नदी क्यो रोटी है

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बादशाह अकबर अक्सर यमुना नदी के तट पर शाम को समय बहने वाली सुखद वायु का आनंद उठाने निकल पड़ते थे। वे कभी बीरबल को साथ ले जाना नहीं भूलते थे। ऐसे ही एक दिन अकबर और बीरबल यमुना तट पर भ्रमण कर रहे थे। नदी का पानी कलकल करता हुआ बह रहा था। परंतु अकबर को ऐसा लगा कि इस प्रकार से नदी मानो रो रही है।

उन्होंने बीरबल से पूछा, ‘बीरबल, क्या तुम बता सकते हो कि नदी हर समय रोती क्यों रहती है?’

बीरबल के पास तो हर समस्या का हल रहता था। उन्होंने तुरंत जवाब दिया, ‘जहांपनाह, नदी अपने पिता अर्थात् पहाड़ को छोड़कर अपने पति समंदर के पास जाती है। उसे अपने पिता से जुदा होने का बहुत अफसोस है, बस इसी वजह से वह हमेशा रोती रहती है।’

बीरबल का जवाब सुनकर बादशाह अकबर बडे खुश हुए। वे बीरबल की तारीफ करते हुए बोले, ‘तुम्हारे पास तो हर सवाल का जवाब रहता है, बीरबल। ये मुगल सल्तनत की खुशनसीबी है कि उसके पास तुम्हारे जैसा नायाब रत्न है। सच तो यह है कि हमारे पास तुम्हारी तारीफ के लिए शब्द ही नहीं हैं।’

 

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