जीवन का संघर्ष

0
84

जो बताती है की व्यक्ति के जीवन मे संघर्ष बहुत मायने रखता है। बिना संघर्ष के पायी हुई वस्तुओ मे ज्यादा खुशी नहीं मिलती जितनी कड़े संघर्ष को करने के बाद मिलती है. ये कहानी बताती है की भगवान ने संघर्ष को प्राणी जीवन मे इसलिए इतना महत्वपूर्ण बनाया है ताकि प्राणी कठिन परिस्थितियो का सफलता पूर्वक सामना करके जीवन मे ओर निखार ला सके। बिना मेहनत और संघर्ष के प्राणी का जीवन अपंग के समान हो सकता है और अगर सही समय पर जीवन मे संघर्ष न किया गया तो शेष जीवन निरर्थक बन सकता है। ये कहानी है एक तितली की। तितली की कोकून से निकलने की प्रक्रिया अति संघर्षपूर्ण होती है। अगर वह बिना संघर्ष किए ही कोकून से बाहर आ जाए तो उसे शेष जीवन अपंग के रूप मे बिताना पड़ता है क्योकि कोकून से निकलने के दौरान वह बहुत संघर्ष करती है जिससे उसके शरीर मे मौजूद तरल उसके पंखो तक पहुँच पाता है, जिससे वह उड़ पाती है।
एक दिन की बात है जब एक आदमी बाग मे घूम रहा था वही उसे तीतली का कोकून दिखाई पढ़ता है, तब से वो आदमी रोज उस कोकून को देखता है। एक दिन वह देखता है की उस कोकून मे छोटा सा छेद बन गया है। वह कोकून के पास बैठ जाता है और उसे ध्यान से देखता रहता है। कुछ देर बाद वह देखता है की उस कोकून मे एक छोटा सा छेद बन गया है। फिर वह देखता है की तितली उस छेद से बाहर आने का प्रयास कर रही है। कई देर तक प्रयास करने के बाद भी जब वह उस छेद से बाहर नहीं आ पा रही थी और बिलकुल शांत हो गयी थी। उसने सोचा की तितली ने हार मान ली है अत: उसने सोचा की वह उसकी कुछ मदद कर दे। उसने एक कैंची से उस कोकून के छेद को थोड़ा और बड़ा कर दिया और तितली उसमे से बाहर निकाल आई। पर उसने देखा की उसका शरीर सूजा हुआ है और पंख सूखे हुए है। आदमी ने सोचा की तितली उड़ेगी पर ऐसा न हो सका। दरअसल वह बिना संघर्ष के ही उस कोकून से बाहर निकल आई जिससे उसके शरीर का तरल उस तक ना पाहुच सका और वह अपंग हो गयी।
 
प्राणी के जीवन मे संघर्ष का बहुत महत्व है। बिना संघर्ष के वह उड़ना नहीं सीख पाएगा, कहने का मतलब है की अगर वह कुछ पाने के लिए मेहनत और संघर्ष नहीं करेगा तो वह बेकार हो जाएगा। और कठिन परिस्थितियो का सामना नहीं कर पाएगा। यहा इस व्यक्ति से भी सीख लेने की जरूरत है जो तितली के साहयता करके उसका काम आसान करना चाहता था। कई बार हम किसी की मदद कर उस इंसान को उसकी काबिलियत को पहचानने और
जो बताती है की व्यक्ति के जीवन मे संघर्ष बहुत मायने रखता है। बिना संघर्ष के पायी हुई वस्तुओ मे ज्यादा खुशी नहीं मिलती जितनी कड़े संघर्ष को करने के बाद मिलती है. ये कहानी बताती है की भगवान ने संघर्ष को प्राणी जीवन मे इसलिए इतना महत्वपूर्ण बनाया है ताकि प्राणी कठिन परिस्थितियो का सफलता पूर्वक सामना करके जीवन मे ओर निखार ला सके। बिना मेहनत और संघर्ष के प्राणी का जीवन अपंग के समान हो सकता है और अगर सही समय पर जीवन मे संघर्ष न किया गया तो शेष जीवन निरर्थक बन सकता है। ये कहानी है एक तितली की। तितली की कोकून से निकलने की प्रक्रिया अति संघर्षपूर्ण होती है। अगर वह बिना संघर्ष किए ही कोकून से बाहर आ जाए तो उसे शेष जीवन अपंग के रूप मे बिताना पड़ता है क्योकि कोकून से निकलने के दौरान वह बहुत संघर्ष करती है जिससे उसके शरीर मे मौजूद तरल उसके पंखो तक पहुँच पाता है, जिससे वह उड़ पाती है।
एक दिन की बात है जब एक आदमी बाग मे घूम रहा था वही उसे तीतली का कोकून दिखाई पढ़ता है, तब से वो आदमी रोज उस कोकून को देखता है। एक दिन वह देखता है की उस कोकून मे छोटा सा छेद बन गया है। वह कोकून के पास बैठ जाता है और उसे ध्यान से देखता रहता है। कुछ देर बाद वह देखता है की उस कोकून मे एक छोटा सा छेद बन गया है। फिर वह देखता है की तितली उस छेद से बाहर आने का प्रयास कर रही है। कई देर तक प्रयास करने के बाद भी जब वह उस छेद से बाहर नहीं आ पा रही थी और बिलकुल शांत हो गयी थी। उसने सोचा की तितली ने हार मान ली है अत: उसने सोचा की वह उसकी कुछ मदद कर दे। उसने एक कैंची से उस कोकून के छेद को थोड़ा और बड़ा कर दिया और तितली उसमे से बाहर निकाल आई। पर उसने देखा की उसका शरीर सूजा हुआ है और पंख सूखे हुए है। आदमी ने सोचा की तितली उड़ेगी पर ऐसा न हो सका। दरअसल वह बिना संघर्ष के ही उस कोकून से बाहर निकल आई जिससे उसके शरीर का तरल उस तक ना पाहुच सका और वह अपंग हो गयी।
 
प्राणी के जीवन मे संघर्ष का बहुत महत्व है। बिना संघर्ष के वह उड़ना नहीं सीख पाएगा, कहने का मतलब है की अगर वह कुछ पाने के लिए मेहनत और संघर्ष नहीं करेगा तो वह बेकार हो जाएगा। और कठिन परिस्थितियो का सामना नहीं कर पाएगा। यहा इस व्यक्ति से भी सीख लेने की जरूरत है जो तितली के साहयता करके उसका काम आसान करना चाहता था। कई बार हम किसी की मदद कर उस इंसान को उसकी काबिलियत को पहचानने और

Loading...

LEAVE A REPLY