आज का इंसा

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ये इंसा है केवल चमन देखता है,
सरेराह बेपर्दा तन देखता है।
 
हवस का पुजारी हुआ जा रहा है,
कली में भी कमसिन बदन देखता है।
 
जलालत की हद से गिरा इतना नीचे,
कि मय्यत पे बेहतर कफन देखता है।
 
भरी है दिमागों में क्या गंदगी सी,
ना माँ-बाप,भाई-बहन देखता है।
 
बुलंदी की ख्वाहिश में रिश्ते भुलाकर,
मुकद्दर का अपने वजन देखता है।
 
ख़ुदी में हुआ चूर इतना,कहें क्या,
पड़ोसी के घर को ‘रहन’ देखता है।
 
नहीं “तेज” तूफानों का खौफ़ रखता,
नहीं वक्त की ये चुभन देखता है।
 
हर इक शख्स इसको लगे दुश्मनों-सा,
फ़िजाओं में भी ये जलन देखता है।
 
हवस की हनक का हुनर इसमें उम्दा,
जमाने को खुद-सा नगन देखता है।
भगवान एक बच्चे से कहता है, जिसे अगले
दिन पैदा होना है 
.
बच्चे कल तुम्हे हमेशा के लिए’ धरती पर
जाना है 😊😊
.
बच्चा रोने लगता है ओर पूछता है कि मैने
वहा लोगो से कैसे बात करूँगा ? 😭😭
.
भगवान – मैने पहले ही धरती पर एक परी भेज दी है
जो तुम्हे सिखाएगी ☺☺
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बच्चा – मैं वहा जाकर तुम्हारी पूजा कैसे
करूँगा ? 😢😢
.
भगवान – वो परी तुम्हे ये सब सीखा देगी 😊😊
.
बच्चा – मैं अच्छे काम ओर अच्छे भाषा कैसे
सीखूंगा ? 😔😔
.
भगवान – इसमे भी वो परी ही तुम्हारी सहयता
करेगी 😉😉
.
बच्चा- अगर वहा मैं बीमार हो गया तो क्या
होगा ? 😞😞
.
भगवान – वो परी तुम्हारी देखभाल करेगी ,
तुम जो कह भी नही पाओगे वो समझ लेगी 😊😊
.
बच्चा – मैं उस परी को वहा ढूंढूंगा कैसे ? 😔😔
.
भगवान – बहुत आसान है , उस परी को वहा सब
“माँ” कहते है
😊 😊 😊 😊
💝👰💝
: न अपनों से खुलता है,
न ही गैरों से खुलता है.
ये जन्नत का दरवाज़ा है,
मेरे माता पिता के पैरो से खुलता है.!!..
😢😢👇👇
क्या गुजरी होगी उस बुढ़ी माँ के दिल पर जब उसकी बहु ने कहा -: माँ जी,आप अपना खाना बना लेना, मुझे और इन्हें आज एक पार्टी में जाना है ..!!
😢😢
बुढ़ी माँ ने कहा -: बेटी मुझे गैस चुल्हा चलाना नहीं आता ..!!😮
तो बेटे ने कहा -: माँ, पास वाले मंदिर में आज भंडारा है, तुम वहाँ चली जाओ ना खाना बनाने की कोई नौबत ही नहीं आयेगी..!!!😞😞
माँ चुपचाप अपनी चप्पल पहन कर मंदिर की ओर हो चली..
😔
यह पुरा वाक्या 10 साल का बेटा रोहन सुन रहा था | पार्टी में जाते वक्त रास्ते में रोहन ने अपने पापा से कहा -: पापा, मैं जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ना तब मैं भी अपना घर किसी मंदिर के पास ही बनाऊंगा ..!!!😲😲
माँ ने उत्सुकतावश पुछा -: क्यों बेटा ?
रोहन ने जो जवाब दिया उसे सुनकर उस बेटे और बहु का सिर शर्म से नीचे झुक गया जो अपनी माँ को मंदिर में छोड़ आए थे..😢😢
रोहन ने कहा -: क्योंकि माँ, जब मुझे भी किसी दिन ऐसी ही किसी पार्टी में जाना होगा तब तुम भी तो किसी मंदिर में भंडारे में खाना खाने जाओगी ना और मैं नहीं चाहता कि तुम्हें कहीं दूर के मंदिर में जाना पड़े..!!!!😞😞
पत्थर तब तक सलामत है जब तक वो पर्वत से जुड़ा है पत्ता तब तक सलामत है जब तक वो पेड़ से जुड़ा है इंसान तब तक सलामत है जब तक वो परिवार से जुड़ा है क्योंकि परिवार से अलग होकर आज़ादी तो मिल जाती है लेकिन संस्कार चले जाते हैं ..एक कब्र पर लिखा था.. किस को क्या इलज़ाम दूं दोस्तो…,जिन्दगी में सताने वाले भी अपने थे,और दफनाने वाले भी अपने थे

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