दी फिल्मों में नायकों की स्थापित छवि को तोड़ने वाले ‘बागी स्टार’ शम्मी कपूर उन अभिनेताओं में थे जिन्होंने न सिर्फ पर्दे पर नायकों को तमाम बंधनों से मुक्त कर दिया बल्कि अपनी अभिनय शैली खासकर गानों के साथ बदलाव की नयी बयार ले कर आए जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया।

शम्मी कपूर ने नायकों की स्थापित छवि को न सिर्फ खारिज कर दिया बल्कि अपनी अभिनय शैली में एक ताजगी भी पेश की, जिसे दर्शकों खासकर युवाओं ने खूब पसंद किया। शम्मी कपूर के रूप में हिंदी सिनेमा को एक ऐसा कलाकार मिला, जिसके किरदार में जोश, शरारत, चुलबुलापन होने के साथ साथ बगावती तेवर भी थे। उस समय के नायकों की छवि के विपरीत उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जो मुश्किलों का सामना करता था और समाज की रूढियों को दरकिनार करते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचने का प्रयास करता था। आकर्षक व्यक्तित्व के धनी शम्मी कपूर का पर्दे पर विद्रोही तेवर देखते ही बनता था। अपने समकालीन अभिनेताओं से अलग अंदाज के साथ वह एक ऐसे नायक के रूप में सामने आए जो जीवन से भरा था। गानों में तो उनका उत्साह देखते ही बनता है। राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद की तिकड़ी के बीच अपनी अलग छवि बनाना आसान नहीं था लेकिन शम्मी कपूर ने अपनी अलग शैली विकसित की जो उन सबसे अलग थी और उनकी कई फिल्मों ने बॉक्स आफिस पर जुबली मनायी।

कार ड्राइविंग, फैशन और इंटरनेट में विशेष दिलचस्पी रखने वाले शम्मी कपूर के अभिनय की शुरूआत पृथ्वी थियेटर से हुयी थी। उनकी पहली फिल्म जीवन ज्योति थी जो सफल नहीं रही। उनके लिए फिल्मों का शुरूआती सफर आसान नहीं रहा और उनकी कई प्रारंभिक फिल्में नाकामयाब रहीं। शम्मी कपूर को एक साथ दो चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। एक ओर उन्हें फिल्मी दुनिया में अपने पैर जमाने थे वहीं पिता पृथ्वीराज कपूर और बड़े भाई राज कपूर से अपनी अलग पहचान भी बनानी थी।

संघर्ष के दिनों में उन्होंने गीता बाली से शादी कर ली थी। गीता बाली ने उन्हें काफी प्रोत्साहन दिया और अंतत: नासिर हुसैन की फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ को भारी कामयाबी मिली। इस फिल्म के गाने भी खूब पसंद किए गए। इस फिल्म की कामयाबी शम्मी कपूर के करियर के लिए महत्वपूर्ण साबित हुयी। 1957 में प्रदर्शित इस फिल्म से शुरू नायक शम्मी कपूर का सफर करीब 15 साल तक जारी रहा और इस दौरान उन्होंने दिल देके देखो, जंगली, दिल तेरा दीवाना, प्रोफेसर, चाइना टाउन, राजकुमार, कश्मीर की कली, जानवर, तीसरी मंजिल, ब्रह्मचारी, अंदाज आदि फिल्मों से दर्शकों को खूब रोमांचित किया। जिस प्रकार राज कपूर के गाने मुख्य रूप से मुकेश की आवाज में होते थे, उसी प्रकार शम्मी कपूर के लिए अधिकतर गाने मोहम्मद रफी ने गाए। रफी की आवाज, शंकर जयकिशन का संगीत और शम्मी कपूर की अदाकारी को सिनेप्रेमियों ने हाथोंहाथ लिया। उनके कई गाने आज भी खूब पसंद किए जाते हैं।

शम्मी कपूर को संगीत और धुन की अच्छी समझ थी और वह अपने गीतों को लेकर काफी सजग रहते। गीतों के चयन, उसके संगीत से लेकर उसके फिल्मांकन तक में वह दिलचस्पी रखते थे। रफी भी शम्मी कपूर के गानों के लिए अलग से तैयारी करते और उनकी अदाओं के हिसाब से अपने को ढाल लेते। उम्र के साथ वजन बढने पर शम्मी कपूर ने चरित्र भूमिकाएं शुरू कर दी।

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बतौर चरित्र अभिनेता उन्होंने विधाता, प्रेम रोग, हीरो, बेताब, अजूबा, हुकूमत, तहलका जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया। शम्मी कपूर लोकप्रिय अभिनेता होने के साथ साथ हरदिल अजीज इंसान भी थे। निधन से पूर्व उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने अपनी जिंदगी किसी ‘प्रिंस’ की तरह जिया जिसका मौका कम ही लोगों को मिल पाता है।

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