अधूरा प्यार-आशीष कुमार मिश्रा

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खुद को कमरे में बन्द रखे चाय के कप में अपने आँसुओ को गिरने से रोकता हुआ आदित्य 7 साल पुरानी बातो को सोच रहा था….

“वो देख,आरोही क्या गजब लग रही हैं ना..यार..!!”-सुनील ने उसे छेड़ते हुए कहा था।

“यार,ये इतना पढ़ कैसे लेती हैं..!!”साथ बैठे सचिन ने सोचने की मुद्रा में पूछा।

गले में गुलाबी चुन्नी डाले गहरी आँखे सुर्ख गुलाबी होंठ बड़े बड़े बालो से फुलो की पँखुडियो की तरह कोमल बाहर झाँकता उसका चेहरा किसी परी से कम नही लग रहा था.. ऊपर से बच्चो से खिलखिलाती मासूम सी हँसी…!

आदित्य चुप चाप बैठा बस उसे निहार रहा था।ये जानते हुए भी की आरोही को पता भी नही हैं की कोई उसके ख्यालो में दिन रात डूबा रहता हैं..!

क्लास छूटते ही पानी की टँकी के पास अपने दोस्तों के साथ खड़े आदित्य ने नील रंग की जीन्स की जैकट डाली हुई थी जो स्कूल के ड्रैस कोड के लिहाज से गलत थी.. पर उसे ये जैकेट बहुत पसन्द थी।

अपनी सहेलियों के साथ पानी पीने आई आरोही ने महसूस किया की आदित्य की नजर उसे ही घूर रही थी..!

अपने स्वभाव में रूखा पन लाते हुए आरोही अपनी सहेलियों को कहने लगे “ये लड़का रोज मुझे घूरता रहता हैं”

“हाँ देखा तो हम सबने भी हैं,पर….”

इससे पहले की श्वेता अपनी बात पूरी कर पाती नीलेश ने चुटकी लेते हुए कहा “तू भी घूर ले..”

हा हा हा हा हा…

ठहाकों में बदल गई उनकी बाते।।

और 2 साल कब गुजरे पता ही नही चला आदित्य कविताओ में अपनी भावनाये तो व्यक्त कर देता पर कभी कह नही पाया…!

और 12के फाइनल एग्जाम कब खत्म होने को आये पता ही नही चला।

आखिरी एग्जाम वाले दिन आदित्य ने एक फैसला किया की वो आज आरोही को अपने दिल की बात बोल कर रहेगा..!

साइकल से घर को लौटती हुई आरोही को अकेला पाकर हिम्मत जुटाते हुए आदित्य ने आरोही को पुकारा..”आरोही..”

उसकी आवाज में अजीब सा डर था।

जब आरोही ने कोई जवाब नही दिया तो अपनी आवाज को थोडा ऊँचा करके बोला आदित्य ने “सुनो,आरोही..!”

चेहरे से बालो को छिटकते हुए आरोही ने बिना बोले आदित्य को देखा। एक क्षण के लिए सब ठहर सा गया … चुप्पी को तोड़ते हुए बोली आरोही “हाँ”!

“कुछ_नही_दरअसल_तुमसे_बात_करनी_थी.!”

रुक रुक कर बोले आदित्य ने वो शब्द।

शब्दों में रूखापन लाते हुए बोली आरोही”क्या बात करनी थी..”

“मैं तुमसे प्यार करता हूँ” आदित्य ने सारी जान लगा दी बोलने में।

“क्या तुम पागल तो नही हो गए मैंने आज तक तुमसे बात नही की और तुम्हे प्यार भी हो गया..!” आरोही ने कहा।

मैं तुमसे प्यार करता हूँ..पर बदले में प्यार नही चाहिए मुझे..2साल से दिल में छुपाकर रखे जज्बात और नही सम्भाले जा रहे थे.. रोज रात को तारो के बीच आसमान में तुम्हारा चेहरा देखते नींद नही आती उसकी शिकायत नही कर रहा.. मेरे हिस्से का प्यार तुम्हारे ख्वाबो से पूरा कर लूंगा.. पर आज दिल की बात तुम्हे बतानी थी..!!”-आदित्य ने किसी मंझे हुए कवि और दार्शनिक की बातो का मिला झूला ताना बना बोलकर अपनी बात पूरी की।

दोनों के बीच एक ख़ामोशी तीन साल तक रही.. इन तीन सालो में आदित्य और आरोही एक दूसरे को देखते पर बात नही करते..!

जब ग्रेजुएसन खत्म होने को आई तो आदित्य अपने दोस्तों के साथ ऑटो स्टैंड पर खड़ा बाते कर रहा था की सहसा उसकी निगाहें आरोही पर गई..

सफेद सूट में हाथो से पकड़ी हुई किताबो को सीने से लगाकर नीची नजरों के साथ वो आ रही थी..!!

आरोही पर मर मिटने वालो में बहुत लोग थे पर आरोही किसी से बात तक ना करती..!

