आदमी और बाकी सब

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झुकी हुई औरत
गर्दन पर बाल खोलती है
दिख गए मर्द को देखती है
और अंदर भाग जाती है,
औरत जब मर्द देखती है
तो अंग छुपाती है
मर्द जब औरत को देखता है
तो सीना फुलाता है,
चिड़िया जब चिड़िया को देखती है
चहचहाती है,
मैंने पेड़ से पूछा
आप क्या करते हैं श्रीमान
आदमी को देख कर ?
मैं देखता हूँ
कुल्हाड़ी नहीं है न उसके पास
और आश्वस्त हो जाता हूँ।

परिचय

 
जन्म : 18 अगस्त 1946, बेलोही, महाराजगंज, उत्तर प्रदेश
भाषा : हिंदीविधाएँ : कविता, निबंध, आलोचना, लेख

मुख्य कृतियाँ

 
कविता संग्रह : एक शब्द उठाता हूँ, (दस्तावेज, साहित्य अमृत, पहल, भाषा आदि अनेक पत्र-पत्रिकाओं में हजारों की संख्या में कविताएँ प्रकाशित।)
निबंध संग्रह : ये शब्द इसी जनपद के हैं
आलोचना : स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता

संपर्क

 
नलिनी निवास, दाऊदपुर, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)

फोन

 
0551-2340419, 09450441227

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