष नहीं था। गलती तो मेरे खुद के भाई की थी। अगर दीया को कुछ हो गया तो मै अपने आपको कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।
बादल दीया को लेकर जंगल में पहुंच गया।
“देखो मुझे जाने दो। मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?”
“छोड दूंगा, बस थोड़ी देर चुपचाप बैठो। मैं भाग-भाग के थक चुका हूं”
दीया डरी-डरी सी सहमी सी चुपचाप बैठी रही। वो प्रभास के पास वापस जाकर क्या करने वाली थी। इससे तो अच्छा है कि ये आतंकवादी मुझे यहीं मार दे। सारा किस्सा ही खत्म हो जाएगा। बादल एक घंटे तक बैठा रहा। वो बार-बार दीया को देखे जा रहा था। दीया अपने ही ख्यालों में इतनी खो चुकी थी कि उसका ध्यान बादल की नजरों के तरफ गया ही नहीं। बादल अचानक से उसके पास आया और दीया के दोनों हाथ बांध दिये। उसके मुंह पर भी एक पट्टी बांध दी। बादल उसे मेन हाइवे तक लेके गया । अपने दोनों हाथों से उसने दीया को कसके पकड़ा और उसकी आंखों में आंखें डालकर चेतावनी दी, “ये मुलाकात याद रहेगी। “ऐसा कहते ही पीछे से आने वाले एक फोरव्हीलर के आगे उसने दीया को फेंक दीया। अगले ही क्षण बादल जंगल में गुम हो गया।
फोरव्हीलर वालों ने दीया को आर्मी क्वार्टर पहुंचाया। वहां पर पहुंचते ही प्रभास ने उसे गले लगाया।
“तुम ठीक तो हो।”
“जी”
प्रभास मै जानता हूँ की तुम परेशान हो लेकिन पहले आर्मी का डिपार्टमेंट दीया से पूछताछ करेगा। मेजर शर्मा दीया को अंदर ले जाईए।
“वो आपको कहाँ ले गया।”
“जी गाड़ी एक घने जंगल में आकर रुक गयी थी।”
“क्या उसने आपको कोई शारीरिक हानि पहुंचायी “
“जी नहीं”
“आप कम से कम एक घंटा उसके साथ थी, वो क्या बातें कर रहा था।”
“कुछ भी नहीं, भाग-भाग के थक गया हूं, थोडी देर में छोड दूंगा”
“इसके अलावा”
दीया ने नजरे झुका लीं। वो इधर-उधर देखने लगी। प्रभास बाहर खिड़की से उसकी तरफ देख रहा था।
“जी कुछ भी नहीं”
लेकिन दीया का ये जवाब मेजर शर्मा को झूठ सा लगा। प्रभास दीया को लेकर घर आ गया। प्रभास ने दीया से माफी मांगी और अपने वैवाहिक जीवन की नयी शुरूआत की। रात के समय प्रभास अपने दोस्तों के साथ टहलने के लिए बाहर गया था। दीया घर में अकेली थी। तभी डोर बेल बजी। दीया ने दरवाजा खोला तो सामने एक बुके था, उसके साथ चिठ्ठी भी। चिठ्ठी में लिखा था, “ये मुलाकात याद रहेगी। “दीया तो चिठ्ठी पढ़ते ही हैरान हो गयी। उसे फौरन समझ आ गया ये बादल का ही काम है। जैसे-तैसे दीया की शादी-शुदा जिंदगी पटरी पर आयी थी और फिर ये मुसीबत। दीया ने जल्दी से बुके घर से बाहर फेंक दिया। थोड़ी ही देर में प्रभास आया । खाना खाकर दोनों सोने ही वाले थे कि दीया ने प्रभास से बात करने की कोशिश की । लेकिन उनके बीच उसमें फिर से अनबन न हो जाये, इस डर से वो कुछ भी नहीं कह पायी।
दूसरे ही दिन वो दोनो शॉपिंग करने एक मॉल में गये थे। दीया जब चेंजिंग रूम में गयी तो बादल ने उसके मुंह पर हाथ रखकर उसे कसके पकड़ लिया। दीया के शांत होने के बाद बादल ने अपना हाथ उसके मुंह से हटाया।
“देखो तुम मेरा पीछा करना छोड़ दो। प्रभास की और मेरी अभी एक महीने पहले शादी हुई है। क्यूं मेरी शादीशुदा जिंदगी बर्बाद कर रहे हो।”
“तुम्हारी आवाज तो तुम्हारी आंखों से भी ज्यादा खुबसूरत है।”
“हे भगवान, तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता।” ऐसा कहकर जोर से दरवाजा पटक के दीया बाहर निकल आयी।
“अरे मेरी जान, प्रभास को कुछ भी पता नहीं चलेगा। हम बस यूंही मिलते रहेंगे”
“क्यूं मिलेंगे, कभी नहीं मिलेंगे।”
