एक विवाहित बेटी का पत्र, उसकी माँ के नाम….

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माँ तुम बहुत याद आती हो:
माँ अब मेरी सुबह 6 बजे होती है,
और रात 12 बजे होती है ,
तब माँ तुम बहुत याद आती हो😑
सबको गरम गरम परोस्ती हूँ
और खुद ठंडा ही खा लेती हूँ
तब माँ तुम बहुत याद आती हो 😑
जब कोई बीमार पड़ता है तो
एक पैर पर उसकी सेवा में लग जाती हूँ
और जब मैं बीमार पड़ती हूँ
तो खुद ही अपना सेवा कर लेती हूँ
तब”माँ तुम बहुत याद आती हो 😑
जब रात में सब सोते हैं
बच्चों और पति को चादर।ओढ़ाना नहीं भूलती,
और खुद को चादर ओढ़ाने वाला नहीं,
तब”माँ तुम बहुत याद आती हो 😑
सबकी जरूरत पुरी करते करते,
खुद को भूल।जाती हूँ
खुद से मिलने वाला कोई नहीं,
तब”माँ तुम बहुत याद आती हो 😑
यही कहानी हर लड़की की शायद,
शादी के बाद हो जाती है,
कहने को तो हर आदमी शादी से पहले कहता है
“माँ की याद तुम्हें आने न दूॅगा”
पर फिर भी क्यों?
“माँ तुम बहुत याद आती हो 

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