शादी एक ऐसा रिश्ता है जिसमे पति-पत्नी के बीच सही तालमेल होना बेहद जरुरी है, शादीशुदा जिंदगी जीवन की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है और इस जिम्मेदारी में पति-पत्नी के बीच सामंजस्य का होना बहुत जरुरी है

 

नहीं तो इस प्रेम के रिश्ते को नफरत का रिश्ता बनने में समय नहीं लगता। क्या आपको पता है कि शादी के वक्त दोनों पार्टनर के उम्र के बीच का अंतर उनके वैवाहिक जीवन के लिए बहुत मह्त्वपूर्ण है।

 

आप किसी से शादी कर रहे हैं और वो ऐसे किसी लड़के या लड़की से जिसकी उम्र में आपसे बहुत ज्यादा फ़र्क़ है।

तो आप खुद सोचिये की उनकी सोच और आपकी सोच में कितना फ़र्क़ होगा, लाइफ स्टाइल में कितना फ़र्क़ होगा,

 

इसके अलावा और बहुत सी बातें होती है जहां आपको शादी के बाद एक दूसरे से कई बार अलग होना पड़ता है। दोनों के उम्र में अधिक फासले होने पर शादी नहीं करनी चाहिए। लड़का और लड़की की उम्र में यदि अधिक गैप हो तो शादी क्यों नहीं करनी चाहिए,

 

सोच न मिलना किसी भी रिश्ते को खराब ही करता है अब कोई काम है जो की आप दोनों पार्टनर से जुड़ा हो। लेकिन दोनों के करने के तरीके में फ़र्क़ हो और दोनों अपने हिसाब से करना चाहते हो।

लेकिन दोनों ही अपने आप को प्राथमिकता देते हैं जिससे कई बार आपको अनबन का सामना करना पड़ता है। और सोच जब तक नहीं मिलती है तब तक किसी भी रिश्ते को निभाने में आपको केवल परेशानी ही होती है।

कई बार ऐसा होता है कि अधिक गैप होने के कारण विवाहित जोड़े को एक-दूसरे को समझने में परेशानी होती है।

 

कभी ऐसा भी होता है कि कोई ज्यादा मैच्योर होते है तो किसी में नादानी ही रहती है जिस वजह से दोनों के रिश्तों में खटास आने की संभावना बढ़ जाती है। अधिक गैपिंग की वजह से अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि आप समझाना कुछ चाहते है और सामने वाला कुछ और समझ लेता है।

जिससे कई परेशानी उत्पन्न होती है।

अब अधिक उम्र का गैप हो तो दोनों के रहन सहन के तरीके में भी फ़र्क़ होता है। और दोनों में से कोई भी अपने लाइफस्टाइल को बदलना नहीं चाहता है। तो इसके कारण भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और एक दूसरे को बदलने के चक्कर में हमेशा कोई न कोई परेशानी होती ही रहती है।

इसीलिए शादी के लिए दो से तीन साल का गैप होना ठीक है उससे अधिक आज के तेजी से आगे बढ़ने वाले समय में जनरेशन गैप का काम करता है।

अक्सर देखा जाता है कि लोग नौकरी के इंतजार में या अन्य कारणों से लेट से शादी करते है जिस वजह से उनकी शादी अपने से काफी कम उम्र की लड़की के साथ करना पड़ती है।

इस स्थिति में उनलोगो के रिश्तों में जनरेशन गैप हो जाती है जो कि उनके वैवाहिक जीवन के लिए काफी नुकसानदायक होता है।

 

कुछ रिश्तें हमे जन्म के साथ ही प्राप्त होते है जिनमें हम चाहकर भी परिवर्तन नहीं कर सकते। जैसे माता-पिता, भाई बहन इत्यादी। किंतु जो रिश्ते जीवन के दौरान बनते है उनमें हमें चुनाव की स्वतंत्रता होती है

जैसे पति पत्नी, बहु, दामाद, मित्र, सखा, संबंधी इसी तरह शादी ब्याह ऐसा ही एक संबंध है जिसमें हम चुनाव कर सकते है। आयु, परिवार, जाति, राज्य सभी मामलों में नियम न होने के बाद भी हम समाज द्वारा बनाये गए नियमों पर ही चलते आ रहे है।

जिसमें तय है विवाह अपनी जाति में हो, बराबर के परिवार में हो, पति उम्र में बड़ा हो और दोनों की समाजिक और आर्थिक स्थिति में ज्यादा अंतर न हो। बदलते परिवेश में समय के साथ साथ इन मान्यताओं पर ध्यान तो दिया जाता है परंतु पालन नहीं।

अब लड़के लड़कियां अपनी पसंद और इच्छानुसार शादी विवाह करने लगे तो जाति, धर्म, आयु, गोत्र, परिवार के बंधन भी ढीले पड़ने लगे है। दरअसल जब दिल का मामला हो तो फिर अन्य सारी बातें गौण हो जाती है।

ऐसे कई मामलों में लड़कियां उम्र में अपने से छोटे लड़के से शादी कर लेती है। कुछ जोड़े तो उम्र भर सफलता पूर्वक साथ निभाते है। परंतु कुछ मामलों में ये सफर दो चार कदम चल कर अलग राह पकड़ लेता है। हमारे समाज में विवाह मात्र दो प्राणियों का मिलन न होकर दो परिवारों का समन्वय होता है। जहां परिवार की मर्यादा बचाए रखने के लिए कई बार लोग न चाहते हुए भी मजबूरन एक दूसरे से निभा लेते है। ऐसी स्थिति में पति पत्नी के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों से भी परिपक्वता की उम्मीद की जाती है।

