कचरा बीनने वाले के बेटे ने पहले प्रयास में निकाला AIIMS एग्जाम,

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मध्य प्रदेश के देवास से लगभग 40 किलोमीटर दूर विजयागंज मंडी में रहने वाले आशाराम चौधरी ने एम्स की प्रवेश परीक्षा को  पहले प्रयास में क्लियर कर लिया. आशाराम चौधरी बेहद गरीब परिवार से आते हैं. उनके पिता पन्नी और खाली बोतलें बीनकर घर चलाते हैं. आशाराम ने ये मुकाम हासिल कर एक बार फिर साबित कर दिया है कि सफलता संसाधनों की मोहताज नहीं होती. आशाराम ने दो महीने पहले आयोजित हुई ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) की प्रवेश परीक्षा में  141वीं रैंक हासिल की है. उन्होंने जोधपुर के एम्स में एमबीबीएस में दाखिला ले लिया है.
परिवार के पास फीस भरने के नहीं थे पैसे
आशाराम के परिवार के पास फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे. आशाराम की कहानी चंदर भारद्वाज नाम के एक ट्विटर यूजर ने शेयर की. ट्वीट के कुछ ही देर में सीएम शिवराज ने रिप्लाई किया और उन्होंने देवास के कलेक्टर से तुरंत आर्थिक मदद उपलब्ध कराने को कहा. जिसके बाद देवास कलेक्टर श्रीकांत पांडे ने आशाराम को 25 हजार रुपए का चेक प्रदान किया.
कलेक्टर ने कहा कि आशाराम की मेडिकल पढ़ाई की फीस का खर्च राज्य शासन द्वारा वहन किया जाएगा. इसके साथ ही जिला प्रशासन द्वारा आशाराम के परिवार को विभिन्न योजनाओं में लाभान्वित भी किया जाएगा. उनके परिवार को पक्का मकान और शौचालय का लाभ दिया जाएगा.
सरकारी स्कूल से हुई शिक्षा
आशाराम की प्रारंभिक पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई है. आशाराम छठी में जवाहर नवोदय विद्यालय चंद्रकेशर में पहुंच गए. यहां दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद नि:शुल्क आवासीय स्कूल दक्षिणा फाउंडेशन पुणे की प्रवेश परीक्षा दी. आशाराम चुने गए और 11वीं-12वीं की परीक्षा उन्होंने यहीं से अच्छे अंकों के साथ पास की. जिसके बाद आशाराम मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में लगे रहे और फिर उन्होंने इसी साल मई में एम्स की प्रवेश परीक्षा पास की.

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