पिंजरा

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मम्मा प्लीज़ …एक तोता पालने दो ना ……प्लीज़ …..आठ साल की पाखी ज़िद करते हुए बोली ।
नहीं बेटा …पक्षियों को क़ैद नहीं करते ,आसमान में उड़ने वालों को कभी पिंजरे में नहीं रखना चाहिए …माँ ने समझाते हुए पाखी को कहा ।
नहीं मम्मा ,मुझे एक तोता चाहिए तो चाहिए …..
नहीं बोल दिया ना …..समझती क्यों नहीं …..अब माँ डाँटते हुए बोली
अरे भई माँ-बेटी में क्या बहस हो रही है ……तभी पापा ने ऑफ़िस से आते ही पूछा ।
कुछ नहीं तुम्हारी लाड़ली तोता पालने की ज़िद किए बैठी है ,कब से समझा रही हूँ ,समझती ही नहीं …..माँ ने पापा को पानी का ग्लास देते हुए शिकायती लहजे में कहा ।
अच्छा तो हमारी बिटिया को तोता चाहिए …..अच्छा इधर आओ …पापा ने प्यार से पाखी को बुलाया ।
पाखी माँ की डाँट सुनकर एक कोने में रुआँसी सी खड़ी थी ,पापा के प्यार से बुलाने पर झट से गोदी में आकर बैठ गयी।
पापा …मुझे ना तोता चाहिए …..हरे रंग का ….सुंदर सा …
पाखी ने पापा के गले में अपनी बाँहें डालते हुए कहा ।
अच्छा ,ठीक है ,हम आपको तोता ला देंगे पर हमारी भी एक शर्त है ..पापा ने पाखी से कहा ।माँ कुछ बोलना ही चाह रही थी तो पापा ने आँखों के इशारे से माँ को कुछ कहा ।
माँ चुप हो गयी उन्हें यक़ीन था की पापा अपनी बेटी को समझा लेंगे ।
हाँ पापा मुझे आपकी हर शर्त मंज़ूर है …बस आप एक तोता ला दो ….पाखी ख़ुशी से बोली
बेटा आपको हर वक़्त तोते के साथ रहना होगा उसे एक पल भी अकेला छोड़कर नहीं जाना अगर आप उसे छोड़कर गये तो हम तोता वापिस कर देंगे……पापा ने पाखी को प्यार से समझाया ।
ठीक है पापा मैं मिठ्ठु को छोड़कर नहीं जाऊँगी ,अभी तो स्कूल की भी छुट्टियाँ है ,बड़ा मज़ा आएगा ….पाखी नाचते हुए बोली ।
अगले दिन एक चाँदी से चमकते पिंजरे में मिठ्ठु मियाँ आ गये,पाखी बड़ी ख़ुश हुयी ,अपने सभी दोस्तों को बुला लायी तोता दिखाने के लिए ,रात को भी पिंजरा अपने बिस्तर के पास रखकर सोयी ।
पाखी कभी हरी मिर्च लाती , कभी कोई रसिला फल ,तो कभी भीगी चने की दाल तोता थोडा सा खाता फिर बैठ जाता ।ना कुछ बोलता ना पंख फड़फड़ाता । पाखी पूरा दिन उसको देखती रही पर तोता चुपचाप बैठा रहा ।अब तो पाखी भी बोर हो गयी ,अब उसका मन बाहर जा कर खेलने को करने लगा ,
वह बाहर जाने के लिए जैसे ही उठी तभी पापा ने टोक दिया “बेटा मठ्ठु को छोड़कर कही नहीं जाना “
पाखी मनमसोसकर चुपचाप आकर अपने कमरे में बैठ गयी।
अगले दिन भी पाखी को बाहर खेलने नहीं जाने दिया मम्मा -पापा ने ,तीसरे दिन पाखी रोते हुए बोली “पापा प्लीज़ ……… बाहर खेलने के लिए जाने दो ना ,मुझे हर वक़्त घर में अच्छा नहीं लगता “।
“पर बेटा तुमने भी तो मिठ्ठु को एक पिंजरे में बंद करके रखा है ,उसकी तो फ़ितरत है खुले आसमान में उड़ना ,उसे भी तो बुरा लगता होगा ना जैसे तुम्हें लग रहा है “
“ठीक है पापा मैं उसे अभी उड़ा देती हूँ फिर तो मुझे खेलने जाने दोगे ना “….पाखी अपने आँसू पोंछते हुए बोली ,
शायद उसकी समझ में आ गया था ,वो भागकर अंदर से पिंजरा ले आयी और मिठ्ठु को आज़ाद कर दिया ।
तोता ख़ुशी से चहकता हुआ खुले आकाश में उड़ गया पाखी दूर तक उसे जाते हुए देखती रही और ख़ुद फुदकते हुए खेलने के लिए भाग गयी ।माँ पापा भी अपनी चिड़िया को देखकर मुस्कुरा रहे थे ।
#copypaste

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