आमतौर पर स्त्री, पुरूष की अपेक्षा अधिक सहनशील और परिपक्व मानी जाती है। इसी कारण आमतौर पर वर वधु से अधिक उम्र का ही ढूंढा जाता है यही परंपरा बन गयी है कि विवाहिक जीवन के सुख पूर्ण होने के लिए पति को पत्नी से उम्र में बड़ा होना चाहिए।

एक समय था जब बालविवाह कर दिए जाते थे, कुलीन परिवार में कन्या का विवाह करने की चाह में बेमेल विवाह भी कर दिए जाते थे। कई बार तो मात्र तेरह व चौदह वर्ष की कन्या का विवाह उसके पिता की आयु के बराबर व्यक्ति से कर दिया जाता था।

पत्नी जब यौवन की दहलिज पर पहुंचती पति के पैर कब्र में पहुंचने लगते। समय के साथ परिवर्तन आए और स्त्रियों को स्वतंत्रता जागी। वैचारिक स्वतंत्रता प्रमुख थी उसमें। अब वे शादी विवाह के मामले में मुखर हो गई थी। यदि कोई युवती अपने से छोटे उम्र के युवक को पति बनाना चाहे तो कोई समाज का बंधन या कानून का बंधन उसे नहीं रोक सकता।

वैवाहिक मतभेद तो समान आयु वाले जोड़ों में या पत्नी के छोटी उम्र के हाने पर भी होते हैं, फिर उम्र का फासला इतना महत्वपूर्ण क्यों हो?

समय के साथ-साथ शिक्षा का प्रचार होने से स्त्रियां जागरूक हुई हैं। अधिकांश छोटी उम्र में घर बसा कर पति और बच्चों में व्यस्त होने के बजाय कैरियर बनाने को प्राथमिकता देने लगी हैं।

घर परिवार में उनका निर्णय भी महत्व रखने लगा है। जिसके चलते वैवाहिक संबंधो में उम्र की दूरियां भी घटने लगी हैं। कुछ साल का ही अंतर रह गया है पति पत्नी के बीच, कभी कभी एकाध साल या कभी तो लगभग समान आयु वालों में भी संबंध होने लगे हैं।

अब विवाह संबंध के लिए पति का उम्र में बड़ा होना अति आवश्यक नहीं माना जाता बल्कि बहुस सी जोड़ियों में पति कम उम्र के भी होते है और पत्नी उम्र में उनसे बड़ी। समाज शास्त्रियों के अनुसार लड़कियां जल्दी परिपक्व और समझदार हो जाती है। जबकि लड़कों को विकसित होने में कुछ देर लगता है।

यह भी एक कारण है कि विवाहित युगल में लडके की उम्र अधिक होना समाज की दृष्टि में ठीक माना जाता है। यही कारण है कि कानूनन भी लडकियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु अठारह वर्ष है और लड़कों के लिए इक्कीस वर्ष। मगर आज की सोच के अनुसार उम्र बड़ी या छोटी होना समझदारी का पैमाना नहीं है।

 

कहा भी गया है कि अक्ल का होता नहीं है वास्ता कुछ उम्र से, अगर नहीं आती तो सौ बरस तक भी नहीं आती। अब तो शादी ब्याह दिल का मामला हो गया है। जिस पर दिल आ जाए उसी से शादी की जाएं। लड़कियों का अपने से कम उम्र के लड़के से शादी का प्रचलन नया नहीं है, इससे पहले भी यह होता आया है और ऐसी शादियां सफल भी हुई है। व्यवाहिक जीवन के लिए जो बात मायने रखती है वह है अंडरस्टैडिंग । हर सिक्के के दो पहलू होते है। कई बार पति के उम्र में छोटे होने पर समस्याएं खड़ी हो जाती है

 जैसे – जिम्मेदारियों के बोझ से पत्नी की उम्र कुछ वक्त बाद परिपक्वता के चलते बड़ी दिखने लगती है और दूसरी तरफ पति देव की उम्र बढ़ने के साथ उसमें रंगीन मिजाजी चरम सीमा पे पहुंच जाती है। उसकी दिलचस्पी कम उम्र की लड़कियों की तरफ बढ़ने लगती है।

अपनी पत्नी प्रौढ़ा लगने लगती है। ऐसे में प्यार सामिप्य कम होने लगता है और रिश्तों में विरोधाभास बढ़ता चला जाता है। कोई भी परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चले तो वह वैचारिक सत्वता बन जाती है। जिसे तोड़ना समाज में उथल पुथल को जन्म देता है। विवाह में भी इसी लिए पुरूष को बड़ा होना माननीय है क्योंकि लीक से हटकर किए गए फैसले दंपति में फासले ही लाएंगे।

हमारे पूर्वजों ने जो नियम बनाएं उन में वैज्ञानिक सोच भी शामिल थी। नियम तो यही है कि लड़के और लड़की की उम्र में दो पांच साल का फासला होना ही आदर्श अंतर है।

क्यूंकि लड़कियां अपने अचेतन पति में पिता का सामर्थ्य खोजती है जो उन्हें छोटी उम्र की पति में नहीं मिलता और लड़के पत्नी में मां की छवि अपेक्षा करते है। यानि सहचर्या के साथ ममता भी चाहते है।

आज पति का उम्र में पत्नी से छोटा होना कोई समस्या नहीं लगता कुछ समय से यह चलन बढ़ा है, दोनो तरफ से वफादारी और प्रेम से इस रिश्ते को सिंचा जाएं तो छोटे उम्र का पति भी सफल पति साबित होगा, बड़ी उम्र की पत्नी भी पति की प्रिय बनी रहेगी।

उम्र का अंतर पृष्ठभूमि की भिन्नता तथा यहां तक की कुछ मामलों में वैचारिक मतभेद भी उनके सुखद वैवाहिक जीवन में अर्चन नहीं बन पांए।

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