बेनामी संपत्ति और कर चोरी करने वालों के खिलाफ अब सरकार ने उठाए  दो बड़े कदम

भ्रष्टाचार और अवैध तरीकों से अर्जित किए गए धन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने अब नया कदम उठाया है.बेनामी संपत्तियों पर शिकंजा कसने के लिए वित्त मंत्रालय ने एक करोड़ रुपये का इनाम देने की योजना शुरुआत की है.यदि कोई व्यक्ति बेनामी संपत्ति उन्मूलन यूनिट में ज्वाइंट/एडिशनल कमिश्नर के समक्ष किसी ऐसी संपत्ति के बारे में जानकारी देता है तो उसे यह इनाम मिलेगा.

पिछले वर्ष केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के एक अधिकारी जो इस योजना पर काम कर रहे थे, नाम न बताने की शर्त पर बताया कि सूचना देने वाले शख्स को कम से कम 15 लाख और अधिकतम 1 करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा.इसके साथ ही उस शख्स की पहचान भी गुप्त रखी जाएगी ताकि उसकी सुरक्षा को लेकर कोई खतरा न हो.

बेनामी प्रॉपर्टी पाए जाने पर सरकार उसे जब्ती कर सकती है. जो व्यक्ति दोषी पाया जाएगा उसे नए प्रावधान के तहत सात साल के लिए सश्रम कारावास की सजा मिल सकती है. प्रॉपर्टी की बाजार कीमत पर 25 फीसदी जुर्माने का प्रावधान है.जो लोग जानबूझकर गलत सूचना देते हैं उन पर प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य का 10 फीसदी तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है.यदि सरकार को लगता है कि आरोपी के कब्जेट की प्रॉपर्टी बेनामी है तो वह नोटिस जारी कर आपसे प्रॉपर्टी के कागजातकी जांच कर सकता है. इस नोटिस के तहत 90 दिन के भीतर अपनी प्रॉपर्टी के कागजात अधिकारी को दिखाने होंगे.

मोदी सरकार ने 1988 के बेनामी ऐक्ट को संशोधित कर बेनामी ट्रांजैक्शंस ऐक्ट, 2016 पारित कराया है. अब बेनामी संपत्तियों की खोज में लोगों के सहयोग को बढ़ाने के लिए सरकार ने यह इनामी योजना घोषित की है.बेनामी लेनदेन और संपत्तियों को उजागर किए जाने और ऐसी संपत्तियों से मिलने वाली आय के बारे में सूचना देने वाले लोगों को यह इनाम हासिल होगा.

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इस स्कीम का लाभ विदेशी नागरिक भी उठा सकते हैं. बेनामी संपत्तियों के बारे में जानकारी देने वाले शख्स की पहचान गुप्त रखी जाएगी और पूरे मामले में सख्ती से गोपनीयता का पालन किया जाएगा.

सीबीडीटी से जुड़े अधिकारी का मानना है कि गुप्त सूचनाओं के आधार पर बेनामी संपत्तिधारियों को पकड़ना काफी आसान हो जाएगा और इससे पूरे देश में अभियान चलाया जा सकेगा.

सरकार ने इनकम टैक्स चोरी के मामलों को उजागर करने के लिए भी 50 लाख रुपये की इनामी योजना का ऐलान किया है.

आईओसी लगातार दूसरे साल सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली सरकारी कंपनी

आईओसी के सबसे ज्यादा मुनाफे में रहने के बाद इस बात को लेकर सवाल उठने लगा है कि पेट्रोल, डीजल के चढ़ते दाम के बीच कंपनी को ईंधन सस्ते में बेचने के लिये सब्सिडी क्यों दी जानी चाहिये.

सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन आयल कार्पोरेशन (आईओसी) लगातार दूसरे साल सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली सरकारी कंपनी बनी है. उसने तेल एवं गैस का उत्पादन करने वाली ओएनजीसी को भी छोड़ दिया है.आईओसी के सबसे ज्यादा मुनाफे में रहने के बाद इस बात को लेकर सवाल उठने लगा है कि पेट्रोल, डीजल के चढ़ते दाम के बीच कंपनी को ईंधन सस्ते में बेचने के लिये सब्सिडी क्यों दी जानी चाहिये.

सरकार ओएनजीसी तथा तेल, गैस उत्पादन से जुड़ी दूसरी कंपनियों को सब्सिडी में योगदान के लिये कह सकती है. आईओसी कारोबार के लिहाज से दशकों तक देश की सबसे बड़ी कंपनी रही .

दिग्गज कारोबारी मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लगातार तीसरे साल सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही

ओएनजीसी लंबे समय तक सर्वाधिक लाभ कमाने वाली कंपनी रही लेकिन तीन साल पहले निजी क्षेत्र की रिलायंस और टीसीएस से यह पिछड़ गयी. ओएनजीसी का लाभ सार्वजनिक क्षेत्र की तीन खुदरा कंपनियों … इंडियन आयल कार्पोरेशन (आईओसी) , हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लि . (एचपीसीएल) तथा भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लि . (बीपीसीएल) के संयुक्त लाभ से भी अधिक था .

लेकिन अब वह आईओसी से पिछड़ गई है.

आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी पेट्रोलियम पदार्थों की खुदरा बिक्री करने वाली कंपनियां अचछा मुनाफा कमा रही हैंऐसी में ओएनजीसी और आयल इंडिया को उन्हों पेट्रोल, डीजल की सस्ते दाम पर बिक्री करने पर सब्सिडी में योगदान करने के लिये कहने पर सवाल उठने लगे हैं.

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