आप कानूनी तरीके से करोड़ों रुपये कमा सकते हैं, लेकिन अब यह टैक्स फ्री नहीं है. इस बार बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस पर टैक्स लगा दिया है. 

कम  निवेश करके  करोड़पति बनने का सपना सभी का होता है. ज़्यादातर  लोग, मुख्य रूप से  नौकरीपेशा, यह चाहते हैं कि रिटायरमेंट तक करोड़पति बन जाए .

लेकिन वास्तव में ऐसा कोई तरीका नहीं होता, जिसमें कुछ हज़ार रुपये का निवेश हमें करोड़ों रुपये कमा कर दे सके. अगर कुछ ऐसा होगा भी, तो हाथ आने वाले करोड़ों रुपये पर टैक्स देना पड़ेगा, और रकम फिर कम हो जाएगी. आप कानूनी तरीके से करोड़ों रुपये कमा सकते हैं, लेकिन अब यह टैक्स फ्री नहीं है.. 

 

म्यूचुअल इक्विटी फंड, जिसमें 20 साल तक सिर्फ 5,000 रुपये मासिक (यानी कुल 12 लाख रुपये) का निवेश करने से भी आप हासिल कर सकते हैं 2.38 करोड़ रुपये. देश में कुछ म्यूचुअल इक्विटी फंड ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले 20 साल के दौरान बिल्कुल इसी तरह का रिटर्न अपने ग्राहकों को दिया है…

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 इन म्यूचुअल इक्विटी फंडों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप – SIP) के द्वारा लम्बे समय तक निवेश करते रहने से आप अच्छी कमाई हो सकती हैं.  बैंकों में सभी तरह की ब्याज़ दरें, यानी बचत खाता (सेविंग्स एकाउंट), सावधि जमा खाता (एफडी), आवर्ती जमा खाता (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज की दरें लगातार कम होती जा रही हैं,

 इसलिए सिप (SIP) के द्वारा डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड में निवेश बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है.

 

2.38 करोड़ रुपये तक कमा सकते है. ऐसे पांच म्यूचुअल इक्विटी फंडों के बारे में बताया जा रहा है. इन फंड ने पिछले 20 या उससे भी ज़्यादा सालों में लगातार 20 फीसदी से ज़्यादा सीएजीआर (कम्पाउंड एनुअल ग्रोथ रेट या चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) रिटर्न दिया है.

 

 

25.11 फीसदी रहा, यानी अगर आपने इस म्यूचुअल फंड में 1 अप्रैल, 1998 को 5,000 रुपये महीने  के हिसाब से निवेश किया होता, तो 1 अप्रैल, 2017 को आपके खाते में 2.38 करोड़ रुपये जमा होते हैं. 2018 में यह और बढ़ गया होता .

 

पिछले 20 साल के दौरान रिटर्न के हिसाब से दूसरे नंबर पर है ‘रिलायंस ग्रोथ फंड’. अगर आपने 1 अप्रैल, 1998 को इस फंड में 5,000 रुपये मासिक का निवेश करना शुरू किया होता, तो 1 अप्रैल, 2017 को 2.12 करोड़ रुपये का रिटर्न आपको मिल चुका होता, मतलब निवेश की गई मूल राशि का 17.66 गुना.

 

तीसरे नंबर पर है ‘एचडीएफसी इक्विटी फंड’, पिछले 20 साल में जिसका सीएजीआर 23.56 प्रतिशत रहा है. मतलब  अगर आपने 1 अप्रैल, 1998 से इस फंड में सिप के ज़रिये 5,000 रुपये माहवार का निवेश करना शुरू किया होता, तो 1 अप्रैल, 2017 को आपके खाते में 1.95 करोड़ रुपये पड़े होते.

 

इसके बाद आता है ‘रिलायंस विज़न फंड’, जिसका सीएजीआर रिटर्न पिछले 20 वर्ष के दौरान 19.92 फीसदी रहा है… इस म्यूचुअल इक्विटी फंड में अगर आप 20 साल पहले 5,000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से निवेश करना शुरू करते, तो इसी महीने की पहली तारीख को आपके खाते में 1.46 करोड़ रुपये जमा होते.

 

देश में रिटर्न के मामले में पांचवें नंबर पर है ‘एचडीएफसी टॉप 200 फंड’, जिसका सीएजीआर रिटर्न शुरुआत से अब तक 20.88 फीसदी रहा है, और अगर इस फंड में ठीक 20 साल पहले आपने 5,000 रुपये मासिक का निवेश करना शुरू किया होता, तो आज आपका फंड 1.43 करोड़ रुपये का होता.

 

अभी तक इस पैसे पर कोई टैक्स नहीं था. लेकिन इस बार बजट में  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस पर टैक्स लगा दिया है. वित्तवर्ष 2018-19 के आम बजट में केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में म्यूचुअल फंड भी ला दिए,

और अब इनकम टैक्स कटौती के बाद हाथ आने वाली अपनी तनख्वाह में से टैक्स-फ्री निवेश के विकल्प और भी घट गए हैं… आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये तक की छूट में अब सिर्फ दो ही स्कीम ऐसी रह गई हैं,

जिनमें निवेश करने पर आप मैच्योरिटी के वक्त किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देंगे… इनमें से एक है सुकन्या समृद्धि योजना तथा दूसरी है पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ या लोक भविष्य निधि)…

 

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सभी चित्र गूगल से लिया गया है

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