*नदी जब निकलती है,*
*कोई नक्‍शा पास नहीं होता कि “सागर” कहां है*

*बिना नक्‍शे के सागर तक पहुंच जाती है।*
*ऐसा नहीँ है कि नदी कुछ नहीँ करती है।*
*उसको “सागर” तक पहुंचने के लिए लगातार “बहना” अर्थात “कर्म” करना पड़ता है।*

*इसलिए “कर्म” करते रहिये,*
*नक्शा तो भगवान् पहले ही बनाकर बैठे है ।*
*हमको तो सिर्फ “बहना” ही है ।।*

कभी कभी लगता है,
औरत होना एक सजा है.
ना पढ़े तो अनपढ़, जाहिल
पढ़ ले तो पढ़ाई का घमंड है.
शादी ना करे तो
बदचलन नकचढ़ी है
कर ले तो अब आया
ऊँट पहाड़ के नीचे
सबसे मिल कर रहे तो
चालाक , मिल कर ना रहे तो घमंडी,
पढ़ लिख कर घर रहे तो
क्यों इतने साल और पैसे खोए
नौकरी करे, तो पर निकल आए
नौकरी का घमंड है
सहकर्मियों से बात करे
तो चलता पुर्जा
ना करे तो
छोटी सोच वाली
बड़ा लंबा चिठ्ठा है साहब
क्या क्या कहें? अच्छा है कि चुप रहें.

3030463d81f9b3d4bb1a95f2a8515692

जब से परीक्षा वाली जिंदगी पूरी हुई है,

तब से जिंदगी की परीक्षा शुरु हो गई है..

आज मुझे एक नया अनुभव हुआ

अपने मोबाइल से अपना ही नंबर लगाकर देखा,

आवाज आयी

The Number You Have called Is Busy…..

फिर ध्यान आया किसी ने क्या खुब कहा है….

“औरो से मिलने मे दुनिया मस्त है पर,

खुद से मिलने की सारी लाइने व्यस्त है..

कोई नही देगा साथ तेरा यहॉं
हर कोई यहॉं खुद ही में मशगुल है

जिंदगी का बस एक ही ऊसुल है यहॉं,

तुझे गिरना भी खुद है
और संभलना भी खुद है.

ईसलिए दोस्तो हमेशा खुश रहो

fee67c693aaf8e27eb9f4281228f3e23

डिस्क्लेमर: इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय www.socialsandesh.in के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों .कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और social sandesh की उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं है ।

सभी चित्र गूगल से लिया गया है

Loading Facebook Comments ...

LEAVE A REPLY