सोया में कईी पोषक तत्वऔ होते हैं। यह प्रोटीन का उच्ची स्रोत तो होता ही है साथ ही फाइबर और कैल्शियम भी इसमें पर्याप्तक मात्रा में पाये जाते हैं। सोयाबीन में 52 प्रतिशत प्रोटीन तथा 19.5 प्रतिशत वसा होता है। इसके अलावा इसमें आयरन और फॉस्फोरस आदि खनिज तत्व भी पाये जाते हैं। सोयाबीन महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से युक्त है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और बहुत सारे विटामिन बी कॉम्पलेक्स पाये जाते हैं। आधा कप उबले सोयाबीन खाने से आप तकरीबन 44 प्रतिशत आयरन प्राप्त करते हैं (यानी आपकी दैनिक जरूरत पूरी हो जाती है)। साथ ही आपको कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक, थाइमाइन,निआकिन, राइबोफ्लेविन और विटामिन बी6 की सही मात्रा प्राप्त होगी।

सोया के अन्य गुण –

  1. दिन में एक बार सोयाबीन के आटे से बनी चपाती खाने से पेट साफ रहता है और एसिडिटी दूर हो जाती है।
  2. सोयाबीन परिवार के लिए एक उत्तम आहार है। खासतौर पर बढ़ते हुए बच्चों के लिए, बूढ़े व्यक्तियों, मधुमेह और मोटापा घटाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
  3. कमजोरी होने पर अंकुरित सोयाबीन चबाने और उसके साथ सोयाबीन से बना आहार खाने से कमजोरी दूर हो जाती है।
  4. सोयाबीन शरीर का विकास करने वाले प्रोटीनों एवं कुदरती खनिज पदार्थो से भरपूर है।
  5. डायबिटीज के रोगियों के लिए सोयाबीन के आटे का उपयोग फायदेमंद होता है।
  6. जो माताएं बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं उन्हें सोयाबीन का सेवन खूब करना चाहिए।
  7. सोयाबीन अथवा सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थों में आइसोफ्लेवोन नामक फाइटोरसायन उपस्थित होते हैं। इन रसायनों के विभिन्न महत्व पाए गए हैं। वे शरीर में कैंसर के प्रतिरोधक का कार्य भी करते हैं, खासतौर पर स्तन व प्रोस्ट्रेट कैंसर में। महिलाओं में 45 से 50 वर्ष की आयु के पश्चात रजोनिवृत्ति (मोनीपॉज) की समस्या प्रारंभ हो जाती है। जिसके लक्षण हैं एक दम से रात में पसीना आना, चिड़चिड़ापन होना, मुँह का लाल व गर्म हो जाना इत्यादि। पचास ग्राम सोयाबीन प्रतिदिन के हिसाब से उपयोग में लाने पर महिलाएँ इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
  8. सोयाबीन अथवा सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थों में आइसोफ्लेवोन नामक फाइटोरसायन उपस्थित होते हैं। इन रसायनों के विभिन्न महत्व पाए गए हैं। वे शरीर में कैंसर के प्रतिरोधक का कार्य भी करते हैं, खासतौर पर स्तन व प्रोस्ट्रेट कैंसर में। महिलाओं में 45 से 50 वर्ष की आयु के पश्चात रजोनिवृत्ति (मोनीपॉज) की समस्या प्रारंभ हो जाती है। जिसके लक्षण हैं एक दम से रात में पसीना आना, चिड़चिड़ापन होना, मुँह का लाल व गर्म हो जाना इत्यादि। पचास ग्राम सोयाबीन प्रतिदिन के हिसाब से उपयोग में लाने पर महिलाएँ इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
  9. सोयाबीन अथवा सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थों का ग्लोसेमिक इन्डेक्स (कर्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलने की क्षमता) अन्य खाद्य पदार्थों में सबसे कम है। जिसके कारण इससे बने खाद्य पदार्थ कोलेस्ट्रोल रहित होते हैं तथा इसकी वसा में पाली अनसेचुरेटिंड वसीय अम्लों की मात्रा अधिक पाई जाती है, अतः इसे हृदय रोगियों के लिए अच्छा माना गया है।.

सोया दूध कैसे बनाए :-

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सोयाबीन को साफ कीजिये, धोइये और रात भर या 8 से 12 घंटे के लिये भीगने दीजिये. सोयाबीन से पानी निकाल दीजिये, सोयाबीन को प्याले में डालिये, ढककर 2 मिनिट के लिये माइक्रोवेव में रख दीजिये. दूसरा तरीका उबलते पानी में डालिये और ढककर 5 मिनिट के लिये रख दीजिये, इस तरह से सोयाबीन्स की महक कम हो जायेगी और सोयाबीन के छिलके उतारने में आसानी रहेगी.

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सोयाबीन के गरम किये गये दानों को हाथ से मलिये और छिलके अलग कर दीजिये, अब सोयाबीन को पानी में डालिये और छिलके तैरा कर हाथ से निकाल दीजिये.

