मिठास जीवन की

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बस तेज रफ्तार से सड़क पर दौड़ रही थी मगर सुमन को लग रहा था कि बस धीरे और, और धीरे हुए जा रही है उसका आज आखिरी पेपर भी अच्छा नहीं हुआ था मगर रवि को निश्चित जगह पर मिलने की खुशी में वह बावरी हुई जा रही थी आज से वह हमेशा के लिऐ रवि की होने जा रही थी अपना प्यार पाने के लिए घर जो छोड़ आई थी वो…
क्योंकि उसके घर वाले शायद उन्हें कभी भी एक न होने देते क्यूंकि रवि गरीब घर का बेरोजगार लडका था . पिता ने उसके बारे मे जांच करके कहा वो शराबी है जुआरी है कभी काम की तलाश की ही नही जो कोई काम करता …
मगर सुमन को पिता की बातों पर यकीन नही था क्यूंकि रवि तो हमेशा उसे स्कूल के बाहर मिलता था कभी कुल्फी तो कभी गुपचुप खिलाता था कभी फूलों का गुलदस्ता देता तो कभी कोई दूसरा गिफ्ट ..
यूं भागकर शादी करने का आइडिया भी उसी का था कहता था मुम्बई लेकर जाएगा जहां वो दोनों एक नई दुनिया बनाएगे …
सचमुच कितना सुनहरा दिन होगा जब उसका अपना घर होगा जहां उसे कोई टोकनेवाला नही होगा ना मां ना बाबूजी ….
मगर मन के किसी कोने मे सहेली की कही बात भी गूंज रही थी की सचमुच रवि उसका फायदा उठाना तो नही चाहता मगर फिर मन को समझाती ..
नही मम्मी पापा के प्यार से ज्यादा प्यार और मिठास है रवि के प्यार मे …
और मुसकुराने लगती …
तभी अचानक बस रुक गई पता लगा कि कोई दुर्घटना हो गई है सुमन ने खिड़की से देखा- एक औरत बुरी तरह से जख्मी हुई पड़ी थी और अपने जवान बेटे की लाश से चिपकी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी इस दृश्य ने सुमन के मस्तिष्क में हलचल मचा दी
उसके दोनों बड़े भाई भी तो एक दिन ऐसे ही एक सड़क हादसे में गुज़र गये थे.. “हाय! कितना दर्द बर्दाश्त किया था तब सबने…
मगर…मगर…क्या अब मेरे माँ-बाप यह सहन कर लेंगे कि मैं…।
नहीं…नहीं…कभी नहीं…अब तो मैं ही उनकी जान हूं वो तो मर ही जायेंगे अकेले.. वो सदमा तो उन्होंने भगवान की मर्ज़ी समझ कर सहन कर लिया मगर यह सदमा…
और मेरी वजह से होनेवाली बदनामी…..
क्या वह…. सुमन घबराई -नहीं….नहीं…
यह मैं क्या करने जा रही हूँ। जवानी के जोश में मैं तो यह भूल ही गई कि मुझे भगवान जैसे चाहने वाले मेरे माँ-बाप भी है।”
वह बिना कुछ और सोचे जल्दी से बस से उतरकर होस्टल की तरफ़ चल दी और सामान लेकर जैसे ही शाम को घर पहुँची उसके इंतज़ार में आँखें बिछाए बैठी उसकी माँ उसको सीने से लगाकर बच्चों की तरह चूमने लगी और वही देर रात आये उसके पिताजी उसकी मनपसंद जलेबी लेकर आये थे सबने साथ मिलकर खाई .. शायद उसदिन जलेबी की मिठास और बीच सडक पर हुए हादसे ने सुमन के मन मे आई बेवकूफी की कड़वाहट हमेशा को दूर कर दी थी.
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