पाप और पुण्य

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बहुत समय पहले दो भाई थे ! दोनों ही बहुत समर्थ थे ! एक दिन वो दोनों एक बहुत ही प्रकांड विद्वान् को अपनी जन्मपत्री दिखाने गए ! उन गुरूजी ने उन दोनों की जन्मपत्री देखकर उनका भाग्य बताया ! एक भाई को बताया की आने वाले तीसरे महीने की 21 तारीख को तुमको इतना धन प्राप्त होगा की उसका एक साम्राज्य स्थापित हो जायेगा, और दुसरे भाई को कहा की उसी तारीख को तुमको मृत्यु प्राप्त होगी जो की अटल है !

दोनों भाई उनकी बात सुनकर अपने घर आ गए ! वो उन स्वामीजी पर बहुत विश्वास करते थे तो उनकी कही बात पर तो उनको विश्वास करना ही था ! जिस भाई को धन मिलना था वह बहुत प्रसन्न रहने लगा ! वह उसी दिन से अपने कमाए गए धन को उड़ाने लगा ! उसको अय्याशियों में खर्च करने लगा और धीरे धीरे सारी गलतसंगत का वो आदी हो चूका था क्योकि उसको विश्वास था की उसके भाग्य में राजयोग आने वाला है !

ठीक इसके विपरीत दूसरा भाई जो की मरने वाला था वह अपने धन से पुन्य करने लगा, उसने जगह जगह धर्मशालाएं बनवाई, स्कूल बनवाये, मतलब बहुत सारे पुन्य कार्य करने लगा ! उसको विश्वास था की मरना तो है ही तो क्यों न जीवन में पुण्य कमाएं जायें !

अब वो दिन आ गया जिस दिन की भविष्यवाणी उन गुरूजी ने की थी ! सबसे पहले वो भाई घर से निकला जिसको धन मिलना था, उसको घर से निकलते ही 5 अशर्फियाँ मिली तो वो बहुत खुश हुआ उसने सोचा की यह तो शुरुआत है धन मिलने की अभी तो पूरा दिन पड़ा है लेकिन उसको पुरे दिन केवल पांच अशर्फियाँ ही मिलीं !

दूसरा भाई जब घर से निकला तो उसको बहुत जोर की ठोकर लगी, उसको पैर में चोट लग गयी उसने भी यही सोचा की अभी तो शुरुआत है, आज तो मरना है देख़ा कैसे मरते हैं लेकिन इश्वर की कृपा की उसकी मृत्यु टल गयी और वो जिन्दा बच गया ! अब दोनों भाई बहुत ही आश्चर्य में आ गए. वो तो उन गुरूजी पर बहुत विश्वास करते थे और उनकी बात कभी भी गलत नहीं जाती थी ! वो दोनों गुरूजी के पास गए!

उन्होंने गुरूजी से कारण पुछा तो गुरूजी ने बताया की एक भाई जिसको धन मिलना था उसने अपने पुण्यो को उन तीन महीने में किये गए पाप द्वारा खो दिया और उसको साम्राज्य मिलने की बजाये केवल पांच अशर्फियाँ ही मिलकर रह गयी ! इसके विपरीत दुसरे भाई ने मरने के गम में इतने पुण्य अर्जित किये की उसकी मृत्यु टल कर मात्र के मामूली चोट में बदल गयी.

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