एक नारी क्या सोचती है

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#भैया…
जब मैं रोती हूँ तो आप मुझे लाड लड़ाते हो, मेरे आँसू पोंछते हो, मेरी हर ज़ि्द पूरी करते हो, मेरे चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करते हो लेकिन जब भाभी रोते हैं तो आप क्यों मुँह दूसरी तरफ फेर लेते हैं ?आप क्यों नहीं अपनी पत्नी का साथ देते ?क्यों भाभी को अकेले छोड़ देते हो? सिर्फ इसी डर से कि कोई आपको यह ना कहे कि बीवी का गुलाम हो गया है।
#पापा….
आप सबसे कहते हैं कि बेटी हमेशा के लिए अपनी रहती हैै। आप की राजकुमारी हूँ मैं। फिर जब भाभी अपने मायके जाने की बात करते है तो आप क्यों रोकते हो उन्हें ?क्यों आप उनको बहु और पत्नी होने वास्ता देने लगते हो? क्या वो अपने पापा की बेटी नहीं ? शादी के बाद क्या एक बेटी की हत्या कर दी जाती है सिर्फ जिन्दा रहती है एक बहु और एक पत्नी? खुद की बेटी का तो ससुराल वहां ढूंढ़ते हो यहां वो जब दिल करे मिलने मायके आ सके और जब बहु का मन कर रहा होता है तो कहते हो मायके का मोह अब छोड़ दो ????
#माँ
जब मैं घर में किसी के लिए तोहफा लाती हूँ तो सब बहुत खुश होते हैं । लेकिन जब भाभी किसी के लिए तोहफा लाती है तो क्यों कहा जाता है कि बहु तुम क्या कूड़ा उठा कर ले आती हो। तुम्हारी पसंद बिलकुल भी अच्छी नहीं ऐसा दोहरा व्यवहार क्यों किया जाता है ? माँ जब हम एक दूसरे से गुस्सा होते तो बैठ कर एक दूजे के साथ बात करके अपना झगड़ा सुलझा लेते हैं। लेकिन भाभी से जब आप गुस्सा होते हो तो आप उनको सीधा बोलते हो कि इस घर और आपके मन में उनके लिए कोई जगह नहीं। क्यों माँ ?

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