बेटी-विजय कुमार सपत्ती

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आज  शर्मा जी के घर में   बड़ी रौनक थी उनकी एकलौती बेटी ममता की शादी  जो थी।
घर बहुत से मेहमानों से भरा हुआ था दरवाजे पर शहनाई बज रही थी खुशियों का दौर था।
शर्मा जी बड़े व्यस्त थे फेरे हो रहे थे। बेटी की विदाई के बारे मे सोच कर ही शर्मा दंपति का दिल दुख जाता था । शरम जी की पत्नी की आनहो से आँसू बह रहे थे । शर्मा जी भी थोड़ी देर मे आँसू पोच लेते थे। फेरे हो गए , सभी दावत मे व्यस्त हो गए। शर्मा जी बात बात में अपनी पत्नी से उलझ जाते थे दोनों में कभी भी एक बात पर एकमत नहीं हो पाता था।
पार्टी में शर्मा जी हर किसी से बस यही कह रहे थे कि आज उनकी बिटिया के जीवन का सबसे अच्छा दिन है वह एक राजकुमार जैसे इंसान से शादी कर रही है जो उसे राजकुमार की ही तरह रखेगा।
ममता बहुत खुश थी बस उसके मन में एक ही दिन आती थी कि उसे अपने पीहर का घर छोड़ कर जाना होगा तुझे पता है इनके पिता वह सबसे बड़ी कमजोरी है वह कैसे उसके बिना रह पाए बस यही सोच उसके मन में चल रही एक बात और उसे बहुत परेशान कर रही थी उसके माता-पिता का आपस में बार-बार और दूसरी बात नहीं लड़ना और उसके मन में एक विचार आया।
दावत करीब खत्म होने पर थोड़ी देर में ही विदाई की रस्म थी।
ममता स्टेज पर पहुंचने पर सब को संबोधन करना शुरू किया।
आप सभी का धन्यवाद कि आप लोग यहां आए मेरे पिताजी और माताजी का आप सभी ध्यान रखना क्योंकि मेरे जाने के बाद  वो अकेले रह जाएंगे। मैं एक बात कहना चाहती हूँ मेरे पिता से और सभी लड़कियों के पिताओ से आप हम लड़कियो को बड़े प्यार से पालते हैं और शादी करते समय यही चाहते हैं कि हमें पति के रुप में कोई ऐसा इंसान मिले जो हमें राजकुमारी की तरह रखें और एक ऐसी जिंदगी दे जो परीकथाओं जैसी हो।
सब शांत हो गए थे सभी ध्यान से ममता की बातें सुन रहे थे।  
ममता ने आगे कहा आप सभी से मैं एक ही बात कहना चाहूंगी कि क्या आपने जिस लड़की से प्यार किया है उसे क्या आपने राजकुमारी की तरह रखा,   क्या उसे परी कथा जैसा जीवन दिया उसके साथ लड़ने झगड़ने में जीवन गुजारने के अलावा क्या आपने उसे सारी खुशियां दीं। जिनकी कल्पना उनके पिता ने आपके साथ उनकी शादी करवाते वक्त की थी  जैसे मेरे पिता इस वक्त मेरे लिए कर रहे हैं या दूसरे पिता अपनी बेटियों के लिए करेंगे।
हॉल में सन्नाटा छा गया ममता की मां की  आंखें मानो बारिश बरसा रही थी।हौल में मौजूद कई स्त्रियां रो रही थीं, पुरुष चुप थे , शर्मा जी का सर झुक सा गया था।
ममता ने फिर कहा अब भी समय है मेरे जाने के बाद क्या आप की बेटियों की विदाई के बाद आप उस औरत के साथ वही व्यवहार करिए जो आप अपनी बेटी के साथ उसके पति या ससुराल के द्वारा होते देखना चाहते हैं इससे उन औरतों का उनका खोया हुआ मान मिलेगा उनके पिता के ऊपर उसके आएंगे और आप सभी को एक नया सहारा मिलेगा बस मेरी इतनी सी बात मान लीजिए यही मेरी सच्ची विदाई होगी।
ये कहकर ममता नीचे आ गई,  उसकी मां और पिता नहीं उसे गले से लगा लिया सारा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज गया था।
एक बेटी ने अपना हक अदा कर दिया था।

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