दीया डर के मारे भागकर प्रभास के सामने जाकर खड़ी हो गयी। थोड़ी ही देर में आर्मी वालों को खबर मिली बादल मॉल में आया था। मॉल की सीसीटीवी फुटेज चेक की तो उसे दीया के साथ कैमरे में देखा गया। कैप्टन बोस ने फौरन प्रभास को दीया को आर्मीवालों के हवाले करने के लिये कहा। प्रभास ये सारी बातें जानकर फिर से हैरान हो गया।
“तुम बादल को कैसे जानती हो”
“जी मैं नहीं जानती, वो खुद बार-बार मुझसे मिलने की कोशिश करता है।’
“अच्छा तो इश्क का खुमार है”, कैप्टन बोस ने कहा।
“दीया आज से तुम बादल को पकड़ने के लिए हमारी मदद करोगी”
“जी मैं। आप मुझे इन सब चीजों से दूर ही रखिए। प्रभास तुम मुझे वापस घर भेज दो। मुझसे ये सब नहीं होगा।”
“क्या नहीं होगा, इसीलिए मैं किसी घरेलू लड़की से शादी नहीं करना चाहता था। क्या तुम अपने देश के लिए इतना भी नहीं कर सकती।”
“प्रभास, काम डाऊन। अभी वो डरी हुई है उसे शांति से समझाओ।”
आखिरकार प्रभास की वजह से दीया तैयार हो गयी। प्लान के मुताबिक दोनों दो दिन तक बाहर घूमते रहे। लेकिन बादल नहीं आया। उसके बाद एक पास के हिल स्टेशन पर हनीमून के लिये चार-पाच दिन गये, लेकिन फिर भी बादल नहीं आया। प्रभास एक साये की तरह दीया पर वॉच रख रहा था। लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। आर्मीवालों की सूचना के अनुसार दोनों घर लौट आए। प्रभास हमेशा की तरह रात को टहलने के लिये निकल गया। दीया भी बेड पर शांति से लेटी थी और बादल क्यं नहीं आया यही सोच रही थी। तभी बादल खिड़की से कुदकर उसके सामने आ कर खड़ा हो गया।
“मेरे बारे में सोच रही हो ना।”
इस बार दीया को उसके साथ बातें करके उसे घर पर ही रोककर रखना था।
“हां तुम्हारे ही बारे में सोच रही हूँ। पहले ये बताओ इतने दिनों से मिलने क्यूं नहीं आए।”
“हाय मेरी जान अब तुम भी मुझसे मिलने का इंतजार करने लगी। इसे ही कहते हैं प्रेम रोग। एक काम करते हैं, कल मिलते हैं। सुबह शिवजी के मंदिर में। अभी मैं चलता हूं, वरना तुम्हारे पतिदेव आ जाएंगे।”
“अरे सुनो तो ! “दीया कुछ कहती इससे पहले ही वो भाग गया।
थोड़ी ही देर में प्रभास आया।
“वो आया था”
“कौन, बादल”
“जी, मैंने उसे रोकने की बहूत कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ पर उसने मुझे कल सूबह शिव मंदिर बुलाया है।”
“ये भी अच्छी बात है हमारे लिए। लेकिन कल मैं तुम्हारे साथ नहीं आऊंगा। मैं घर पर ही रहुंगा। आर्मी के लोग भेष बदलकर तुम्हारे साथ आएंगे।”
“लेकिन आप क्यूं नहीं।”
“अगर मैं तुम्हारे साथ आऊंगा तो वो नहीं आएगा। समझने की कोशिश करो। तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है।”
दीया और प्रभास दोनों ही रात को सो नहीं पाए। कब ये बादल चेप्टर खत्म होगा इसी उलझन में दोनों थे। सूबह होते ही दीया मंदिर चली गयी। दीया को अकेला देख कर बादल भी उसके पीछे-पीछे चलने लगा। बादल के पीछे आते ही दीया को उसकी मौजूदगी का एहसास हुआ। दीया जैसे ही घंटा बजाने लगी, बादल ने अपना हाथ उसके हाथों पर रखा, तभी आर्मी वालों ने उसे चारों ओर से घेर लिया। दीया ने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा, “धोखा” कहकर बादल जोर-जोर से चिल्ला रहा था।
“ये तुम्हें बहुत महंगा पड़ेगा। कभी किसी को प्यार में धोखा नहीं देना चाहिए। मैं फिर आऊंगा।”
“लेके जाओ इसे यहाँ से”, प्रभास की आवाज आयी पीछे से।
“दीया तुम्हे डरने की कोई जरुरत नहीं। आज तुम्हारी वजह से एक आतंकवादी पकड़ा गया है। मुझे तुम पर गर्व है कि तुम मेरी बीवी हो।”
सब कुछ ठीक हो गया। लेकिन आज भी कभी-कभी बादल की आवाज और आंखें दीया को परेशान करती हैं।

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