आप चाहे तो सोयाबीन के छिलके सहित ही दूध बना सकते हैं लेकिन बिना छिलके के सोयाबीन का दूध अधिक स्वादिष्ट होता है और इसका पल्प (Okara) भी अधिक अच्छा निकलता है.

छिलके रहित सोयाबीन को मिक्सर में डालिये, पानी डाल कर एकदम बारीक पीस लीजिये. पिसे मिश्रण में 1 लीटर पानी डालिये और मिक्सर चला कर अच्छी तरह मिक्स कर दीजिये.

दूध को गरम करने के लिये आग पर रख दीजिये, दूध के ऊपर जो झाग दिखाई दे रहे हैं उनको चमचे से निकाल कर हटा दीजिये. दूध उबालते समय थोड़ी थोड़ी देर में चमचे से चलाते रहिये. दूध में उबाल आने के बाद 5-10 मिनिट तक सोयाबीन दूध को उबलने दीजिये. आग बन्द कर दीजिये.

अब इस उबले हुये दूध को को साफ कपड़े में डालकर अच्छी तरह छान लीजिये. छानने के बाद जो ठोस पदार्थ सोयाबीन पल्प (Okara) कपड़े में रह गया है उसे किसी अलग प्याले में रख लीजिये,

सोयाबीन का दूध तैयार है. दूध को ठंडा होने दीजिये. सोयाबीन के दूध को आप अब पीने के काम में ला सकते हैं, सोयाबीन का दूध फ्रिज में रखकर 3 दिन तक काम में लाया जा सकता है. आप सोया मिल्क को सामान्य मिल्क की तरह से पी सकते हैं या फलों के साथ इसका शेक भी बना सकते हैं. सोया दूध बनाने से निकली हुई सोयाबीन पल्प (Okara) को आटे में मिलाकर रोटी भी बना सकते है | सोयाबीन पल्प (Okara) में आलू और ब्रेड के टुकड़े मिलाकर सोयाबीन कटलेट बनाकर भी खाये जा सकते हैं.

सोया पनीर (Tofu Paneer) बनाने की विधि :-

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पहली बार इसका स्वाद आपको थोड़ा अलग लगेगा. लेकिन पांच छह बार खाने के बाद इसे बार बार खाना चाहेंगे. आईये आज सोयादूध से टोफू बनायें.

आवश्यक सामग्री – सोयाबीन दूध – 2 लीटर, 2-3 नीबू |

सोयमिल्क उबल जाय तो तो इसे आग से नीचे उतार लीजिये.

टाटरी को कूट कर 1/4 कप गुनगुने पानी मै डालकर घोल लीजिये. तब तक सोयमिल्क (Soymilk) का तापमान टोफू बनाने के तापमान (70- 80 डिग्री) पर आ चुका होता है.

नीबू का रस दूध में डालिये और चमचे को चला कर मिला दीजिये, चमचे को दूध में ज्यादा मत घुमाइये, जैसे ही दूध फटना शुरू हो जाय, नीबू का रस डालना बन्द कर दीजिये. दूध अपने आप 10-15 मिनिट के अन्दर फटकर (coagulate) हो कर पानी से अलग होने लगता है. यदि अभी दूध अच्छी तरह नहीं फटा तो थोड़ा और नीबू का रस डाला जा सकता है. इस फटे दूध को तुरन्त छान लीजिए. अगर इस दूध को हम अधिक देर तक इसी अवस्था में छोड़कर रखेंगे तो टोफू मुलायम नहीं बनेगा. दूध और पानी अलग हो जायं तब चलनी किसी बर्तन के ऊपर रखकर साफ अच्छा मजबूत कपड़ा गीला करके चलनी के ऊपर बिछाइये और फाड़े गये दूध को कपड़े के ऊपर डालिये. दूध से पानी निकल कर कपड़े के नीचे पहुंच जाता है और टोफू कपड़े के ऊपर रह जाता है.

टोफू को कपड़े में बांध कर पानी को निकाल दीजिये, अब और अधिक पानी निकालने के लिये कपड़े में बधे टोफू को किसी भारी चीज से दबा कर रख दीजिये.

बहुत ही अच्छा और मुलायम टोफू 30-40 मिनट के बाद कपड़े के अन्दर जमा हुआ मिला जायेगा, इस टोफू से आप सब्जियां बनायें या थोड़ा सा तेल डालकर नानस्टिक कढ़ाई में सेक कर मसाला छिड़क कर बच्चों को खाने दीजिये, ये टोफू तो खाने में पनीर से भी अधिक स्वादिष्ट लगता है.

अगर आप टोफू (Tofu) को अभी काम में ला रहे हैं तब तो ठीक है, अगर आप इसे रखना चाहते हैं तो पीने के पानी में डुबा कर फ्रिज में रखिये. रोजाना पानी बदल दीजिये. आप ये टोफू इस तरह 7 दिन तक स्तेमाल कर सकते हैं.

 

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