जिस ऑटो में आरोही बैठी उसी की सामने वाली सीट पर बैठते आदित्य ने 3साल की चूप्पी को तोड़ते हुए कहा 5 साल हो चुके हैं अब मान जाओ..!

पर इससे पहले की आरोही कुछ बोलती लोगो की भीड़ आटो के अंदर आ गई थी.!

3महीने बाद अचानक आदित्य के फोन पे एक नम्बर चमका..

अरे.! ये क्या ये तो व्ही नम्बर हैं जिनपर आदित्य पिछले तीन सालो से हर महीने में एक बार आरोही की आवाज सुनने के लिए ब्लैंक कॉल करता आया हैं..!

“हेल्लो..” आदित्य की आवाज बहुत धीमे थी..

“हेल्लो..आदित्य.. मैं आरोही..!” आरोही ने प्यार से बोला।

आदित्य को यकीन ही नही हुआ की वो आरोही हैं।

पूछने पे पता चला की घर पे ID CALLER लगा हुआ था और आरोही को पता था की ये आदित्य के ही नम्बर हैं..!

आरोही का सिलेक्शन M.BA के लिए किसी सरकारी कॉलेज में दूसरे शहर में हुआ था..!

कब थोड़ी बाते ज्यादा में बदली और कब दोनों का प्यार गहरा होता गया पता ही ना चला..!

आरोही के एक फोन पे आदित्य 250 KM दूर उससे मिलने पहुँच जाता..!

जब आरोही की तबियत खराब होती तो आदित्य पूरा दिन मन्दिर में बैठ कर पूजा करता..!

दोनों ही महादेव के भक्त थे.. इसलिए जब आरोही घर आती तो दोनों सोमवार को जल चढ़ाने के समय मिल लेते..!

लेकिन आरोही आदित्य पर कब गुस्सा हो जाती थी ये आदित्य कभी समझ नही पाता..इसके उल्ट आदित्य उसे पागलो की तरह प्यार करके मिन्नते कर के मना लेता.. आरोही का जब दिल करता वो बात करने के लिए मना कर देती…बेचारा आदित्य चुप चाप सहन कर लेता..!

आरोही के प्यार में खोया आदित्य खुद को अपने करियर को बिलकुल भूल चुका था.. नेटवर्किंग का मास्टर था वो और जाना माना एथलीट भी.. उस पर मर मिटने वाली लड़कियो की कमी ना थी पर उसने आरोही के अलावा किसी को पलक भर भी ना देखा था..माँ-बाप,भाई-बहन सबसे तिरस्कृत होता आदित्य दोस्तों से भी दूर हो गया था… उसके लिए आरोही ही सब कुछ थी..उसके ख्वाब उसकी जिंदगी..!

पर आरोही इस MBA के दो सालो में काफी बदल गई थी..वो आदित्य से बाते कम और झगड़ा ज्यादा करती.. आदित्य के निश्छल प्रेम को भूला रही आरोही की जिंदगी में एक ऊँचे घराने का अमिर लड़का आ गया था.. जो आरोही से ज्यादा उसके शरीर से प्यार करता था.. आदित्य उससे दूर बैठ कर भी उसे दीवानो की तरह प्यार करता ये समझ रहा था की देर सवेर सब ठीक हो जाएगा… पर आरोही एक झूठे प्यार में डूबी होस्टल में मजे से दिन काट रही थी..!

आदित्य आरोही को फोन करता और आरोही का फोन बीजी रहता.. चुप चाप सहता आदित्य एक रात परेसान हो उठा जब उसने देखा आरोही का फोन पिछले 3 घण्टे से बीजी हैं..!

थक कर उसने मैसेज किया ..”क्या तुम मुझे भूल चुकी हो बाबू..प्लीज बात करो मैं जी नही पा रहा तुम्हारे बिना..!”

रात2 बजे आरोही का मैसेज आया ..”who are you… अगर जी नही पा रहे तो मर जाओ.. मुझे दोबारा तंग करने की कोशिस भी मत करना.. मैं किसी और से प्यार करती हूँ..!”

यूँ तो पहले भी कई बार उन दोनों का झगड़ा हुआ पर आज आदित्य हार गया..

अविरल आँखों से बहते आँसुओ को पोंछते हुए उसने ठण्डी हो चुकी चाय के कप को नीचे रखा.!

जिस प्यार के चक्कर में उसने माँ बाप भाई बहन यार दोस्तों को भूला दिया.. जिस प्यार के लिए वो सर्दियों की ठण्डी रातो में घर से 250 KM दूर स्टेसन पर बैठ कर सिर्फ उसकी जरूरत की चीजे सुबह पहुँचाने के लिए जाता था.. जिसके प्यार के लिए वो खुद के करियर को भी भूला चुका था आज वो आरोही उससे पूछ रही थी..”Who are you…?”

आज वो हार गया था.. वो हार गया था अपनी ही महोब्बत से.. आज उसके सपने टूट गए थे.. उसके आँसू निरन्तर जारी थे..

एक और प्यार आज अधूरा रह गया था..!!

 

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