"माता करे तो प्रेरणा, प्रिय करे तो प्यार

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सुप्रभात मित्रो, आज की पंक्तियाँ आपके इस शुभ दिन के लिये:-
“माता करे तो प्रेरणा, प्रिय करे तो प्यार,
प्रफुल्लित करे मन को, स्फूर्ति दे तन को..!!”
मित्रो यह है चुम्बन की गाथा, किस या चुम्बन, प्यार और मोहब्बत इन दोनों शब्दों में गहराई पैदा करता है। हालांकि लोग रिश्ते में चुम्बन को अश्लील मानते हैं लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि “क्यों आपकी माँ का प्यार और उसका दिया गया आपके माथे पर चुम्बन” आपकी प्रेरणा स्त्रोत का कार्य करता है? मैंने अपने दोस्त के बेटे के गाल को चूमा था, मुझे लगा था जैसे मैं एक नन्हे जेन्टलमैन को चूम रहा हूँ, उसकी नर्म और गुदगुदी त्वचा का अहसास मुझे आज भी याद है।’
देखा जाए तो चुंबन एक स्वाभाविक क्रिया है, जो दो लोगों के बीच परस्पर लगाव को बढ़ाता है। एक मां अपने पुत्र को स्नेहाभाव से चूमती है तो एक पिता अपने पुत्री के सर पर चूम कर उसे सुरक्षा का विश्वास दिलाता है। एक प्रेमी अपनी प्रेमिका के गालों पर चूम अपने प्यार का इजहार करता है तो एक पति अपनी पत्नी के हाथों पर चूम जिंदगी भर उसका हाथ थामने का विश्वास दिलाता है। चुंबन एक ही है लेकिन हर चुंबन का एक अर्थ होता ही है। एक दैहिक और वासना रहित किस किसी भी संबंध को बेहद सुंदर बना देता है।
“मेरे माथे पर नरम -गरम दो अधरों की छुअन,
कितना पावन ! कितना पवित्र ! माँ का चुम्बन !
फैलाकर बाहें, माँ का घुटनों तक झुक जाना,
दौड़कर मेरा माँ से लिपट जाना !
मातृत्व का अभिनन्दन !
कितना पावन ! कितना पवित्र ! माँ का चुम्बन !
ढिठाई पर पिटाई, मेरा रूठ जाना, माँ का मनाना ,
माँ का दुलार, ममता की फुहार !
माँ से शुरू, माँ पर ख़त्म ! मेरा बचपन !
कितना पावन ! कितना पवित्र ! माँ का चुम्बन !!”
 
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