बात ऐसी है…

0
74

बात ऐसी है कि, बात कुछ भी नही,

न दिन मेरा है, न राते कुछ भी नही…!

 

तुझे जब तक महसूस करु सब ठीक,

वरना इन बहारों और फिजाओं में कुछ भी नही…!

 

तू जब कहे तो मैं हँस दू और मुस्कुरा दू,

वरना इन आँखों मे पानी के सिवा और कुछ भी नही….!

 

तेरे स्पर्श से ही होती है मन मे हलचल,

वरना इस देह में एहसास जैसा कुछ भी नही…..!

 

तुझे देखकर ही लब मेरे है खिलते,

वरना इन होंठो में सीलन है और कुछ भी नही…..!

 

तेरे ख़्वाब से ही जागूँ मैं सारी राते,

वरना इस रात में काली उदासी है और कुछ भी नही….!

 

तेरे इश्क़ से ही खिले मेरे देह और चेहरे की रंगत,

वरना ये बेजान सा शरीर है और कुछ भी नही……!

 

अब इतना बस समझ लो कि तुम ही हो सुकूँ मेरा,

वरना इस जिंदगी में बेचैनियां है और कुछ भी नही…..!

 

बात ऐसी है कि, बात कुछ भी नही,

न दिन मेरा है, न राते कुछ भी नही….!!

 

©निशारावल

   छत्तीसगढ़

Loading...

LEAVE A REPLY